Advertisement

Himalaya की बर्फीली झीलों को लेकर ISRO का बड़ा खुलासा... सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र के ऊपर मुसीबत

हिमालय पर 2431 ग्लेशियल लेक्स हैं. जिनमें से 676 झीलों का आकार लगातार बढ़ा है. इनमें से 130 भारतीय इलाके में हैं. इन झीलों के टूटने का खतरा लगातार बरकरार है. ISRO की नई रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है कि ग्लोबल वॉर्मिंग की वजह से इन ग्लेशियल झीलों पर खतरा मंडरा रहा है.

हिमालय पर ढेरों ग्लेशियल लेक्स हैं, जिनके आकार में वृद्धि हो रही है, यानी ग्लेशियरों के पिघलने से बर्फीली झीलें बन रही हैं. पुरानी झीलें बढ़ रही हैं. (प्रतीकात्मक फोटोः पिक्साबे) हिमालय पर ढेरों ग्लेशियल लेक्स हैं, जिनके आकार में वृद्धि हो रही है, यानी ग्लेशियरों के पिघलने से बर्फीली झीलें बन रही हैं. पुरानी झीलें बढ़ रही हैं. (प्रतीकात्मक फोटोः पिक्साबे)
आजतक साइंस डेस्क
  • नई दिल्ली,
  • 22 अप्रैल 2024,
  • अपडेटेड 11:49 AM IST

हिमालय के पहाड़ों को दुनिया तीसरा ध्रुव (Third Pole) कहा जाता है. वजह है भारी संख्या और मात्रा में ग्लेशियरों की मौजूदगी. और ढेर सारी बर्फ. लेकिन यह इलाका ग्लोबल वॉर्मिंग की वजह से बहुत ज्यादा प्रभावित हो रहा है. बर्फ पिघल रही है. ग्लेशियर सिकुड़ रहे हैं. इसका असर सामाजिक तौर पर भी पड़ता है. 

ग्लेशियरों के सिकुड़ने का मतलब है बर्फ का तेजी से पिघलना. यानी पहाड़ों पर जहां भी यहां से बहने वाला पानी जमा होता है, वहां पर ग्लेशियल लेक्स (Glacial Lakes) बन जाती हैं. पानी जुड़ने से हिमालय में पुरानी ग्लेशियल लेक्स का आकार भी बढ़ जाता है. ये ग्लेशियर और बर्फ भारत की नदियों का स्रोत हैं. लेकिन ये बर्फीली झीलें खतरनाक साबित हो सकती हैं. 

Advertisement

यह भी पढ़ें: Hottest Year 2024: बेईमान होता जा रहा मौसम, तापमान दे रहा धोखा... वैज्ञानिक क्यों कह रहे इस साल गर्मी तोड़ देगी सारे रिकॉर्ड?

इन ग्लेशियल लेक्स से ग्लेशियल लेक्स आउटबर्स्ट फ्लड्स (GLOFS) का खतरा रहता है. जैसे केदारनाथ, चमोली और सिक्किम में हादसे हुए. इससे निचले इलाकों में रहने वालों पर फ्लैश फ्लड और भूस्खलन का खतरा रहता है. ग्लेशियल लेक्स तब फूटती है, जब इनमें कोई भारी चीज गिर जाए या फिर पानी की मात्रा बढ़ने पर इनकी दीवार टूट जाए. 

इसरो नजर रखता है हिमालय के ग्लेशियल लेक्स पर

ISRO इन पर नजर रखता है. सैटेलाइट्स के जरिए नई बनने वाली झीलों पर और साथ ही पुरानी झीलों के बढ़ते हुए आकार पर. ताकि खतरनाक ग्लेशियल लेक्स के फूटने से पहले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा जा सके. या इससे बचाव का कोई रास्ता निकाला जा सके. भारत के पास हिमालय पर मौजूद बर्फीली झीलों का 3-4 दशक का डेटा है. 

Advertisement

यह भी पढ़ें: भारत के क्लाइमेट को लेकर सबसे बड़ी चेतावनी... 3 डिग्री तापमान बढ़ा तो सूख जाएगा 90% हिमालय

हिमालय पर कुल मिलाकर 2431 झीलें, लगातार बढ़ रहा आकार

1984 से 2023 तक के आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि हिमालय में 2431 झीलें ऐसी हैं, जो आकार में 10 हेक्टेयर से बड़ी हैं. जबकि 1984 से अब तक 676 झीलें ऐसी हैं, जिनके क्षेत्रफल में फैलाव हुआ है. इनमें से 130 भारत में मौजूद हैं. सिंधु नदी के ऊपर 65, गंगा के ऊपर सात और ब्रह्मपुत्र के ऊपर 58 ग्लेशियल लेक्स बनी हैं. 

676 झीलों में 89 फीसदी झीलें दो बार से ज्यादा बार फैलीं

इन 676 झीलों में से 601 के आकार में दो बार से ज्यादा फैलाव हुआ है. जबकि 10 झीलें डेढ़ से दोगुना बढ़ी हैं. वहीं 65 झीलें हैं, जो डेढ़ गुना बढ़ी हैं. अगर इन झीलों की ऊंचाई की बात करें तो 314 झीलें 4 से 5 हजार मीटर (13 से 16 हजार फीट) की ऊंचाई पर हैं. जबकि 296 ग्लेशियल लेक्स 5 हजार मीटर से ऊपर हैं.

यह भी पढ़ें: रीयल था वासुकी नाग! टी-रेक्स डायनासोर से बड़ा था... गुजरात के कच्छ में जीवाश्म पर वैज्ञानिकों ने लगाई मुहर

ये हिमाचल प्रदेश के घेपांग घाट पर बनी ग्लेशियल लेक है, जो 1984 से अब तक 178 फीसदी बढ़ गई. 

इन झीलों को चार अलग-अलग कैटेगरी में बांटा गया है. मोरेन डैम्ड यानी पानी के चारों तरफ मलबे की दीवार. आइस डैम्ड यानी पानी के चारों तरफ बर्फ की दीवार, इरोजन यानी मिट्टी कटने की वजह से बने गड्ढे में जमा ग्लेशियर का पानी और अन्य ग्लेशियल झीलें. 

Advertisement

हिमाचल की झील का आकार 178 फीसदी बढ़ा

इन 676 झीलों में से 307 मोरेन डैम्ड, 265 इरोजन और 8 आइस डैम्ड ग्लेशियल लेक्स हैं. सिंधु नदी के ऊपर बने घेपांग घाट ग्लेशियल लेक की ऊंचाई 4068 मीटर है. यह हिमाचल प्रदेश में है. इसके आकार में 178 फीसदी का इजाफा हुआ है. यानी यह पहले 36.40 हेक्टेयर में थी, जो अब बढ़कर 101.30 हेक्टेयर हो चुकी है. यह हर साल 1.96 हेक्टेयर के हिसाब से बढ़ी है. 

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement