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हमारी गैलेक्सी के बाहर मौजूद तारे की पहली क्लोज-अप तस्वीर मिली... मौत के करीब है 'महाशैतान'

पहली बार हमारी आकाशगंगा यानी गैलेक्सी के बाहर कोई तारा खोजा गया है. जिसकी क्लोजअप तस्वीर भी सामने आई है. यह एक बड़ा मैग्लेनिक क्लाउड है, जो हमारी धरती से 1.60 लाख प्रकाश वर्ष दूर है. आप भी इस तस्वीर को देखिए. यह बेहद विशालकाय है. इसका आकार हमारे सूरज की रेडियस से 2000 गुना ज्यादा है.

ये है WOH G64 तारा, जो हमारी गैलेक्सी के बाहर मौजूद है. इसकी मौत हो रही है. (फोटोः ESO) ये है WOH G64 तारा, जो हमारी गैलेक्सी के बाहर मौजूद है. इसकी मौत हो रही है. (फोटोः ESO)
आजतक साइंस डेस्क
  • नई दिल्ली,
  • 22 नवंबर 2024,
  • अपडेटेड 12:30 PM IST

वैज्ञानिकों ने हमारी गैलेक्सी यानी Milkyway से बाहर मौजूद तारे की पहली क्लोजअब तस्वीर ली है. यह तारा धरती से 1.60 लाख प्रकाशवर्ष दूर है. यह दूसरी गैलेक्सी का तारा है. इसके चारों तरफ विशालकाय मैग्लेनिक क्लाउड्स हैं. इसका आकार हमारे सूरज के रेडियस से 2000 गुना ज्यादा है. कुछ समय पहले तक वैज्ञानिक इसे सिर्फ 'The Monster' कहकर बुलाते थे. फिलहाल इसे नाम दिया गया है WOH G64. 

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ये तारा जिस गैलेक्सी में है, वो एक ड्वार्फ गैलेक्सी है. यानी छोटी गैलेक्सी जो हमारी गैलेक्सी के चारों ओर चक्कर लगा रही है. इसकी क्लोज अप तस्वीर लेने के लिए वेरी लार्ज टेलिस्कोप इंटरफेरोमीटर (VLTI) का इस्तेमाल किया गया. ये टेलिस्कोप यूरोपियन साउदर्न ऑब्जरवेटरी में है. जो अंतरिक्ष की गहराई में बहुत अंदर तक जूम करके देख सकता है. 

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चिली के आंद्रे बेलो नेशनल यूनिवर्सिटी के एस्ट्रोफिजिसिस्ट किची ओनाका ने कहा कि हमनें इस तारे के चारों तरफ ककून जैसा अंडाकार बादलों का घेरा भी देखा है. इसका मतलब ये भी हो सकता है कि ये बादल इस तारे की मृत्यु की वजह से निकल रहे हों. ये तारा मर रहा हो. या इस समय यह सुपरनोवा विस्फोट से गुजर रहा हो. 

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आकाशगंगा से बाहर तारों की तस्वीर लेना जटिल

आकाशगंगा के बाहर तारों की तस्वीर लेना या बनाना बेहद कठिन काम है. इसका सबसे बेहतरीन उदाहरण रेड जायंट स्टार बेलटगूज है. जो हमारे सूरज के रेडियस से 764 गुना ज्यादा बड़ा है. यह हमसे 650 प्रकाश वर्ष दूर है. इसकी तस्वीरों में रोशनी इतनी ज्यादा धुंधली हो जाती है कि वैज्ञानिक रोशनी में हो रहे बदलावों को समझ नहीं पा रहे हैं. 

नई तकनीक बनाकर साफ की गई उसकी तस्वीर

WOH G64 तारा बेटलगूज से तीन गुना बड़ा है. लेकिन दूरी हमारी धरती से 250 गुना ज्यादा है. इसलिए बेहद छोटा और धुंधला दिखता है. ओनाका और उनके साथी इस तारे की स्टडी कई सालों से कर रहे हैं. इसके लिए इन लोगों ने नई तकनीक GRAVITY बनाई. ताकि छोटी और धुंधली चीजों की तस्वीरें ली जा सकें. 

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अपने आखिरी दिनों में चल रहा है ये तारा 

साल 2020 से ओनाका और उनकी टीम इस तारे की तस्वीर बनाने में जुटे हैं. लगातार उसे साफ कर रहे थे. स्टडी करते करते पता चला कि ये तारा उस स्टेज में है, जिस स्टेज में दीया बुझने से पहले फड़फड़ाता है. ठीक इसी तरह ये तारा भी इस समय फड़फड़ा रहा है. इसमें से लगातार रोशनी निकल रही है. धूल निकल रही है. जिसके बादल चारों तरफ बन रहे हैं. ये बादल भयानक रेडियोएक्टिव, गर्म और तेज रोशनी वाले हैं. 

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