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जब पहली बार चांद से देखा गया था सूर्यग्रहण, धरती ने रोका था सूरज का रास्ता... हैरान करने वाला Video

अपनी जमीन से आपने सूर्यग्रहण कई बार देखा होगा. लेकिन कभी चांद से इस खूबसूरत नजारे का वीडियो या फोटो देखा है. चांद से अब तक 5 बार इस तरह के ग्रहण देखे गए हैं. दुनिया भर की स्पेस एजेंसियों के पास इनकी तस्वीरें और वीडियो हैं. हम आपको दिखाते हैं चांद की सतह से कैप्चर किया गया पहला सूर्यग्रहण.

ये है वो सूर्यग्रहण जिसकी तस्वीर 1967 में नासा के सर्वेयर-3 लूनर लैंडर ने ली थी. (फोटोः नासा) ये है वो सूर्यग्रहण जिसकी तस्वीर 1967 में नासा के सर्वेयर-3 लूनर लैंडर ने ली थी. (फोटोः नासा)
आजतक साइंस डेस्क
  • नई दिल्ली,
  • 04 अप्रैल 2024,
  • अपडेटेड 3:30 PM IST

चार दिन बाद यानी 8 अप्रैल 2024 को पूर्ण सूर्यग्रहण (Total Solar Eclipse) आने वाला है. जिसे देखने के लिए लोग, वैज्ञानिक संस्थाएं और स्पेस एजेंसियां कई तरह की तैयारियां कर रही हैं. लेकिन क्या आपको पता है सूर्यग्रहण चांद से कैसा दिखता है? क्योंकि ग्रहण का मतलब है सूरज के रास्ते में चांद का आना. 

चांद से सूर्यग्रहण देखते समय चंद्रमा और सूरज के बीच कौन आता है. आज से 57 साल पहले पहली बार NASA के लूनर लैंडर सर्वेयर-3 (Surveyor 3 Lunar Lander) ने यह नजारा कैद किया था. ये बात है 1967 की, जब चांद की सतह पर सर्वेयर-3 साइंटिफिक रिसर्च कर रहा था. तभी उसके कैमरे ने गजब का नजारा कैद किया. 

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सर्वेयर-3 ने देखा कि कैसे सूर्य के सामने धरती आ गई. उसने सूरज को ढंक लिया. डायमंड रिंग भी बना. रोबोटिक सर्वेयर-3 ने इस नजारे वाइड एंगल टेलिविजन कैमरे से यह नजारा कैद किया था. नासा के आर्काइव से कुछ तस्वीरें लेकर इनका एक टाइम लैप्स वीडियो बनाया गया है. वीडियो धुंधला है लेकिन समझ में आ रहा है. 

धरती का वायुमंडल से छन रही थी सूरज की रोशनी

धरती जब सूरज के सामने आई, तब उसके वायुमंडल से सूरज की रोशनी की दिशा बदली. जिसकी वजह से बीडिंग इफेक्ट (Beading Effect) देखने को मिला. यानी सूरज की रोशनी को रोकते बादलों की वजह से होने वाला अंधेरा. उसके बाद फिर आती रोशनी. मामला यहीं खत्म नहीं होता. 

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अब तक पांच बार चांद से दिखा है ग्रहण का नजारा

अब तक 5 बार चांद की सतह से अलग-अलग ग्रहण देखे गए हैं. दो साल बाद ही 1969 में अपोलो-12 (Apollo-12) के एस्ट्रोनॉट्स ने पहली बार चांद की सतह से सूर्यग्रहण देखा था. इस समय भी सूरज और चांद के बीच धरती आई थी. उस समय भी लगभग ऐसा ही नजारा था, जैसा 1967 में देखा गया था. 

चीन के मून मिशन ने ली थी सोलर एक्लिप्स की HD फोटो

चीन के मून रोवर चांगई-3 से ली गई सूर्यग्रहण की तस्वीर. (फोटोः CSNA)

साल 2009 में जापान के रोबोटिक कागुया स्पेसक्राफ्ट (Kaguya Spacecraft) ने हाई रेजोल्यूशन की तस्वीरें ली थीं. इसके अगले हफ्ते ही चीन के चांगई-3 मिशन (Chnag'e-3) के युतू रोवर (Yutu Rover) ने भी चांद की सतह से सूर्यग्रहण देखा. तब भी पृथ्वी ने रोका था सूरज की रोशनी का रास्ता. 

2014 की बात है नासा के लाडी (LADEE) मिशन ने 15 अप्रैल को चांद की सतह से सूर्यग्रहण का नजारा कैप्चर किया था. अब एक बार फिर अप्रैल में पूर्ण सूर्यग्रहण हो रहा है, जिसे उत्तरी अमेरिका में देखा जाएगा.

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