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पहली बार Bird Flu से हुई Polar Bear की मौत, जानिए क्या असर होगा इंसानों पर

Bird Flu दुनिया के उस छोर तक पहुंच गया है, जहां की संभावना भी नहीं थी. इसके संक्रमण से एक सफेद भालू की मौत हो चुकी है. अब वैज्ञानिक समुद्री जीवों के अध्ययन में लग गए हैं कि कहीं किसी को बर्ड फ्लू का संक्रमण तो नहीं. क्योंकि ये वायरस अगर अन्य जानवरों से होते हुए वापस इंसानों को संक्रमित करने न आ जाए.

अलास्का में एक सफेद भालू की मौत बर्ड फ्लू की वजह से हुई है, जो चिंता का विषय है. (सभी फोटोः पिक्साबे) अलास्का में एक सफेद भालू की मौत बर्ड फ्लू की वजह से हुई है, जो चिंता का विषय है. (सभी फोटोः पिक्साबे)
आजतक साइंस डेस्क
  • नई दिल्ली,
  • 18 जनवरी 2024,
  • अपडेटेड 3:04 PM IST

पहली बार एक पोलर बीयर (Polar Bear) यानी ध्रुवीय भालू बर्ड फ्लू (Bird Flu) की वजह से मारा गया. यानी जलवायु परिवर्तन का ये कैसा असर है, जिसकी वजह से ये वायरस ध्रुवीय इलाके तक पहुंच गया. ये सफेद भालू उत्तरी अलास्का में रहता था, कुछ दिन पहले उसमें बर्ड फ्लू के लक्षण दिखे थे. उसके बाद पता चला कि उसकी मौत हो गई. 

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अभी तक H5N1 इंफ्लूएंजा के कुछ स्ट्रेन अलग-अलग जीवों को संक्रमित कर रहे थे. जैसे- लोमड़ी, ऊदबिलाव, मिंक, सी लायन और सील्स. जिसमें अंटार्कटिका के सील्स में भी पहली बार संक्रमण पाया गया. लेकिन पहली किसी ध्रुवीय भालू में यह केस देखने को मिला. इंसानों तक को बर्ड फ्लू ने नहीं छोड़ा. लेकिन भालू के बारे में किसी ने सोचा नहीं था. 

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स्तनधारी जीवों में बर्ड फ्लू के मामले भी देखने को मिले हैं. इस बीमारी की वजह से बड़ी मात्रा में जीवों की मौत हो रही है. लेकिन जीवों की अलग-अलग प्रजातियों में बीमारी के लक्षणों में अंतर देखने को मिल रहा है. अगर अलास्का में एक ध्रुवीय भालू की मौत बर्ड फ्लू से हुई है, तो वहां पर मौजूद सभी सफेद भालुओं की आबादी को खतरा है. साथ ही अन्य जीवों को. 

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ध्रुवीय भालू तक कैसे पहुंचा होगा ये वायरस? 

वैज्ञानिकों का मानना है कि कोई माइग्रेटरी पक्षी यह संक्रमण लेकर अलास्का की तरफ गया होगा. जिसका शिकार किसी लोमड़ी या सील ने किया होगा. उस सील या लोमड़ी को भालू ने मारकर खाया होगा. या उसके मृत शरीर के आसपास से गुजरा होगा. ऐसे में संक्रमित होने की आशंका बढ़ जाती है. भालू के अंदर H5N1 इंफ्लूएंजा का जो स्ट्रेन मिला है. उसकी स्टडी चल रही है. इसे देख लग रहा है कि भालू ने बर्ड फ्लू से संक्रमित किसी जीव के मृत शरीर को खाया होगा. 

कैसे विकसित होता है इंफ्लूएंजा का वायरस? 

इंफ्लूएंजा का वायरस अपने स्वरूप को तेजी से बदलता है. यानी अलग-अलग प्रजातियों के जीवों के शरीर में प्रवेश करते ही वह अपने में बदलाव करता है. ताकि अगला ताकतवर स्ट्रेन बन सके. इसी वजह से इंफ्लूएंजा के वायरस तेजी से फैलते हैं. सर्वाइव करते हैं. लंबे समय तक संक्रमण फैलाते रहते हैं. 

इंसानों के लिए है ये बड़ा खतरा... 

वैज्ञानिक लगातार समुद्री जीवों का अध्ययन कर रहे हैं. ये पता करने के लिए किन-किन जीवों में बर्ड फ्लू का असर है. क्योंकि बहुत सारे समुद्री जीवों को इंसान खाते हैं. क्योंकि भालू खाते हैं समुद्री पक्षियों को. ये पक्षी खाते हैं मछलियों को. मछलियां उनसे छोटे जीवों को. इसलिए खतरा इंसानों तक है. वायरस घूम-टहलकर अपना नया और खतरनाक स्ट्रेन पैदा करेगा. उसके बाद इंसानों को संक्रमित कर सकता है. 

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