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First Time in History... पहली बार चांद की सतह पर उतरा प्राइवेट कंपनी का यान

इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है जब चांद पर किसी निजी कंपनी का यान चंद्रमा की सतह पर उतरा है. अमेरिकी कंपनी इंट्यूशिव मशींस का मून लैंडर ओडिसियस चांद पर 22 फरवरी 2024 को लैंड कर गया. करीब 52 साल बाद अमेरिका ने अपना कोई स्पेसक्राफ्ट चांद की सतह पर उतारा है.

ये है इंट्यूशिव मशींस कंपनी का मून लैंडर ओडिसियस जो चांद की सतह पर उतर चुका है. ये है इंट्यूशिव मशींस कंपनी का मून लैंडर ओडिसियस जो चांद की सतह पर उतर चुका है.
आजतक साइंस डेस्क
  • ह्यूस्टन,
  • 23 फरवरी 2024,
  • अपडेटेड 3:53 PM IST

अमेरिका के ह्यूस्टन की कंपनी इंट्यूशिव मशींस का मून लैंडर Odysseus चांद की सतह पर उतर चुका है. करीब आधी सदी के बाद अमेरिका ने चांद पर अपना कोई लैंडर उतारा है. यह मानव इतिहास का पहली ऐसी घटना है जब किसी निजी कंपनी ने चंद्रमा की सतह पर अपना स्पेसक्राफ्ट उतारा हो.इससे पहले नासा ने अपना आखिरी मून लैंडिंग मिशन 1972 में अपोलो 17 (Apollo 17) किया था.  

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यह स्पेसक्राफ्ट असल में एक कार्गो वेसल है. जिसपर कई तरह के एक्सपेरिमेंट करने वाले यंत्र भेजे गए हैं. तीन-चार दिन पहले ही इस यान ने धरती के साथ अपनी सेल्फी भी भेजी थी. ओडिसियस लैंडर को 15 फरवरी 2024 को लॉन्च किया गया था. लॉन्चिंग नासा के कॉमर्शियल लूनर पेलोड सर्विस प्रोग्राम (CLPS) के तहत किया गया था. 

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ओडिसियस में नासा के छह एक्सपेरिमेंट जा रहे हैं. एक टेक्नोलॉजी डिमॉन्सट्रेटर है. इसके अलावा 6 निजी कंपनी के पेलोड्स हैं. मिशन का नाम है IM-1 Mission. लॉन्चिंग फ्लोरिडा के केनेडी स्पेस सेंटर से की गई. वैज्ञानिकों ने पहले ही यह सटीक अनुमान लगा लिया था चांद पर इसकी लैंडिंग 22 फरवरी को होगी. और हुई भी. 

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नासा ने 979 करोड़ की डील की थी निजी कंपनी से

नासा ने इस काम के लिए IM के साथ 118 मिलियन डॉलर यानी 979.52 करोड़ से ज्यादा का कॉन्ट्रैक्ट किया था. इसके बाद IM ने ओडिसियस मून लैंडर बनाया. कुल मिलाकर यह मिशन 16 दिन का है. यानी नोवा-सी ओडिसियस लैंडर चांद की सतह पर उतरने के बाद 7 दिन तक काम करेगा.

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एक ही लॉन्च विंडो थी... यहां करवाई गई लैंडिंग

लैंडिंग चांद के दक्षिणी ध्रुव पर स्थिति मालापर्ट क्रेटर (Malapert Crater) के पास मालापर्ट ए क्रेटर के पास करवाई गई. यह क्रेटर 69 km चौड़ा है. यान ने चांद तक पहुंचने के लिए 3.84 लाख किलोमीटर की यात्रा की. यह सॉफ्ट लैंडिंग आगे चलकर आर्टेमिस (Artemis Mission) में काफी ज्यादा मदद करने वाला है. 

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