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प्राचीन समुद्री कीड़े का दिमाग देखकर वैज्ञानिक हैरान, 52.50 करोड़ साल पुराना जीवाश्म मिला

अभी तक यही समझा जाता था कि दिमाग का जीवाश्म नहीं बन सकता. लेकिन शोधकर्ताओं के हजारों साल पुराने एक समुद्री जीव का जीवाश्म मिला है. इस जीवाश्म से जीव के दिमाग का भी साफ-साफ पता चलता है. दिमाग के इस जीवाश्म को देखकर वैज्ञानिक भी हैरान हो रहे हैं.

 (Photo: Nicholas Strausfeld/University of Arizona) (Photo: Nicholas Strausfeld/University of Arizona)
aajtak.in
  • बीजिंग,
  • 01 दिसंबर 2022,
  • अपडेटेड 8:13 AM IST

चीन में एक प्राचीन समुद्री कीड़े (Sea Worm) का जीवाश्म मिला है. यह जीवाश्म 52.50 करोड़ साल पुराना है. इसकी खास बात ये है कि यह अब तक का सबसे पुराना जीवाश्म है, जिसमें दिमाग भी देखा जा सकता है. दिमाग के हैरान करने वाले आकार से आर्थ्रोपोड्स के विकास के बारे में कई जानकारी मिलती हैं. 

चीन के युन्नान प्रांत में एक साइट पर मिले इस प्राचीन जीव का नाम कार्डियोडिक्टियन कैटेनुलम (Cardiodictyon catenulum). 1984 में इसे कई अन्य जीवाश्मों के साथ खोजा गया था. यह जीव कीड़े जैसा दिखता है और ये फाइलम लोबोपोडिया से जुड़ा है. यह समुद्र तल पर रहने वाले आर्थ्रोपोड पूर्वजों का एक विलुप्त हो चुका समूह है. इनके शरीर पर कवच की तरह शेल होते थे. ये कैम्ब्रियन काल के दौरान पाए जाते थे.

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चट्टान के बीच से मिला जीवाश्म का नमूना (Photo: Nicholas Strausfeld/University of Arizona)

आर्थ्रोपोड इवोल्यूशन (Arthropod Evolution) जर्नल में हाल ही में प्रकाशित हुए शोध के मुताबिक, वैज्ञानिकों की एक दूसरी टीम ने जीवाश्म नमूने की दोबारा जांच की और पाया कि इसमें आश्चर्यजनक रूप से एक रहस्य छुपा हुआ था- दिमाग समेत एक पूरा संरक्षित नर्वस सिस्टम.

टक्सन में एरिजोना यूनीवर्सिटी के न्यूरोबायोलॉजिस्ट और शोध के मुख्य लेखक निकोलस स्ट्रॉसफेल्ड (Nicholas Strausfeld) का कहना है कि हमारे हिसाब से यह दिमाग का सबसे पुराना जीवाश्म है. सी. कैटेनुलम के दिमाग की खोज करने में वैज्ञानिकों को करीब 40 साल लग गए, क्योंकि शोधकर्ताओं को लगा था कि इस जीव के सॉफट टिश्यू समय के साथ खत्म हो गए थे.

पहले चित्र में जीवाश्म शरीर दिख रहा है, दूसरे चित्र में दिमाग (Photo: Nicholas Strausfeld/University of Arizona)

ब्रिटेन के किंग्स कॉलेज लंदन के न्यूरोसाइंटिस्ट औऱ शोध के सह-लेखक फ्रैंक हिर्थ (Frank Hirth) का कहना है कि आमतौर पर यही समझा जाता है कि दिमाग का जीवाश्म नहीं होता है. जीवाश्म के छोटे आकार और पुराना होने की वजह से पहले के शोधकर्ता मस्तिष्क खोजने की हिम्मत भी नहीं करते थे. लेकिन लगभग उसी समय के इसी तरह के जीवाश्मों की हालिया जांच ने इस धारणा को बदल दिया है. अब तक 50.00 करोड़ साल पुराने कई जीवाश्मों में दिमाग भी देखा गया है. 

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इस जीव का कपाल काफी हैरान करने वाला था. सिर और दिमाग दोनों अलग-अलग बंटे हुए नहीं हैं. जबकि जीवाश्म का बाकी हिस्सा खंडों में बंटा हुआ है. शोधकर्ताओं के मुताबिक इस तरह की शारीरिक रचना की कल्पना नहीं की जा सकती. एक सदी से भी ज्यादा समय तक, शोधकर्ताओं ने यही माना था कि विलुप्त हो चुके आर्थ्रोपोड के दिमाग और सिर आधुनिक आर्थ्रोपोड की तरह ही खंडित थे. 

 

इस खोज के बाद, शोधकर्ताओं का मानना ​​है कि आधुनिक आर्थ्रोपोड्स में देखे गए अलग अलग खंड में बंटे दिमाग और सिर, बाकी नर्वस सिस्टम से अलग विकसित हो सकते हैं, जो शायद पहले अलग हो गए थे. आने वाले समय में, शोधकर्ता इस दिमाग के जीवाश्म की तुलना बाकी जीव समूहों के दिमाग से करना चाहते हैं, ताकि यह समझा जा सके कि अलग-अलग तरह के दिमागों में समय के साथ कैसे बदलाव हुए.

 

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