Advertisement

करोड़ों साल पहले समुद्र पर चलता था इस 'समुद्री शैतान' का राज, जीवाश्म से पता चला बेहद निर्दयी था ये जानवर

वैज्ञानिकों को एक प्राचीन समुद्री जानवर के जीवाश्म मिले हैं, जिनसे पता चलता है कि करोड़ों साल पहले समुद्र का सबसे खतरनाक जानवर यही था. इसकी लंबाई 30 से 33 फीट थी और खतरनाक दिखने वाले नोकीले दांत से पता चलता है कि ये कितनी क्रूरता से शिकार करता होगा. ये जानवर डायनासोर के साथ ही विलुप्त हो गया था.

6.6 करोड़ साल पुराने समुद्री दानव के जीवाश्म मिले (University of Bath) 6.6 करोड़ साल पुराने समुद्री दानव के जीवाश्म मिले (University of Bath)
aajtak.in
  • लंदन,
  • 27 अगस्त 2022,
  • अपडेटेड 5:18 PM IST

वैज्ञानिकों ने एक ऐसे समुद्री जानवर के जीवाश्कीम खोजे हैं, जिनसे करोड़ों साल पहले के समुद्री जीवन के बारे में पता चलता है. ये जीवाश्म एक विशाल समुद्री छिपकली (Giant Marine Lizard) के हैं. इन जीवाश्मों से पता चलता है कि 6.6 करोड़ साल पहले समुद्र पर इस विलुप्त हो चुके जानवर का राज चलता था. 

यह जानवर मोसासौर (Mosasaur) की एक नई खोजी गई प्रजाति है. क्रेटेशियस (Cretaceous) समय के अंत के दौरान महासागरों में इन विशाल समुद्री सरीसृपों (Reptiles) का डर कायम था. इन्हें बेहद खतरनाक जानवर माना जा रहा है.

Advertisement
इस जानवर की लंबाई करीब 30 से 33 फीट थी (Photo: Andrey Atuchin)

क्रेटेशियस रिसर्च (Cretaceous Research) में प्रकाशित शोध के मुताबिक, इस जानवर का नाम है थैलेसोटिटन एट्रोक्स (Thalassotitan Atrox) कहा जाता है. इसे T. atrox भी कहा जाता है. शोध में बताया गया है कि थैलेसोटिटन नाम ग्रीक शब्द 'थलासा' और 'टाइटन' से आया है, जिसका मतलब होता है 'विशालकाय समुद्री जीव' (Sea Giant), और प्रजाति का नाम एट्रोक्स है जिसका मतलब होता है 'क्रूर' या 'निर्दयी'.

सिर्फ विशाल ही नहीं, बल्कि डरावना भी

इसके दांत और बाकी शरीर के अवशेष देखकर यह पता चलता है कि यह जानवर सिर्फ विशाल ही नहीं, बल्कि डरावना भी था. ये समुद्र में पाए जाने वाले मु्श्किल शिकार को अपना निशाना बनाता था. जैसे- समुद्री कछुए, प्लेसीओसॉर और अन्य मोसासौर. जबके दूसरे मोसासौर छोटे जानवरों का शिकार किया करते थे. थैलेसोटिटन को अगर फूड वेब पर देखें तो उसकी जगह सबसे ऊपर थी. इसने बाकी शिकारियों को नियंत्रित रखकर, ईकोसिस्टम को बनाए रखा था.

Advertisement

आज मोसासौर प्रजाति का ऐसा कोई भी रेप्टाइल जीवित नहीं है, जिसकी लंबाई 40 फीट तक हो. ये आज के आधुनिक रेप्टाइल की लंबाई का दोगुना है. इनका एक बड़ा सिर होता था, पंजे वाले पैरों के बजाय फ्लिपर्स होते थे और एक पूंछ वाले शार्क जैसे पंख थे.

थालासोटिटन सबसे उग्र जानवरों में से एक रहा है.​​​​​​ (Photo: University of Bath)

दातों से पता चलती है क्रूरता

मोसासौर की प्रजातियां अपने अलग-अलग दांतों के हिसाब से अलग-अलग तरह का शिकार करती थीं. कुछ जानवरों के दांत छोटे और नुकीले थे जो मछली और स्क्विड के लिए अच्छे थे. कुछ के दांत उतने नोकीले नहीं थे लेकिन जबड़े कुचल देने वाले थे, जो शेल वाले जानवरों के लिए एकदम सही थे. शोध से पता चलता है कि यह मोसासौर मछली, सेफैलोपोड्स, कछुए, मोलस्क, दूसरे मोसासौर, यहां तक ​​​​कि पक्षियों को भी खा जाता था. माना जाता है कि थालासोटिटन सबसे उग्र जानवरों में से एक रहा है.

मोरक्को के फॉस्फेट फॉसिल बेड से इन जीवाश्मों की खोज की गई थी. यह इलाका तरह-तरह के और बेहद संरक्षित क्रेटेशियस और मियोसीन जीवाश्मों से समृद्ध इलाका है. इसके अवशेषों में खोपड़ी, कशेरुक, हाथ-पैर की हड्डियां और उंगलियों की हड्डियां (phalanges) शामिल हैं. 

 इसके कई दांत टूट गए थे और खराब हो गए (Photo: Longrich et al.)

वैज्ञानिकों की टीम ने पाया कि इस जानवर की लंबाई करीब 30 से 33 फीट की रही होगी. हालांकि इसकी खोपड़ी करीब 1.5 मीटर लंबी थी. बाकी मोसासौरों के जबड़े पतले थे, लेकिन थालासोटिटन का जबड़ा चौड़ा और छोटा था, जिसमें बड़े नोकीले दांत थे, जो शिकार को पकड़ने और उसे फाड़ने के लिए एकदम सही थे. हालांकि इसके कई दांत टूट गए थे और खराब हो गए थे. शोधकर्ताओं का मानना है कि हो सकता है कि थैलासोटिटन ने कछुओं के खोल या अन्य मजबूत खोल वाले जानवरों का शिकार किया होगा या कठोर सतहों को अपने दांतों से काटा या तोड़ा होगा.

Advertisement

 

क्रेटेशियस (Cretaceous) काल के आखिर के 2.5 करोड़ सालों में, मोसासौर में बहुत बदलाव हए. थैलासोटिटन की खोज से पता चलता है कि हम जितना सोचते हैं मोसासौर उससे कहीं ज्यादा विविध थे. साथ ही, उनका ईकोसिस्टम बहुत अच्छा था. 6.6 करोड़ साल पहले पृथ्वी पर एक विशाल एस्टेरॉयड के टकराने के बाद डायनासोर विलुप्त हो गए थे, उसी समय मोसासौर भी विलुप्त हो गए. नई खोज यह भी बताती है कि एस्टेरॉयड के टकराने से पहले समुद्र समृद्ध और विविध जीवन से भरा हुआ था.


 

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement