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G20 Summit: वीआईपी पर ड्रोन हमला न हो, इसलिए तैनात किया गया गजब का हथियार

G20 Summit पर किसी तरह का ड्रोन हमला न हो, इसलिए DRDO ने स्वदेशी एंटी ड्रोन सिस्टम को डिप्लोमैटिक एन्क्लेव पर लगाया है. डीआरडीओ के साथ भारतीय सेना और नागरिक एजेंसियां इस कार्यक्रम को सुरक्षित बनाने में जुटी हुई हैं. आइए जानते हैं कि इस स्वदेशी एंटी-ड्रोन सिस्टम की ताकत क्या है...

ये है DRDO का एंटी-ड्रोन सिस्टम, जिसे G20 Summit की सुरक्षा के लिए तैनात किया गया है. ये है DRDO का एंटी-ड्रोन सिस्टम, जिसे G20 Summit की सुरक्षा के लिए तैनात किया गया है.
ऋचीक मिश्रा
  • नई दिल्ली,
  • 08 सितंबर 2023,
  • अपडेटेड 12:29 PM IST

G20 Summit हो रहा है. दुनियाभर के राष्ट्राध्यक्ष और मेहमान दिल्ली आए हुए हैं. कुछ आ रहे हैं. ऐसे में किसी भी तरह के हवाई ड्रोन हमले से बचाव के लिए पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था की गई है. इस समय राष्ट्रीय राजधानी में सैकड़ों की संख्या में वीआईपी मौजूद थे. इनकी सुरक्षा का जिम्मा हमारे देश के सैन्य बलों और रक्षा संबंधी वैज्ञानिक संस्थाओं का रहता है. 

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इसलिए डिप्लोमैटिक एनक्लेव के पास भारतीय रक्षा अनुसंधान संगठन (DRDO) और भारतीय सेना (Indian Army) ने स्वदेशी एंटी-ड्रोन सिस्टम (Indigenous Anti-Drone System) तैनात किया है. इसे काउंटर-ड्रोन सिस्टम (Counter-Drone System) भी बुलाया जाता है. इसमें दो तरह की तकनीक काम करती है. 

पहली तकनीक है सॉफ्ट किल (Soft Kill) यानी किसी भी ड्रोन के संचार लिंक को तोड़ देना. यानी ड्रोन को जिस रिमोट या कंप्यूटर से उड़ाया जाए, उससे ड्रोन का संपर्क तोड़ देना. ताकि ड्रोन दिशाहीन होकर गिर जाए. वह उड़ना बंद कर दे. उसे चलाने वाले का संपर्क टूटते ही ड्रोन किसी का काम का नहीं रहता. 

दूसरी तकनीक है हार्ड किल  (Hard Kill) यानी इस काउंटर ड्रोन सिस्टम की रेंज में आते ही उस पर लेज़र हथियार से हमला किया जाए. लेज़र हमले से ड्रोन के इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम खराब हो जाते हैं. वह जल जाता है. ये लेज़र सिस्टम बिना किसी धमाके के ही ड्रोन को मार गिराता है. 

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इस एंटी-ड्रोन सिस्टम की रेंज चार किलोमीटर है. यानी इस रेंज में आते ही दुश्मन का ड्रोन या तो गिर जाएगा. या फिर गिरा दिया जाएगा. स्वदेशी एंटी-ड्रोन सिस्टम को भारतीय सेना और आंतरिक सुरक्षा एजेंसियों को भी सौंपा गया है. वो भी उनका उपयोग कर रहे हैं. 

पिछले साल दिसंबर 2021 में डीआरडीओ के पांच ऐसे सिस्टम को भारतीय सैन्य बलों को सौंपा था. ये ड्रोन सिस्टम अनमैन्ड एरियल व्हीकल यानी ड्रोन्स को खोजकर उन्हें तत्कल रोक देता है. गिरा देता है या फिर नष्ट कर देता है. 

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