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कहां से आया ये विशालकाय एलियन धूमकेतु? सुसाइड करने सीधे सूरज की तरफ जा रहा

एक विशालकाय धूमकेतु मिला है, जो दूसरे सौर मंडल से आया है. यह बेहद तेजी से हमारे सूरज की ओर जा रहा है. यानी ये सूरज से टकराकर सुसाइड करने की ओर बढ़ रहा है. वैज्ञानिकों ने इतना बड़ा धूमकेतु इससे पहले कभी नहीं देखा. इस धूमकेतु को नासा के गैलेक्सी इवोल्यूशन एक्सप्लोरर सैटेलाइट ने खोजा है.

ये है 96P/Machholz 1 एलियन धूमकेतु जो तेजी से सूरज की ओर जा रहा है. (फोटोः नासा) ये है 96P/Machholz 1 एलियन धूमकेतु जो तेजी से सूरज की ओर जा रहा है. (फोटोः नासा)
aajtak.in
  • वॉशिंगटन,
  • 31 जनवरी 2023,
  • अपडेटेड 7:11 PM IST

नासा के वैज्ञानिकों को एक बेहद विशाल Alien धूमकेतु मिला है. यह कॉमेट किसी दूसरे सौर मंडल से आया है. हमारे सौर मंडल में आने के बाद यह सीधे तेजी से सूरज की ओर जा रहा है. जहां इसकी मौत तय है. यह धूमकेतु 6 किलोमीटर चौड़ा है. यह अंतरिक्ष में बने बर्फ के गोले जैसा है. इसका नाम है 96P/Machholz 1. 

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नासा वैज्ञानिकों को लगता है कि यह किसी अन्य सौर मंडल या दुनिया से हमारे सौर मंडल में आया है. यूरोपियन स्पेस एजेंसी सोलर और हेलियोस्फेरिक ऑब्जरवेटरी स्पेसक्राफ्ट लगातार इस पर नजर रख रहे हैं. इस पर सबसे पहले नासा के गैलेक्सी इवोल्यूशन एक्सप्लोरर सैटेलाइट की नजर पड़ी जब वह बुध ग्रह के पीछे से निकला. पहले इसके पीछे निकली पूंछ सफेद रंग की थी, क्योंकि इसमें से तेजी से अंतरिक्ष में बनी बर्फ निकल रही थी. साथ में गैस भी. 

लेकिन जैसे-जैसे ये सूरज की ओर जा रहा है, ये गर्म होकर लाल होती जा रही है. 96P/Machholz 1 धूमकेतु में कार्बन बहुत कम है. इसमें 1.5 फीसदी साइनोजेन रसायन है. जिसकी वजह से अंतरिक्ष वैज्ञानिकों को लगता है कि ये किसी अन्य सौर मंडल से हमारे सौर मंडल में आया है. क्योंकि हमारे सौर मंडल में खोजे गए धूमकेतुओं में कार्बन ज्यादा और साइनोजेन की मात्रा कम पाई जाती रही है. 

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वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि जैसे-जैसे यह सूरज के नजदीक पहुंचता जाएगा, उसके बारे में और खुलासे होते रहेंगे. वॉशिंगटन डीसी में मौजूद नेवल रिसर्च लैब के एस्ट्रोफिजिसिस्ट कार्ट बाटम्स कहते हैं कि 96P/Machholz 1 धूमकेतु विचित्र है. इसका रसायनिक मिश्रण और व्यवहार पूरी तरह से अलग है. ऐसा धूमकेतु पहले नहीं देखा गया था. अगर हम जांच करते रहेंगे तो इसके बारे में कई तरह के रहस्यों का खुलासा होगा. 

इसे सबसे पहले डेविड मैकहोल्ज ने 1986 में अपने होम मेड कार्डबोड टेलिस्कोप से देखा था. तब यह हमारे सौर मंडल से बाहर था. ज्यादातर धूमकेतु सूरज में जाकर खत्म हो जाते हैं लेकिन उनका आकार 10 मीटर से ज्यादा चौड़ा नहीं होता. लेकिन 96P/Machholz 1 हमारे माउंट एवरेस्ट का दो तिहाई है. जब से इसे खोजा गया है तब से लेकर अब तक सूरज के पास से पांच बार गुजर चुका है. इतने बड़े आकार का होने की वजह से यह पहले खत्म नहीं हुआ. 

लेकिन 1 फरवरी को यह सूरज से बुध की दूरी से तीन गुना कम दूरी पर रहेगा. हो सकता है कि यह इस बार मर जाए. SOHO ने दिसंबर 1995 से अब तक 3000 धूमकेतुओं को खोजा है. इस सैटेलाइट का मुख्य काम सूरज की तरफ नजर रखना है. सूरज के विस्फोट की स्टडी करनी है. सौर तूफानों पर नजर रखना है. कोरोनल मास इजेक्शन पर डेटा भेजना है. लेकिन यह कई बार सूरज के आसपास आने वाली चीजों को भी कैप्चर कर लेता है. 

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