
अल्फ्रेड नोबल (Alfred Nobel) के परनाती और स्वीडिश-अमेरिकन बिजनेसमैन मार्कस नोबल (Marcus Nobel) ने ग्रीन नोबल (Green Nobel) की घोषणा की है. ये सम्मान उन लोगों को मिलेगा जो अमेजन के जंगलों को बचाने का काम कर रहे हैं. मार्कस नोबल फिलहाल ओरेगॉन के पोर्टलैंड में रहते हैं.
मार्कस ने कहा कि यह एक सालाना पुरस्कार होगा. जिसका मुख्य मकसद अमेजन रेनफॉरेस्ट को बचाने के लिए काम करने वालों को प्रोत्साहित करना है. मार्कस के एनजीओ यूनाइटेड अर्थ भी इस प्रोजेक्ट शामिल होगी. अमेजन के जंगलों को बचाने के लिए जागरुकता की जरूरत है. ताकि लोग धरती के फेफड़ों को खत्म न करें.
पिछले साल यह अवॉर्ड बिना किसी प्राइज मनी के दिया गया था. लेकिन अगले साल मिलने वाले अवॉर्ड में प्राइज मनी भी होगी. जिसका खुलासा अभी तक नहीं किया गया है. साथ ही इसका दायरा भी बढ़ा दिया गया है. पहले यह सिर्फ अमेरिका के लिए था लेकिन अब इसमें पूरा अमेजन का इलाका भी शामिल है.
अगले साल जून में दिया जाएगा अवॉर्ड
अवॉर्ड का पूरा नाम है द यूनाइटेड अर्थ अमेजोनिया प्राइज. इसे अगले साल जून महीने में मानौस के 130 साल पुराने ओपरा हाउस में दिया जाएगा. अवॉर्ड के दिन मानौस की रियो नेग्रो नदी के किनारे पांच मीटर ऊंचा ग्लोब लगाया जाएगा, ताकि इस शहर के लोगों को अमेजन के जंगलों और उसके पर्यावरण को बचाने का वादा याद रहे.
अमेजन के जंगलों पर पिछले साल एक स्टडी आई थी. जिसमें कहा गया था कि अमेजन वर्षावन ऐसी स्थिति में पहुंच चुके हैं, जहां से उनकी बर्बादी को रोका नहीं जा सकता. जल्द ही इसका करीब तीन-चौथाई हिस्सा जल जाएगा. घास के मैदानों में बदल जाएगा. कई दशकों से क्लाइमेट मॉडल्स से यह बात सामने आ रही है कि स्थानीय स्तर पर पेड़ों के अवैध कटाव और वैश्विक गर्मी ने अमेजन जंगलों के सहनशक्ति को खत्म कर दिया है.
अमेजन के जंगल भारी मात्रा में पानी को भाप बनाने की प्रक्रिया करते हैं. जिससे आसपास के इलाकों में बारिश होती है. अगर जंगल का एक हिस्सा काट दिया जाएगा या खत्म हो जाएगा, तो बारिश भी नहीं होगी. कम से कम उतने इलाके की बारिश पर तो असर पड़ेगा ही.
अमेजन ने बोल दिया- अब सहन नहीं कर पाऊंगा!
एक ऐसा समय आएगा कि बारिश नहीं होने की वजह से बड़ा इलाका सूख जाएगा. फिर उसमें आग लग सकती है. यह एक बुरा चक्र है जो पूरे जंगल को धीरे-धीरे खत्म कर देगी. पूरा वर्षावन नष्ट हो जाएगा. वैज्ञानिकों ने 25 साल के सैटेलाइट डेटा का एनालिसिस करने के बाद यह खुलासा किया है कि अमेजन ने कह दिया कि अब बस बहुत हुआ. मैं और सहन नहीं कर पाऊंगा.
क्या होती है जंगल की सहन शक्ति?
यूनिवर्सिटी ऑफ एक्स्टर के शोधकर्ताओं ने अमेजन जंगलों के अलग-अलग स्थानों की सहनशक्ति की जांच की. इसमें देखा कि कैसे स्थानीय जंगल लगातार बदल रहे मौसम से किस तरह संघर्ष कर रहे हैं. इसे लेकर 25 साल तक हर महीने के डेटा को खंगाला गया. जंगल की सहनशक्ति का मतलब उसकी वो ताकत जिसके सहारे वो विपरीत परिस्थितियों में भी खुद को बचाए रखता है. जैसे- प्राकृतिक आपदाएं, इंसानी गतिविधियां, जंगलों का कटाव, अचानक से आए मौसम में बदलाव आदि.
जंगल की सहशक्ति का मतलब होता है कि वो इन आपदाओं और मुसीबतों के बाद कितनी जल्दी खुद को फिर से रिकवर कर लेता है. अगर ज्यादा दिन रिकवरी में लगता है तो इसका मतलब उसकी सहनशक्ति कमजोर हो गई है. जो कि पर्यावरण के लिए नुकसानदेह हो सकती है. वहां पर मौजूद जीवों और अन्य पेड़-पौधों के लिए बर्बादी की तरफ ले जा सकती हैं.
कितने बड़े इलाके में की गई सहनशक्ति की स्टडी
स्टडी में पता चला है कि अमेजन के वर्षावनों में से तीन-चौथाई जंगल साल 2000 से लगातार अपनी सहनशक्ति खो रहे हैं. जंगल के अंदर 200 किलोमीटर के दायरे में यह सहनशक्ति पूरी तरह से खत्म हो चुकी है. यहां पर सूखा इलाका बन गया है. यहां अब बारिश भी कम होती है. सहनशक्ति में कमी बायोमास में कमी की वजह से हुई है. स्टडी में इस बात का खुलासा किया गया है.
बेहद जटिल है अमेजन वर्षावनों की प्रणालियां
यूनिवर्सिटी ऑफ एक्स्टर के प्रो. डॉ. क्रिस बोल्टन ने कहा एक बयान में कहा कि अमेजन के वर्षावन (Amazon Rainforest) को लेकर शोधकर्ताओं ने इस बात का अंदाजा नहीं लगाया है कि वो समय कब आएगा कि यह पूरी तरह से नष्ट हो जाएगा. क्योंकि यह बेहद बड़े इलाके में फैला है. इसका अंदाजा लगाने में काफी ज्यादा समय लगेगा. इस जंगल के अंदर कई जटिल प्रणालियां हैं. पेड़ों की अलग, नदियों की अलग, जीवों की अलग. इसलिए पूरे जंगल को लेकर किसी एक तरह की भविष्यवाणी करना बेहद मुश्किल है.
जंगल घास के मैदान बने, उससे पहले करना है ये काम
पोट्सडैम इंस्टीट्यूट फॉर क्लाइमेट इम्पैक्ट रिसर्च के प्रोफेसर निकलास बोर्स ने कहा कि इस स्टडी में एक अच्छी बात ये है कि अमेजन के जंगलों ने अभी वह सीमा पार नहीं की है, जो खतरनाक है. अगर हम चाहें तो अब भी उसे बचाने का प्रयास कर सकते हैं. अमेजन के जंगल सवाना (Savannah) में बदलें, उससे पहले कई प्रयास किए जा सकते हैं. जंगल पर सिर्फ इंसान ही नहीं, बल्कि 2005 से लेकर 2010 तक लगातार आने वाले सूखे और बाढ़ की वजह से भी मुसीबतें आई हैं. लेकिन अभी तक अमेजन में ज्यादा बदलाव नहीं आया है. वो खुद को बचा ले रहा है.
क्या है इस समस्या का समाधान?
अमेजन के वर्षावन (Amazon Rainforest) को लेकर शोधकर्ताओं ने कुछ सलाह भी दी है. उनके मुताबिक इंसानों को सबसे पहले ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में तेजी से कमी आनी चाहिए. जितना ज्यादा संभव हो अमेजन जंगलों की संपदा को सुरक्षित करने की योजनाएं चलाई जाएं. वह भी जमीनी स्तर पर. ये भी माना जा रहा है कि अमेजन के जंगलों की हालत तभी सही हो जब ब्राजील में राष्ट्रपति चुनाव हो जाएंगे. क्योंकि वर्तमान राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो प्राकृतिक संरक्षण को लेकर जरा सा भी काम नहीं कर रहे हैं. बल्कि उनकी नीतियां जंगल को नुकसान पहुंचा रही हैं.
कितने प्रतिशत जंगल बचाए जा सकते हैं?
शोधकर्ताओं का मानना है कि अगर सरकारी नीतियां बदलें और सरकार बदले तो अब भी अमेजन के वर्षावनों के खराब होते हिस्से में से 40 फीसदी को बचाया जा सकता है. क्योंकि ये ब्राजील की सीमा से बाहर हैं. इन जंगलों को अगर स्थानीय लोगों और आदिवासियों के जिम्मे छोड़ दिया जाए तो इनका संरक्षण ज्यादा बेहतर होगा. इससे वहां रहने वाले लोगों को भी फायदा होगा. क्योंकि वो वहीं के लिए बने हैं. वो उस जंगल की नस-नस से वाकिफ हैं.
कौन रहता है अमेजन के जंगल में?
अमेजन के वर्षावन (Amazon Rainforest) दुनिया के किसी भी उष्णकटिबंधीय (Tropical) जंगल से बहुत बड़े हैं. अगर यहां कोई आपदा आती है, तो उसके आसपास रहने वाले सभी लोगों को कई तरह की समस्याओं से जूझना पड़ेगा. दो तरह के नुकसान सीधे तौर पर होंगे. पहला कोरल रीफ्स खत्म होंगे. इसके अलावा अमेजन के जंगल लाखों तरह के पेड़-पौधे, हजारों जीव-जंतुओं की प्रजातियां, सूक्ष्म जीव और स्थानीय आदिवासी रहते हैं. जो जंगल खत्म होने से खत्म हो जाएंगे. यह वैश्विक गर्मी को ठीक करता है. अगर यह जंगल जल गया तो 9000 करोड़ टन कार्बन डाईऑक्साइड निकलेगा, जो कि वायुमंडल के लिए बेहद खतरनाक होगा.