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Heatwave Deaths India: हीटवेव से देश में हर साल कितने लोग मारे जाते हैं... 2015 से 2023 तक की पूरी डिटेल

मौसम विभाग लगातार देश के अलग-अलग हिस्सों में हीटवेव और प्रचंड गर्मी का अलर्ट घोषित कर रहा है. हर साल देश में हीटवेव और गर्मी की वजह से सैकड़ों लोग मारे जाते हैं. 2015 से 2023 तक कुल मिलाकर पूरे देश में हीटवेव से 4057 लोगों की मौत हुई है.

गर्मी के दिन चिलचिलाती धूप से बचने की कोशिश करता एक व्यक्ति. (फोटोः PTI/AP) गर्मी के दिन चिलचिलाती धूप से बचने की कोशिश करता एक व्यक्ति. (फोटोः PTI/AP)
ऋचीक मिश्रा
  • नई दिल्ली,
  • 21 मई 2024,
  • अपडेटेड 4:15 PM IST

मौसम लगातार गर्म हो रहा है. तापमान बढ़ता जा रहा है. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) लगातार देश के अलग-अलग इलाकों में गर्मी को लेकर अलर्ट जारी कर रहा है. फिलहाल जो अलर्ट जारी किया गया है वो चंडीगढ़, पंजाब और हरियाणा के मौसम को लेकर है. तापमान 43 से 47 डिग्री सेल्सियस तक जा सकता है. 

मौसम विभाग ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि लोग दिन के समय बाहर न निकलें. सूती कपड़ों का इस्तेमाल करें. खुद को ढक कर रखें. पानी पीते रहे. कोई भी परेशानी हो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं. यह काम हर साल मौसम विभाग करता है लेकिन इसके बावजूद लोग हीटवेव की चपेट में आ ही जाते हैं. 

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मौसम विभाग के मुताबिक अगले सात दिनों तक मौसम इसी तरह रहेगा. पारा सिर चढ़कर बोलेगा. गर्मी होगी. अगर हम बात करें की हीटवेव की वजह से मरने वाले लोगों की तो साल 2015 से 2023 तक हीटवेव की वजह से कुल मिलाकर देश में 4057 लोग मारे गए हैं. 

गर्मी की वजह से चुनाव को लेकर चिंता

पूरे देश में जनरल इलेक्शन हो रहे हैं. गर्मी की वजह से मतदान पर भी असर पड़ रहा है. सरकार भी इसे लेकर चिंतित है. अन्य पार्टियां भी हैं. पिछले वीकेंड तापमान 46 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया था. मौसम विभाग लगातार हीटवेव को लेकर 'लाल' अलर्ट जारी कर रही है. 

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बढ़ती हुई गर्मी को लेकर क्या है असली वजह? 

भारत में गर्मी के असल में तीन ही महीने हैं. अप्रैल, मई और जून. इस मौसम में भारत के ज्यादातर हिस्सों में भयानक गर्मी होती हैं. इसके बाद मॉनसून का सीजन आता है, जब तापमान गिरना शुरू होता है. लेकिन पिछले एक दशक से गर्मी बढ़ती जा रही है. इसके साथ शुरू होता पानी की किल्लत का सिलसिला. 

दक्षिण एशिया का पारा औसत 0.85 डिग्री ज्यादा 

वर्ल्ड वेदर एट्रीब्यूशन द्वारा की गई स्टडी के मुताबिक जलवायु परिवर्तन की वजह से एशिया के कुछ इलाके जिसमें भारत भी शामिल हैं, वो अप्रैल में ही हीटवेव का सामना 45 गुना ज्यादा कर रहे हैं. इसकी वजह से प्री-मॉनसून में दक्षिण एशिया का तापमान पिछले एक दशक में औसत 0.85 डिग्री सेल्सियस ज्यादा हो गया है. 

अप्रैल में ही हीटवेव से मौतें हो गई थीं शुरू

हीटवेव की वजह से अप्रैल महीने में भारत में 5, बांग्लादेश में 28 लोग मारे गए थे. इसके अलावा थाईलैंड और फिलिपींस से भी मौतों की खबर आई थी. भारत में प्रचंड गर्मी एक सार्वजनिक समस्या बन चुकी है. सरकार का अनुमान है कि पिछली एक सदी में हीटवेव की वजह से देश में करीब 11 हजार लोग मारे गए हैं. 

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