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अपने ही बच्चों को खाने के लिए मजबूर हो रहे ये छिपकली जैसे जीव... जंगलों की कटाई है वजह

प्रकृति के प्रति इंसानों की ज़्यादती इस कदर बढ़ गई है कि इसका खामियाज़ा न सिर्फ इंसान भुगत रहा है, बल्कि जानवरों पर भी इसका सीधा असर पड़ा रहा है. इससे दुखद क्या होगा कि कोई जानवर खुद अपने ही बच्चों को खाने के लिए मजबूर हो जाए. जानिए ये कौनसा जानवर है और क्यों ऐसा कर रहा है.

वनों की कटाई की वजह से सैलामेंडरों को खाना मिलने में हो रही दिक्कत (Photo: Getty) वनों की कटाई की वजह से सैलामेंडरों को खाना मिलने में हो रही दिक्कत (Photo: Getty)
aajtak.in
  • वॉशिंगटन,
  • 24 अप्रैल 2023,
  • अपडेटेड 12:35 PM IST

यू्ं तो जानवरों की कई प्रजातियां ऐसी हैं जहां जानवर अपने बच्चों को खा जाया करते हैं. लेकिन जब नरभक्षण इन जानवरों की प्रवृत्ति न हो और किसी बाहरी वजह से कोई जानवर खुद अपने ही बच्चों को खाने के लिए मजबूर हो जाए, तो हैरानी के साथ-साथ दुख भी होता है. हेलबेंडर सैलामैंडर (Hellbender salamanders) नरों ने अपनी संतानों को खाना शुरू कर दिया है. और वजह है वनों की कटाई. 

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हेलबेंडर सैलामैंडर (क्रिप्टोब्रांचस एलेगेनिएन्सिस), विशाल उभयचरों (Amphibians) की एक प्रजाति है जो दक्षिण-पश्चिमी वर्जीनिया की नदियों के ठंडे पानी में रहते हैं और ये उत्तरी अमेरिका में सबसे बड़े सैलामैंडर माने जाते हैं. ये 2 फीट लंबे और 2.3 किलो वजनी हो सकते हैं. 

पिछले आठ सालों से, वर्जीनिया टेक के वैज्ञानिक हेलबेंडर सैलामैंडर के व्यवहार पर स्टडी कर रहे हैं. शोधकर्ताओं ने पाया कि वनों की कटाई से प्रभावित इलाकों में रहने वाले नर सैलामैंडर अपने बच्चों को खा रहे थे. वास्तव में, पिछले 50 सालों में, अमेरिका में हेलबेंडर सैलामैंडर की संख्या में कमी आई है. शोधकर्ताओं ने इस नरभक्षी व्यवहार के लिए वनों की कटाई के कारण बीमारी, अवैध शिकार, जलवायु परिवर्तन और हैबिटेट लॉस को ज़िम्मेदार बताया है.

14% संतानों को ही खा जाते हैं

आमतौर पर, नर सैलामैंडर ऐसे पिता होते हैं जो शिकारियों से बचने के लिए, अंडे को निषेचित करने के बाद महीनों तक वहीं रहते हैं. वे करीब 14% संतानों को ही खाते हैं, वो जिनके जीवित रहने की संभावना कम होती है. हालांकि, जिन इलाकों में वनों की कटाई हो रही है, वहां बच्चों को खाने की प्रवृत्ति तीन गुना ज़्यादा है. हॉपकिंस को लगता है कि वनों की कटाई की वजह से वाटर कैमिस्ट्री (Water chemistry) में बदलाव सैलामैंडर के भोजन की आपूर्ति को कम कर सकता है, जिससे उसके व्यवहार में इस तरह का बदलाव आया है. 

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विलुप्त हो सकती है प्रजाति

इन सैलामैंडरों के बीच बच्चों की हत्या इतनी आम हो गई है कि शोधकर्ताओं को इस बात की चिंता है कि अगर यही चलता रहा हो यह प्रजाति विलुप्त हो सकती है. वर्जीनिया टेक के एक इकोलॉजिस्ट और शोध के प्रमुख लेखक विलियम हॉपकिंस (William Hopkins) का कहना है कि अगर नरभक्षण की दर इतनी ज़्यादा है, तो इसी से पता चलता है कि बाकी प्रजातियों में हो रही गिरावट की वजह यही हो सकती है.

 

ऐसा नहीं है कि नर हेलबेंडर सैलामैंडर ही अपने बच्चों को खाते हैं. और भी प्रजातियां हैं जहां इस तरह की प्रवृति देखी जाती है, जैसे केन टोड और बाल्टिक कॉम्ब जेली. हॉपकिंस और उनके सहयोगियों द्वारा किए गए शोध को द अमेरिकन नेचुरलिस्ट ( The American Naturalist) जर्नल के आने वाले अंक में प्रकाशित किया जाएगा.

 

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