
अंटार्कटिका (Antarctica) के उत्तर-पश्चिम में स्थित चास्म-1 (Chasm-1) हिमखंड टूटकर अलग हो गया है. अब वो खुले समुद्र में तैरने के लिए तैयार है. ब्रिटिश अंटार्कटिक सर्वे (BAS) ने बताया कि यह हिमखंड यानी आइसबर्ग अपनी प्राकृतिक प्रक्रिया यानी काल्विंग (Calving) की वजह से टूटा है. न कि जलवायु परिवर्तन या ग्लोबल वॉर्मिंग की वजह से. असल में यह अंटार्कटिका के वेस्ट ब्रन्ट (West Brunt) हिस्से में था. जो ईस्ट ब्रन्ट से अलग हो गया है.
यह आइसबर्ग 1550 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल का है. यह जब अलग हुआ तब इसके मुख्य अंटार्कटिका के बीच 150 मीटर मोटी दरार पड़ी थी. इस दरार को एक दशक पहले देखा गया था. तब से धीरे-धीरे यह दरार बढ़ती जा रही थी. आखिरकार चास्म-1 टूट गर अलग हो गया. ऐसा ही एक टुकड़ा जो 1270 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल का था, वो पिछले साल टूटकर अलग हो गया था.
बीएएस के ग्लेशियोलॉजिस्ट डॉमिनिक हॉडसन ने बताया कि काल्विंग एक नेचुरल प्रोसेस है. यह ब्रन्ट आइस सेल्फ का प्राकृतिक व्यवहार है. इसका जलवायु परिवर्तन या ग्लोबल वॉर्मिंग से कोई लेना-देना नहीं है. जहां से यह टुकड़ा अलग हुआ है, वहां पर ब्रिटेन का रिसर्च स्टेशन हैली-6 (Halley-VI) मौजूद है. इसी स्टेशन पर मौजूद वैज्ञानिक आसपास के इलाकों और अंटार्कटिका की स्थिति पर स्टडी करते हैं.
हैली-6 एक मोबाइल रिसर्च स्टेशन है, जिसे साल 2016-17 में आई दरारों के बाद अंटार्कटिका के अंदर की ओर ट्रांसफर कर दिया गया था. तब से लेकर अब तक इस स्टेशन पर वैज्ञानिक सिर्फ नवंबर से मार्च के महीने में तैनात होते हैं. जब अंटार्कटिका में गर्मियां रहती हैं. अभी उस साइट पर 21 शोधकर्ता मौजूद हैं.
ये सभी शोधकर्ता उस रिसर्च फैसिलिटी की पावर सप्लाई का ख्याल रखते हैं. साथ ही वहां पर रिसर्च करते रहते हैं. सर्दियों में रिसर्च का काम रिमोटली यानी दूर से की जाती है. क्योंकि जब यहां पर 24 घंटे अंधेरा रहता है तब तापमान गिरकर माइनस 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है. हॉडसन कहते हैं कि हमारी साइंटिफिक और ऑपरेशनल टीम लगातार अंटार्कटिका पर नजर रखते हैं. ताकि टीम के सभी लोग सुरक्षित रहें.
अब 6 फरवरी 2023 को जो भी डेटा कलेक्ट किया गया है. जो शोध किए गए हैं, उनके सैंपल्स, डेटा, रिपोर्ट को लेने एक विमान जाएगा. इस प्लेन में उन वैज्ञानिकों के लिए खाने-पीने, सेहत, मेडिकल और रिसर्च संबंधी सामान भेजा जाएगा.