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New BrahMos: वायुसेना ने सुखोई-30MKI से दागी ब्रह्मोस मिसाइल, टारगेट तबाह

BrahMos Missile: भारतीय वायुसेना (Indian Airforce) ने पूर्वी समुद्री तट पर एक नौसैनिक जहाज पर ब्रह्मोस (BrahMos) मिसाइल से निशाना लगाया. जिसमें टारगेट पूरी तरह से बर्बाद हो गया. वायुसेना ने इस दौरान भारतीय नौसेना के साथ मिलकर यह लाइव टेस्ट किया.

IAF live fired BrahMos Missile: Su30 MKI फाइटर जेट से ब्रह्मोस मिसाइल लॉन्चिंग. (फाइल फोटोः ANI) IAF live fired BrahMos Missile: Su30 MKI फाइटर जेट से ब्रह्मोस मिसाइल लॉन्चिंग. (फाइल फोटोः ANI)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 19 अप्रैल 2022,
  • अपडेटेड 11:46 PM IST
  • नया एयर लॉन्च वर्जन हो रहा तैयार
  • पहला वर्जन भी था शानदार-सटीक

भारतीय वायुसेना (Indian Airforce) ने देश के पूर्वी तट पर सुखोई 30 एमकेआई फाइटर जेट से भारतीय नौसेना (Indian Navy) के डिकमीशन्ड जहाज पर ब्रह्मोस (BrahMos) मिसाइल से लाइव फायर किया. मिसाइल ने पूरी सटीकता के साथ टारगेट को ध्वस्त कर दिया. इस परीक्षण के दौरान भारतीय नौसेना ने वायुसेना का पूरा साथ दिया.

करीब एक हफ्ते पहले ही यह खबर आई थी कि भारतीय वायुसेना के लिए ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल (BrahMos Cruise Missile) का अपग्रेडेड एयर वर्जन तैयार हो रहा है. इसकी रेंज 800KM होगी. यानी हमारे फाइटर जेट हवा में रहते हुए दुश्मन के ठिकानों को इतनी दूर से ही ध्वस्त कर सकते हैं. हो सकता है कि यह परीक्षण इसी संबंध में हो लेकिन वायुसेना या सरकार की तरफ इसे लेकर कोई बयान नहीं आया है.

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एक साफ्टवेयर अपडेट करते ही बढ़ जाती है रेंज

भारत सरकार लगातार टैक्टिकल मिसाइलों की रेंज को बढ़ा रही है. सिर्फ एक सॉफ्टवेयर अपग्रेड करने से मिसाइल की रेंज में 500KM की बढ़ोतरी होती है. भारतीय वायुसेना के 40 सुखोई-30 MKI फाइटर जेट पर ब्रह्मोस क्रूज मिसाइलें तैनात की हैं. यह मिसाइलें बेहद सटीक और ताकतवर हैं. ये दुश्मन के कैंप को पूरी तरह से तबाह कर सकती हैं. 

कुछ समय पहले भी हुई थी एयर वर्जन की टेस्टिंग. (फोटोः DRDO)

तीन महीने पहले हुआ था सफल परीक्षण

पिछले साल 8 दिसंबर 2021 वायुसेना के लड़ाकू विमान सुखोई-30 एमके-1 में ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल के एयर वर्जन का सफल परीक्षण किया गया. मिसाइल ने तय मानकों को पूरा करते हुए दुश्मन के ठिकाने को ध्वस्त कर दिया. सुखोई-30 एमके-1 (Sukhoi-30 MK-1) फाइटर जेट में लगाए गए ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल को पूरी तरह से देश में ही विकसित किया गया है. इसमें रैमजेट इंजन (Ramjet Engine) तकनीक का उपयोग किया गया है. ताकि इसकी गति और सटीकता और ज्यादा घातक हो जाए. इससे पहले ब्रह्मोस मिसाइल के एयर वर्जन का सफल परीक्षण जुलाई 2021 में किया गया था. 

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अन्य फाइटर जेट्स में भी लगेंगी ये मिसाइलें

भारतीय वायुसेना के सुखोई-30MKI फाइटर जेट्स में भी ब्रह्मोस मिसाइलें तैनात हैं. इसकी रेंज 500 किलोमीटर है. भविष्य में ब्रह्मोस मिसाइलों को मिकोयान मिग-29के, हल्के लड़ाकू विमान तेजस और राफेल में भी तैनात करने की योजना है. इसके अलावा पनडुब्बियों में लगाने के लिए ब्रह्मोस के नए वैरिएंट का निर्माण जारी है. अगले साल तक इन फाइटर जेट्स में ब्रह्मोस मिसाइलों को तैनात करने की तैयारी पूरी होने की संभावना है.  

भारतीय नौसेना भी लगातार कर रही है ब्रह्मोस मिसाइल के नेवल वर्जन का परीक्षण. (फोटोः पीटीआई)

दुश्मन की नजर में नहीं आती ब्रह्मोस मिसाइल

ब्रह्मोस मिसाइल हवा में ही मार्ग बदलने में सक्षम है. चलते-फिरते टारगेट को भी ध्वस्त कर सकता है. यह 10 मीटर की ऊंचाई पर उड़ान भरने में सक्षम हैं, यानी दुश्मन के राडार को धोखा देना इसे बखूबी आता है. सिर्फ राडार ही नहीं यह किसी भी अन्य मिसाइल पहचान प्रणाली को धोखा देने में सक्षम है.  इसको मार गिराना लगभगल अंसभव है.  

टोमाहॉक मिसाइल से दोगुनी है इसकी गति

ब्रह्मोस मिसाइल अमेरिका के टॉमहॉक मिसाइल की तुलना में दोगुनी अधिक तेजी से वार करती है. इसकी प्रहार क्षमता टॉमहॉक मिसाइल से कई गुना ज्यादा है. यह मिसाइल 1200 यूनिट की ऊर्जा पैदा करती है, जो किसी भी बड़े टारगेट को मिट्टी में मिला सकता है. 

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