
भारत ने चीन के पड़ोसी देश वियतनाम को अपना एक एक्टिव युद्धपोत गिफ्ट किया है. इस युद्धपोत के मिलने के बाद साउथ चाइना सी में वियतनाम की ताकत बढ़ जाएगी. क्योंकि इस समुद्री इलाके को लेकर चीन के साथ अक्सर उसका संघर्ष या विवाद चलता रहता है. केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 19 जून 2023 को नई दिल्ली में वियतनाम के रक्षा मंत्री जनरल फान वान गियांग के साथ बातचीत की.
इस बैठक के दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग की विभिन्न पहलों की प्रगति की समीक्षा की गई. दोनों मंत्रियों ने सहयोग के वर्तमान क्षेत्रों विशेष रूप से उद्योग संबंधी सहयोग, समुद्री सुरक्षा और बहुराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ाने के साधनों की पहचान की.
रक्षा मंत्री ने स्वदेश निर्मित इन-सर्विस मिसाइल कॉर्वेट आईएनएस कृपाण उपहार में देने की भी घोषणा की. आईएनएस कृपाण वियतनाम पीपुल्स नेवी की क्षमताओं को बढ़ाने में मील का पत्थर साबित होगी. वियतनाम के रक्षा मंत्री ने रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) मुख्यालय का भी दौरा किया तथा रक्षा अनुसंधान और संयुक्त उत्पादन में सहयोग के माध्यम से रक्षा औद्योगिक क्षमताओं को बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की.
आईएनएस कृपाण 12 जनवरी 1991 को भारतीय नौसेना में शामिल की गई थी. अब भी काम कर रही है. यह खुकरी क्लास कॉर्वेट युद्धपोत है. 1350 टन का डिस्प्लेसमेंट है. इसकी लंबाई 91.1 मीटर और बीम 10.5 मीटर का है. यह अधिकतम 50 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से समुद्र में चल सकती है.
तगड़ी रेंज, घातक हथियारों से लैस है कृपाण
अगर 30 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से इसे चलाया जाए तो इसकी रेंज 7400 किलोमीटर हती है. इसमें 4 पी20एम एंटी शिप मिसाइलें, 2 स्ट्रेला-2 एम तोपें हैं, जिन्हें कंधे पर रखकर फाइटर जेट्स या हेलिकॉप्टरों पर दागा जाता है. इसके अलावा एक 76 मिलिमीटर की एके-176 गन लगी है. साथ ही 30 मिलिमीटर की 2 एके-630 गन लगी है. यानी दुश्मन पर हमला करना इससे बेहद आसान है. इसपर एक हेलिकॉप्टर तैनात हो सकता है.
क्या होते हैं कॉर्वेट युद्धपोत?
इनमें तीन तरह के युद्धपोत हैं. पहला एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट हैं. भारतीय नौसेना के लिए ऐसे 16 युद्धपोत बन रहे हैं. एक INS Arnala लॉन्च हो चुका है. 13 का निर्माण हो रहा है. 2 की प्लानिंग है. इनका काम तटीय इलाकों की पेट्रोलिंग और दुश्मन की पनडुब्बियों की खोज और जरुरत पड़ने पर उन्हें नष्ट करना है. 2026 तक सभी कॉर्वेट्स नौसेना को मिल जाएंगे. इनमें कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम है. साथ ही हल्के टॉरपीडोस से लैस.
सिर्फ इतना ही नहीं इसमें एंटी-सबमरीन रॉकेट्स भी लगाए गए हैं, जो दुश्मन की पनडुब्बियों की कब्र समुद्र के अंदर ही बना देंगे. इस जहाज पर 7 अधिकारियों के साथ 57 नौसैनिक तैनात हो सकते हैं. इसमें लगे मरीन डीजल इंजन के साथ तीन वाटर जेट्स लगे हैं, जो इसे करीब 47 किलोमीटर प्रतिघंटा की अधिकतम रफ्तार देंगे. यह 88% स्वदेशी है. इन कॉर्वेट्स को लो इंटेंसिटी मैरीटाइम ऑपरेशंस (LIMO) के लिए बनाया गया है. इनकी रेंज 3334 किलोमीटर है.
नेक्स्ट जेनरेशन मिसाइल वेसल्स
दूसरे हैं- नेक्स्ट जेनरेशन मिसाइल वेसल्स. ऐसे 6 जंगी जहाज बनाने की योजना है. ये 2200 टन डिस्प्लेसमेंट के होंगे. इनमें ब्रह्मोस, एंटी-शिप मिसाइल, लैंड अटैक मिसाइल तैनात होंगे. इन पर 80 नौसैनिक और 13 अधिकारी तैनात रहेंगे. इनकी रेंज 5200 किलोमीटर होगी. इनपर 32 वर्टिकली लॉन्च्ड शॉर्ट रेंज सरफेस टू एयर मिसाइल, 8 ब्रह्मोस या 16 एंटी शिप VSHORADS मिसाइलों को तैनात करने की योजना है.
तीसरा है नेक्स्ट जेनरेशन कॉर्वेट. ये 3500 टन डिस्प्लेसमेंट वाले जंगी जहाज होंगे. इनकी रेंज 7400 किलोमीटर होगी. इनपर 32 VL-SRSAM, 8 ब्रह्मोस, 16 नौसैनिक एंटी-शिप मिसाइल यानी VSHORADS और 2 वरुणास्त्र टॉरपीडो ट्यूब्स होंगे.