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इस बार पड़ेगी भयानक गर्मी, जानिए सेहत, चुनाव, नदियों और फसलों पर क्या होगा असर

इस बार देश का ज्यादातर हिस्सा भयानक गर्मी का सामना करने वाला है. कई बार लू का दौर चलेगा. हीटवेव चुनाव पर भी असर डालेगा. लोगों की सेहत को भी खतरा रहेगा. आइए जानते हैं कि इस बार गर्मी कितना रुलाने वाली है.

इस साल अप्रैल से जून के बीच भयानक गर्मी पड़ने की भविष्यवाणी की गई है. (सभी फोटोः रॉयटर्स) इस साल अप्रैल से जून के बीच भयानक गर्मी पड़ने की भविष्यवाणी की गई है. (सभी फोटोः रॉयटर्स)
आजतक साइंस डेस्क
  • नई दिल्ली,
  • 02 अप्रैल 2024,
  • अपडेटेड 8:27 PM IST

गर्मी ने आने से पहले ही ट्रेलर दिखा दिया है. इस बार राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और ओडिशा में इसी महीने यानी अप्रैल में 20 दिन तक लू चलेगी. भयानक हीटवेव का सामना करना पड़ेगा. इसके बाद जून तक पूरे देश का करीब 85% हिस्सा आग में झुलसेगा. पिछली साल यह आंकड़ा 60% था. 

जून के बाद भी तुरंत राहत मिल जाए, इसकी संभावना कम ही है. क्योंकि ला नीना को आने में समय लगेगा. अप्रैल से जून तक देश का ज्यादातर हिस्सा भयानक गर्मी झेलेगा. यानी हीटवेव. इससे पारा सामान्य से 5 डिग्री सेल्सियस या उससे ऊपर रहेगा. हीटवेव अधिक होने की वजह अल नीनो है. अगले तीन महीने ये अपना सबसे खतरनाक रूप दिखाएगा. अल नीनो का अंत जून में हो रहा है. 

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मौसम विभाग ने बताया है कि अगले हफ्ते से ही देश के कई राज्यों में तापमान 2 से 5 डिग्री सेल्सियस बढ़ जाएगा. इसका अधिक प्रभाव राजस्थान, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, मध्यप्रदेश, झारखंड और छत्तीसगढ़ में देखने को मिलेगा. इस दौरान 20 दिन के लिए लू का एक भयानक दौर भी चल सकता है. यानी भयानक गर्मी की तैयारी कर लीजिए. 

इस बार टूट सकता है हीटवेव का रिकॉर्ड

आमतौर पर अप्रैल में हीटवेव 4 से 8 दिन ही चलती है. लेकिन इस बार स्थितियां जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वॉर्मिंग की वजह से अलग हैं. इस बार देश के 23 राज्य लू और हीटवेव के 10 से 20 दिन का दौर देखेंगे. पिछले साल 31 मई से 20 जून तक लू और हीटवेव का सबसे लंबे समय का रिकॉर्ड बना था. यह रिकॉर्ड इस बार टूट सकता है. सिर्फ दिन में ही नहीं बल्कि रात में भी पारा आसमान छुएगा. 

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दक्षिण-मध्य और पूर्व भारत झुलसेगा 

अप्रैल, मई और जून तीनों महीनों में भारत का दक्षिणी, मध्य और पूर्वी इलाका भयानक गर्मी बर्दाश्त करने वाला है. अप्रैल में सामान्य से थोड़ा ऊपर हीटवेव रहेगी. दक्षिणी भारत में यह स्थिति ज्यादा देखने को मिलेगी. इसके अलावा उत्तर-पश्चिम मध्य भारत और कुछ हिस्सा पूर्वी और मैदानी इलाकों का. 

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अगर मॉनसून से पहले की बारिश की बात करें, तो अप्रैल में सामान्य बारिश हो सकती है. लेकिन चीजें और मौसम मई-जून में बदलेंगे. कुल मिलाकर इस बार गर्मियों के मौसम में होने वाली प्री-मॉनसून बारिश सामान्य से कम होगी. ऐसे में देश के बड़े हिस्से को गर्मी से कोई राहत मिलती नजर नहीं आ रही है. 

लोगों की सेहत पर पड़ेगा ज्यादा असर

हीटवेव का असर लोगों की सेहत पर ज्यादा पड़ेगा. खासतौर से बुजुर्ग और बच्चों पर. या फिर उन्हें जिनको किसी तरह की शारीरिक दिक्कत है. या सेहत संबंधी समस्याएं हैं. हीट स्ट्रोक, गर्मी से थकान और डिहाइड्रेशन के मामले ज्यादा सामने आएंगे. दिक्कत पावर ग्रिड पर भी आएगी. बिजली की खपत बढ़ने पर लोड बढ़ेगा. 

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चुनाव पर भी पड़ सकता है उलटा प्रभाव

सबसे बड़ी समस्या है चुनाव के दौरान ही गर्मी भयानक पड़ेगी. यानी 19 अप्रैल से 1 जून तक. यह वह समय होगा जब करोड़ों मतदाता चुनाव में वोट डालने निकलेंगे. पृथ्वी विज्ञान मंत्री किरेन रिजिजू इसे लेकर कहा कि चुनाव के दौरान गर्मी से दिक्कत आएगी. इसके लिए सरकार तैयारी करेगी. ताकि मतदान के दौरान लोगों को दिक्कत न हो. 

फसलें गर्मी बर्दाश्त कर पाएंगी या नहीं

मौसम विभाग के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र ने बताया कि अधिक गर्मी से गेंहू पर असर नहीं पड़ेगा. मध्यप्रदेश में तापमान अभी 40 डिग्री सेल्सियस से नीचे हैं. अगले हफ्ते 42 तक पहुंचेगा. यहां गेंहू की 90 फीसदी कटाई हो चुकी है. पंजाब, हरियाणा और यूपी में भी तापमान 35 डिग्री से ऊपर है. इसलिए फसल को नुकसान की उम्मीद कम है. 2022 में लू ने गेंहू की फसल को नुकसान पहुंचाया था. 

नदियों पर भी भयानक असर, होगी पानी की किल्लत

गंगा, गोदावरी, नर्मदा समेत देश की 12 प्रमुख नदियों में पानी पिछले साल की तुलना में कम है. दक्षिण भारत की 13 नदियों में तो पानी है ही नहीं. इस बार गर्मी भी बहुत ज्यादा पड़ने वाली है. जब तक बारिश होगी, तब तक देश में पानी को लेकर हाहाकर मच जाएगा. अधिकांश नदियों के बेसिन में 40 फीसदी से कम जल भंडारण देखने को मिला है. 

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