
C-295 ट्रांसपोर्ट विमान. एक मीडियम टैक्टिकल ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट है. जिसे पहले स्पेन की कासा कंपनी बनाती थी. अब इसका निर्माण एयरबस करता है. 1997 में इसकी पहली उड़ान हुई थी. उसके बाद से अब तक ऐसे 200 विमान बनाए जा चुके हैं. इस विमान की खासियत इसका आकार है. फिलहाल इसका इस्तेमाल मिस्र, पोलैंड, कनाडा और स्पेन कर रहे हैं. अब भारत भी करेगा. 56 विमान बनेंगे. पहले 16 विमान स्पेन में और बाकी भारत में बनाए जाएंगे. इसे भारत में टाटा एडवांस सिस्टम्स लिमिटेड (TASL) बनाएगी.
अन्य कार्गो विमानों की तरह इसमें चार या पांच क्रू नहीं लगते. इसे सिर्फ 2 लोग उड़ाते हैं. इसके अंदर 73 सैनिक, 48 पैराट्रूपर या 12 स्ट्रेचर ले जाए जा सकते हैं. मीडियम साइज का होने की वजह से छोटे रनवे पर लैंडिंग और टेकऑफ आसान है. यह अधिकतम 9250 किलोग्राम तक वजन उठाकर उड़ सकता है. इस विमान के शामिल होने से पुराने पड़ रहे इल्यूशिन II-76 और एंतोनोव-32 विमानों को बदला जा सकेगा.
इसकी लंबाई 80.3 फीट है. विंग्स्पैन 84.8 फीट है. ऊंचाई 28.5 फीट है. इस प्लेन में एक बार में 7650 लीटर ईंधन आता है. हालांकि, हवा में उड़ान के समय भी इसमें रीफ्यूलिंग की जा सकती है. इसमें छह ब्लेड वाले दो इंजन हैं. जिनका व्यास 12.11 फीट है. यह अधिकतम 482 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से उड़ सकता है.
एक इंजन के सहारे 13 हजार फीट उड़ सकता है
सी-295 की रेंज 1277 किलोमीटर से लेकर 4587 किलोमीटर तक है. रेंज का घटना-बढ़ना प्लेन में मौजूद वजन पर निर्भर करता है. यह एक इंजन के सहारे भी 13,533 फीट की ऊंचाई तक उड़ सकता है. अगर दोनों इंजन काम कर रहे हैं तो यह 30,003 फीट तक जा सकता है.
छोटे रनवे पर टेकऑफ-लैंडिंग का फायदा
इसका टेकऑफ अन्य परिवहन विमानों की तुलना में कम है. यह 844 मीटर लंबे रनवे से उड़ान भर लेता है. लैंड करते समय इसे सिर्फ 420 मीटर की जरुरत होती है. अधिकतम 729 मीटर तक. इसमें कुछ हथियार भी लगाए जा सकते हैं. लेकिन वो वैकल्पिक है. इसमें छह तरह के हथियार लगाए जा सकते हैं.
जानिए भारतीय वायुसेना के अन्य विमानों के बारे में...
इल्यूशिन II-76 (IL-II 76) ... भारतीय वायुसेना के पास ऐसे 17 विमान हैं. यह एक स्ट्रैटेजिक एयरलिफ्टर है. जिसे सोवियत संघ ने बनाया था. इसकी पहली उड़ान 1971 में हुई थी. इससे सैनिकों को लाने ले जाने का काम किया जाता है. साथ ही इसे टैंकर में भी बदल सकते हैं. यह चार इंजन से उड़ता है. इसे पांच लोग मिलकर उड़ाते हैं. इसे भारत में गजराज भी कहते हैं.
यह 152.10 फीट लंबा और 48.5 इंच ऊंचा है. अधिकतम 900 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से उड़ता है. रेंज 9300 किलोमीटर है. अधिकतम 43 हजार फीट की ऊंचाई तक जा सकता है. इसे कम से कम 450 मीटर लंबा रनवे चाहिए लैंडिंग के लिए. इसमें 2X23 मिलिमीटर के कैनन लगे हैं. साथ ही दो हार्डप्वाइंट्स हैं, बम लगाने के लिए. इसके कई वैरिएंट्स हैं, जो अलग-अलग क्षमता में वजन उठा सकते हैं.
बोईंग C-17 ग्लोबमास्टर ... दुनिया के सबसे बड़े ट्रांसपोर्ट विमानों में से एक. भारत के पास 11 हैं. ये भी स्ट्रैटेजिक एयरलिफ्टर है. पहली उड़ान 1991 में हुई. तब से लेकर अब तक 279 विमान बन चुके हैं. इसे तीन लोग मिलकर उड़ाते हैं. यह 77,159 किलोग्राम वजन का कार्गो, इंसान या हथियार उठा सकता है.
इसमें 102 पैराट्रूपर या 134 सैनिक या 54 स्ट्रेचर या एक अबराम टैंक या दो बख्तरबंद वाहन लोड कर सकते हैं. यह 174 फीट लंबा है. 55.1 फीट ऊंचा है. अधिकतम गति 830 किलोमीटर प्रतिघंटा होती है. मैक्सिमम रेंज 4480 से 11,540 किलोमीटर हो सकता है. यह वजन पर निर्भर करता है. अधिकतम 45 हजार फीट की ऊंचाई तक जाता है.
सी-130 सुपर हरक्यूलिस... चार इंजन वाला टर्बोप्रॉप मिलिट्री ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट है. 1996 में पहली उड़ान हुई थी. उसके बाद से कई देशों में यह विमान इस्तेमाल हो रहा है. अब तक 500 प्लेन बन चुके हैं. जरुरत के हिसाब से इसके कई वैरिएंट्स बनाए गए हैं. इसे 3 लोग मिलकर उड़ाते हैं. इसमें 92 यात्री, 64 एयरबॉर्न ट्रूप्स, 6 पैलेट्स, 74 मरीज, 2-3 हमवी या एक बख्तरबंद वाहन ले जा सकते हैं.
यह 97.9 फीट लंबा और 38.10 फीट ऊंचा है. इसमें 19,051 किलोग्राम वजन ले जा सकते हैं. यह अधिकतम 670 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से उड़ सकता है. इसकी रेंज 3300 किलोमीटर है. अधिकतम 28 हजार फीट तक जा सकता है. अगर यह पूरी तरह से लोडेड है तो. नहीं तो यह 40 हजार फीट से ज्यादा ऊपर जा सकता है.
एंतोनोव एएन-32... भारत के पास 103 एंतोनोव-32 विमान मौजूद हैं. यह टर्बोप्रॉप ट्विन इंजन ट्रांसपोर्ट विमान है. इसकी पहली उड़ान 1976 में हुई थी. इसके बाद से अब तक 373 विमान बन चुके हैं. इसके कई वैरिएंट्स मौजूद हैं. इसे चार लोग मिलकर उड़ाते हैं. इसमें 42 पैराट्रूपर या 50 यात्री या 24 मरीज ढोए जा सकते हैं. या फिर 6700 किलोग्राम वजन का कार्गो. 78 फीट लंबे विमान की ऊंचाई 28.8 फीट है. यह अधिकतम 530 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से उड़ सकता है. रेंज 2500 किलोमीटर है. मैक्सिमम 31,200 फीट की ऊंचाई तक उड़ान भर सकता है.
हॉकर सिडली एचएस 748... इंग्लैंड में बना है ये ट्रांसपोर्ट प्लेन. भारत के पास 57 विमान हैं. भारत में इसे हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड बनाती है. इसकी पहली उड़ान 1960 में हुई थी. तब से अब तक 380 विमान बन चुके हैं. इसके एक दर्जन से ज्यादा वैरिएंट्स हैं. इसे तीन लोग मिलकर उड़ाते हैं. यह अधिकतम 40-58 यात्रियों को लेकर उड़ सकता है. इसकी लंबाई 67 फीट और ऊंचाई 24.10 फीट होती है. 452 किलोमीटर प्रतिघंटा की गति से उड़ सकता है. अधिकतम 1715 किलोमीटर इसकी रेंज है.
डॉर्नियर 228... यह एक यूटिलिटी विमान है. भारत के 53 हैं. 6 एचएएल को बनाने का निर्देश दिया गया है. डॉर्नियर विमान भारतीय नौसेना कई वर्षों से इस्तेमाल कर रही है. अब नई पीढ़ी के विमान मंगाने जा रही है. ये हैं डॉर्नियर-228. इसे दो लोग मिलकर उड़ाते हैं. इसमें 19 लोग बैठ सकते हैं. 54.4 फीट लंबे विमान की अधिकतम गति 413 किलोमीटर प्रतिघंटा है. लगातार दस घंटे उड़ान भर सकता है.
अधिकतम रेंज 2363 किलोमीटर है. यह अधिकतम 25 हजार फीट की ऊंचाई तक जा सकता है. इसकी खासियत ये है कि ये शॉर्ट टेकऑफ और शॉर्ट लैंडिंग कर सकता है. यानी इसे टेकऑफ के लिए 792 मीटर का रनवे और लैंडिंग के लिए सिर्फ 451 मीटर का रनवे चाहिए. इसलिए यह विमान भारतीय मिलिट्री बहुत पसंद करती है.
इसके अलावा भारतीय वायुसेना बोईंग-777, बोईंग-737 और एंब्रेयर लीगेसी 600 विमानों का इस्तेमाल करती है. यह वीआईपी ट्रांसपोर्ट के लिए उपयोग होते हैं. बोईंग-777 भारत का एयरफोर्स वन है, जिसमें राष्ट्रपति उड़ते हैं.