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छठी कलवारी क्लास INS Vagsheer पनडुब्बी लॉन्च, जानिए इसकी ताकत

स्कॉरपीन यानी कलवारी क्लास की आखिरी पनडुब्बी आईएनएस वागशीर (INS Vagsheer) आज मुंबई में लॉन्च कर दी गई. भारत की लेटेस्ट सबमरीन देश के दुश्मनों को खाक करने की हर काबिलियत रखती है. ये पानी का सीना चीरकर दुश्मन की जमीन को दहला सकती है.

Indian Navy Attack Submarine INS Vagsheer: मुंबई के मझगांव डॉक्स पर हुई लॉन्चिंग. (फोटोः समीर शानभाग/इंडिया टुडे ) Indian Navy Attack Submarine INS Vagsheer: मुंबई के मझगांव डॉक्स पर हुई लॉन्चिंग. (फोटोः समीर शानभाग/इंडिया टुडे )
aajtak.in
  • मुंबई,
  • 20 अप्रैल 2022,
  • अपडेटेड 2:04 PM IST
  • स्कॉरपीन क्लास की आखिरी सबमरीन
  • अभी एक साल चलेंगे समुद्री परीक्षण

समुद्री सरहदों को सुरक्षित रखने के लिए आज यानी 20 अप्रैल 2022 को स्कॉरपीन यानी कलवारी क्लास की सबमरीन आईएनएस वागशीर (INS Vagsheer) को लॉन्च किया गया. लॉन्चिंग प्रोजेक्ट-75 के तहत मुबंई के मझगांव डॉक्स से की गई. यह एक डीजल-इलेक्ट्रिक सबमरीन है. बेहद आधुनिक नेविगेशन और ट्रैकिंग सिस्टम्स से लैस है. इसके साथ ही इसमें कई तरह के हथियारों को भी शामिल किया गया है. 

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प्रोजेक्ट-75 के तहत अभी तक 5 आधुनिक पनडुब्बी भारत की रक्षा में तैनात हैं. अब इस प्रोजेक्ट की आखिरी पनडुब्बी आईएनएस वागशीर (INS Vagsheer) को लॉन्च कर दिया गया है. अब एक साल तक समुद्री परीक्षण होंगे. उसके बाद सबमरीन को भारतीय नौसेना में शामिल किया जाएगा. 

ये काम कर सकती है INS Vagsheer

आईएनएस वागशीर (INS Vagsheer) कई प्रकार के मिशनों को अंजाम दे सकती हैं. जैसे कि सतह-विरोधी युद्ध, पनडुब्बी रोधी युद्ध, खुफिया जानकारी एकत्र करना, समुद्री बारूदी सुरंग बिछाना, क्षेत्र की निगरानी आदि. पनडुब्बी को ऑपरेशन के समय हर परिस्थिति में संचालित करने के लिए डिजाइन किया गया है. इस सबमरीन को मझगांव डॉक्स शिप बिल्ड्रर्स ने बनाया है. यह पूरी तरह से 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' के तहत बनाई गई है. यह कलवारी क्लास पनडुब्बी है. इस क्लास की पनडुब्बियों की लंबाई लगभग 221 फीट, बीम 20 फीट और ऊंचाई 40 फीट होती है. 

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रेंज के हिसाब से तय होती है गति

इनमें 4 एमटीयू 12V 396 SE84 डीजल इंजन लगे होते हैं. इसके अलावा 360 बैटरी सेल्स होती हैं. पानी की सतह पर इनकी गति 20 किलोमीटर प्रतिघंटा होती है, जबकि पानी के अंदर ये 37 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से चलती हैं. इनकी रेंज इनकी गति के मुताबिक तय होती है. अगर यह सतह पर 15 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से चल रही है, तो यह 12 हजार किलोमीटर तक चल सकती है. पानी के अंदर यह 1020 किलोमीटर की रेंज तक जा सकती है लेकिन गति 7.4 किलोमीटर प्रतिघंटा होनी चाहिए. 

30 समुद्री सुरंगें बिछाने में उस्ताद

यह 50 दिनों तक पानी के अंदर बिता सकती है. अधिकतम 350 फीट की गहराई जा सकती है. इसमें 8 सैन्य अधिकारी और 35 सेलर तैनात किए जा सकते हैं. इनके अंदर एंटी-टॉरपीड काउंटरमेजर सिस्टम लगा है. इसके अलावा 533 मिमी के 6 टॉरपीडो ट्यूब्स होते हैं, जिनसे 18 एसयूटी टॉरपीडोस या एसएम.39 एक्सोसेट एंटी-शिप मिसाइल लॉन्च की जा सकती हैं. इसके अलावा यह पानी के अंदर 30 समुद्री बारूदी सुरंग बिछा सकती है. 

ये है कलवारी क्लास की पनडुब्बियां

आईएनएस वागशीर (INS Vagsheer) के शामिल होने के बाद कलवारी क्लास की छह अटैक सबमरीन हो जाएंगी. इस क्लास में आईएनएस कलवारी, आईएनएस खंडेरी, आईएनएस करंज, आईएनएस वेला और आईएनएस वागीर लॉन्च की जा चुकी हैं. 

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