
पाकिस्तान में भेड़िए विलुप्त होने के कगार पर पहुंच गए हैं. पिछले कुछेक दशकों में वहां भेड़ियों की आबादी में आश्चर्यजनक रूप से गिरावट आई है. एक्सपर्ट्स चेतावनी दे रहे हैं कि अगर भेड़ियों को बचाने के लिए तुरंत उपाय नहीं किए गए तो पाकिस्तान में भेड़िए पूरी तरह विलुप्त हो सकते हैं.
पाकिस्तान में मिलने वाले भारतीय और तिब्बती भेड़िओं की आबादी इतनी कम हो गई है कि पूरे पाकिस्तान में महज कुछ सौ भेड़िए ही बचे हैं.
पाकिस्तान में भेड़ियों की संख्या में बेतहाशा गिरावट की क्या है वजह?
पाकिस्तान में भेड़ियों की आबादी में कमी की सबसे बड़ी वजह इंसान हैं. वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर पाकिस्तान (WWF- Pakistan) के वरिष्ठ अधिकारी रब नवाज के अनुसार, इंसानों ने भेड़ियों के रहने की जगह को बर्बाद कर दिया है, उनकी हत्याएं की जा रही हैं और भेड़ियों के शिकार की आबादी भी घट रही है जो उनकी आबादी में कमी की प्रमुख वजहें हैं.
तुर्की की समाचार एजेंसी अनादोलु से बात करते हुए नवाज ने कहा, 'पाकिस्तान में वन्यजीवों की विविधता है, लेकिन भेड़ियों सहित इसकी कई प्रजातियां खतरे में हैं और स्थानीय स्तर पर इनके विलुप्त होने का खतरा है.'
उन्होंने कहा कि हाल के सालों में, इंसानी दबावों की वजह से पाकिस्तान में भेड़ियों की आबादी में तेजी से गिरावट शुरू हुई है.
उन्होंने कहा, 'विशेष रूप से भारतीय भेड़ियों को पाकिस्तान में लुप्तप्राय प्रजाति माना जाता है. इनकी जनसंख्या और वितरण को लेकर जानकारी कम है जिस कारण इनके संरक्षण की कोशिशें मुश्किल होती जा रही हैं.'
हालिया जेनेटिक्स स्टडीज से पता चला है कि भारतीय भेड़िए विकास के नजरिए से सबसे स्पेशल भेड़ियों की आबादी में से हैं जो केवल भारत और पाकिस्तान में ही पाए जाते हैं.
वन्यजीव विशेषज्ञ सईदुल इस्लाम कहते हैं कि भारतीय भेड़ियों की आबादी तिब्बती भेड़ियों की तुलना में कहीं अधिक तेजी से घट रही है, जिससे उनका अस्तित्व गंभीर खतरे में पड़ गया है.
पाकिस्तान में तिब्बती भेड़िया को चीनी भेड़िया, मंगोलियन भेड़िया, कोरियाई भेड़िया, स्टेपीज भेड़िया या वूली भेड़िया भी कहा जाता है और इनकी संख्या भारतीय भेड़ियों की अपेक्षा काफी स्थिर है. ऐसा इसलिए क्योंकि इनके प्राकृतिक आवास इंसानों से अभी बचे हुए हैं.
तिब्बती भेड़िया भूरे भेड़िए की ही एक प्रजाति है जो चीन, रूस, मंचूरिया, तिब्बत, भारत, नेपाल और भूटान के हिमालयी क्षेत्रों में पाया जाता है.
इस प्रजाति को इसकी कम जनसंख्या के कारण पहले से ही "संकटग्रस्त" बताया गया है और यह प्रकृति संरक्षण के लिए वैश्विक संस्था अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) की रेड लिस्ट में शामिल है.
भेड़ियों के संरक्षण की तत्काल जरूरत
पारिस्थितिकी विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय भेड़िए की संख्या में कमी के पीछे मुख्य कारण उनके प्राकृतिक आवास का नुकसान, बढ़ती इंसानी आबादी और किसानों का उनकी हत्या करना है. भारतीय भेड़िए पाकिस्तान के दक्षिणी सिंध प्रांत, दक्षिण-पश्चिमी बलूचिस्तान और उत्तर-पूर्वी पंजाब में पाए जाते हैं.
इस्लाम भारतीय भेड़ियों की आबादी में कमी पर कहते हैं, 'इंसानों और जंगली जीवों के बीच संघर्ष इनके लुप्त होने का सबसे बड़ा कारण है. इंसानों की आबादी बढ़ गई है और भेड़ियों के आवास को नष्ट कर दिया गया है जिससे ये स्थानीय स्तर पर विलुप्ति के कगार पर पहुंच गए हैं.'
वो कहते हैं कि जंगल काट दिए गए हैं और हर जगह इंसान की पहुंच हो गई है जिससे वन्य जीवों की आबादी पर खतरा बढ़ गया है.
आने वाले सालों में पाकिस्तान में खत्म हो जाएंगे भारतीय भेड़िए
भारतीय भेड़ियों के उलट तिब्बती भेड़िए गिलगित-बाल्टिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा और पाकिस्तान प्रशासित जम्मू-कश्मीर के पहाड़ों में मिलते हैं. यहां उनके आवास अपेक्षाकृत अपेक्षाकृत स्थिर हैं, शिकार की उपलब्धता है और वहां इंसानों से संपर्क काफी कम है. हालांकि, फिर भी तिब्बती भेड़ियों की आबादी भी घट रही है.
इस्लाम के अनुसार, पाकिस्तान में भारतीय भेड़ियों की संख्या संभवतः कुछ सौ से ज्यादा नहीं है, हालांकि, इसका कोई आधिकारिक आंकड़ा नहीं है.
वो चेतावनी देते हुए कहते हैं, 'अगर संरक्षण के लिए तत्काल गंभीर प्रयास नहीं किए गए तो आने वाले सालों में हम भारतीय भेड़ियों को हमेशा के लिए खो सकते हैं.'
पर्यावरण को संतुलित रखने में भेड़ियों की बड़ी भूमिका
पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित बनाए रखने में भेड़ियों की अहम भूमिका होती है. भेड़िए अच्छे शिकारी होते हैं जो शाकाहारी आबादी को नियंत्रित करके पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित रखने में मदद करते हैं. भेड़िए शिकार के बाद जो खाना छोड़ देते हैं, उन्हें खाकर बहुत से छोटे जानवर अपना पेट भरते हैं.
हरिपुर विश्वविद्यालय में वन्यजीव पारिस्थितिकी लैब के प्रमुख मोहम्मद कबीर पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित बनाए रखने में भेड़ियों की भूमिका पर बात करते हुए कहते हैं, 'भेड़िए पाकिस्तान में सबसे कम स्टडी किए गए मांसाहारी जानवरों में से हैं. रिसर्च और संरक्षण प्रोग्राम्स में उन्हें काफी हद तक नजरअंदाज किया गया है. लेकिन वो पर्यावरण के लिए बेहद जरूरी हैं. वो जहां रहते हैं, वहां के सबसे बड़े शिकारी होते हैं और अन्य प्रजातियों का शिकार कर उनकी आबादी को नियंत्रित रखने का काम करते हैं.'
वो कहते हैं कि अगर भेड़ियों नहीं होंगे तो अन्य जानवरों, शाकाहारियों की आबादी में भारी बढ़ोतरी होगी और पारिस्थितिकी संतुलन बिगड़ सकता है.
उन्होंने आगे कहा, 'भेड़िए बीमार, बूढ़े और कमजोर जानवरों को निशाना बनाकर बीमारी को फैलने से भी रोकते हैं. उनके बिना, शिकार की आबादी में बीमारी ज्यादा तेजी से फैल सकती है.'