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Ruang Volcano: इंडोनेशिया में भयानक ज्वालामुखी विस्फोट... डराने वाली Photos

इंडोनेशिया के नॉर्थ सुलावेसी प्रांत में मौजूद रुआंग ज्वालामुखी में विस्फोट हुआ. राख और धुआं 19 किलोमीटर ऊपर स्ट्रैटोस्फेयर तक पहुंच गया. सुनामी की आशंका पैदा हो गई. 800 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया. विस्फोट का ऐसा नजारा कई वर्षों के बाद देखने को मिला है.

ये है रुआंग ज्वालामुखी का विस्फोट, जिसमें राख स्ट्रैटोस्फेयर तक पहुंचता दिखाई दे रहा है. इसके आसपास कई बिजलियां कड़क रही हैं. (सभी फोटोः AFP) ये है रुआंग ज्वालामुखी का विस्फोट, जिसमें राख स्ट्रैटोस्फेयर तक पहुंचता दिखाई दे रहा है. इसके आसपास कई बिजलियां कड़क रही हैं. (सभी फोटोः AFP)
आजतक साइंस डेस्क
  • नई दिल्ली,
  • 18 अप्रैल 2024,
  • अपडेटेड 12:17 PM IST

इंडोनेशिया के रुआंग ज्वालामुखी के विस्फोट ने हैरान करने वाला नजारा दिखाया. ये ज्वालामुखी नॉर्थ सुलावेसी प्रांत में है. इसका धमाका इतना तेज था कि सुनामी अलर्ट जारी कर दिया गया. विस्फोट के बाद राख और धुआं स्ट्रैटोस्फेयर तक पहुंचा. यानी 19 किलोमीटर की ऊंचाई तक. 

यह ज्वालामुखी इससे पहले 1871 में इतनी तेज फटा था. तब भयानक सुनामी आई थी. अब वैज्ञानिकों को चिंता है कि इस विस्फोट के बाद यह ज्वालामुखी समंदर में न समा जाए. यानी यह भविष्य में अंडरसी वॉल्कैनो बन जाएगा. इसके विस्फोट के वीडियो और फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं.    

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तस्वीरें बेहद भयावह और खतरनाक स्थिति दिखा रही

वैज्ञानिकों को अंदेशा है कि इस ज्वालामुखी के विस्फोट की तीव्रता 4 या 5 से ऊपर की हो सकती है, यानी उच्चतम स्तर की. जैसा कि 2022 में हुंगा टोंगा ज्वालामुखी की थी. जिसकी वजह से पूरी धरती पर असर पड़ा था. पूरी पृथ्वी पर दो बार शॉकवेव दौड़ गई थी. 

रुआंग ज्वालामुखी से निकलने वाले केमिकल की जांच होगी. फिलहाल वैज्ञानिक इसके विस्फोट के रुकने का इंतजार कर रहे हैं. यह ज्वालामुखी लगातार विस्फोट करता जा रहा है. इस ज्वालामुखी में पहला विस्फोट 16 अप्रैल को हुआ था. बाद में 17 अप्रैल की देर रात भयानक विस्फोट हुआ, जिसकी तस्वीरें बेहद भयावह हैं. 

पहला धमाके से आसमान में दो किलोमीटर ऊंची राख की दीवार बनी. इसके बाद दूसरे विस्फोट से यह बढ़कर ढाई किलोमीटर हो गई. बाद में यह वायुमंडल के निचले लेयर तक पहुंच गई. यह ज्वालामुखी समंदर से 725 मीटर ऊंचा है. इसके विस्फोट की वजह से ज्वालामुखी के आसपास के 100 किलोमीटर का दायरा खाली करा लिया गया है. 

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सबसे ज्यादा एक्टिव ज्वालामुखी इंडोनेशिया में... 

दुनिया में सबसे ज्यादा सक्रिय यानी एक्टिव ज्वालामुखी इंडोनेशिया में हैं. यहां पर कुल मिलाकर 121 ज्वालामुखी हैं. जिसमें से 74 साल 1800 से एक्टिव हैं. इनमें से 58 ज्वालामुखी साल 1950 से सक्रिय हैं. यानी इनमें कभी भी विस्फोट हो सकता है. सात ज्वालामुखियों में तो 12 अगस्त 2022 के बाद से लगातार विस्फोट हो ही रहा है. ये हैं- क्राकटाउ, मेरापी, लेवोटोलोक, कारांगेटांग, सेमेरू, इबू और डुकोनो. 

इसके ज्यादा सक्रिय वॉल्कैनो यहां क्यों हैं? 

अब सवाल ये उठता है कि आखिर यहीं पर इतने सक्रिय ज्वालामुखी क्यों हैं? इसकी तीन बड़ी वजहें हैं. पहला ये कि इंडोनेशिया जिस जगह हैं, वहां पर यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेट दक्षिण की ओर खिसक रही हैं. इंडियन-ऑस्ट्रेलियन टेक्टोनिक प्लेट उत्तर की ओर खिसक रही है. फिलिपीन्स प्लेट पश्चिम की तरफ जा रही है. अब इन तीनों प्लेटों में टकराव या खिसकाव की वजह से ज्वालामुखियों में विस्फोट होता रहता है. 

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इंडोनेशिया को कहते हैं फटते हुए ज्वालामुखियों का देश

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असल में इंडोनेशिया को फटते हुए ज्वालामुखियों का देश भी कहा जाता है. यह देश पैसिफिक रिंग ऑफ फायर के ऊपर बसा है. इस इलाके में सबसे ज्यादा भौगोलिक और भूगर्भीय गतिविधियां होती हैं. जिसकी वजह से भूकंप, सुनामी, लावा के गुंबदों का बनना आदि होता रहता है. इसकी वजह से कई बार जान-माल का भारी नुकसान भी होता है. इंडोनेशिया का सबसे ज्यादा सक्रिय ज्वालामुखी केलूट और माउंट मेरापी हैं. ये दोनों जावा प्रांत में हैं. 

इंडोनेशिया में ज्वालामुखी फटा, यूरोप में गर्मी नहीं आई

इंडोनेशिया के ज्यादातर ज्वालामुखी 3000 किलोमीटर लंबी एक भौगोलिक चेन पर स्थित हैं. जिसे सुंडा आर्क कहते हैं. यहां पर हिंद महासागर का सबडक्शन जोन हैं. यहां ज्यादातर ज्वालामुखी एशियन प्लेट की वजह से पैदा हुए हैं. इंडोनेशिया में सबसे भयानक ज्वालामुखी विस्फोट 1815 में हुआ था. तब माउंट तंबोरा फट पड़ा था. इसकी वजह से कई सालों तक यूरोप में गर्मी तक का मौसम नहीं आया था. क्योंकि ज्वालामुखी से निकली राख से वायुमंडल ढक गया था. 90 हजार लोग मारे गए थे. 10 हजार सीधे विस्फोट की चपेट में आने से. बाकी 80 हजार लोग फसल खत्म होने और भुखमरी से. 

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