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तुर्की का एक परिवार चलता है चार पैरों पर, क्या रिवर्स इवॉल्यूशन की तरफ बढ़ रहे हम? पेंगुइन है बड़ा उदाहरण

लंबा-चौड़ा सफर करके हम दो पैरों पर चलने और तेजी से सोच सकने वाली प्रजाति बने, लेकिन क्या हो अगर ये इवॉल्यूशन रिवर्स चल पड़े. यानी हम वापस गुफाओं में रहते हुए कच्चा मांस खाएं, या फिर दो की बजाए चार पैरों पर चलने लगें. विकास उल्टी दिशा में लौट सकता है. तुर्की के एक परिवार की हालत ने वैज्ञानिकों के बीच नई बहस शुरू कर दी है.

इवॉल्यूशन के बाद दुनिया में बहुत सी स्पीशीज गायब हुईं तो कई नई प्रजातियां बनी भी. सांकेतिक फोटो (Getty Images) इवॉल्यूशन के बाद दुनिया में बहुत सी स्पीशीज गायब हुईं तो कई नई प्रजातियां बनी भी. सांकेतिक फोटो (Getty Images)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 03 मार्च 2023,
  • अपडेटेड 2:18 PM IST

तुर्की के दक्षिणी हिस्से में एक परिवार में जन्मे कई बच्चे हाथ-पैर दोनों की मदद से चलते हैं. साल 2006 में बनी एक डॉक्युमेंट्री द फैमिली दैट वॉक्स ऑन ऑल फोर्स के रिलीज से ये परिवार चर्चा में आ गया. इसके बाद से परिवार पर बहुतेरे शोध हुए. सबमें यही निकलकर आया कि बाकी सारे मामलों में चार पैरों पर चलते लोग सामान्य एडल्ट इंसान की तरह ही हैं. वे नॉर्मल ढंग से सोचते-बोलते और खाते हैं, सिर्फ चलने के लिए वे इस तरीके को पसंद करते हैं. 

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इनमें से कई लोग मानसिक तौर पर दिव्यांग हैं और शरीर को ठीक से बैलेंस नहीं कर पाते. लिहाजा इसे दिव्यांगता से ही जोड़ा गया. हालांकि बीच-बीच में कई साइंटिस्ट रिवर्स इवॉल्यूशन पर भी बात कर रहे हैं. यानी विकास का उल्टी दिशा में चल पड़ना जिसमें इंसानों समेत कोई भी पशु-पक्षी एडवांस से कमजोर होता चला जाएगा. कॉम्प्लैक्सिटी खत्म होते-होते शरीर में उतने ही अंग रह जाएंगे, जितने से काम चल जाए. 

क्या है क्रमिक विकास और कैसे काम करता रहा

इवॉल्यूशन बायोलॉजी की थ्योरी है जो ये बताती है कि कैसे किसी जीव-जंतु का पीढ़ी-दर-पीढ़ी विकास होता चला गया. इनमें से कई स्पीशीज कमजोर होने के चलते गायब हो गईं. सिर्फ वही बाकी रहे, जो फिट थे. होमोसेपियंस यानी हम इंसान भी इसी श्रेणी में हैं. हमारा भी क्रमिक विकास हुआ. पूंछ गायब हुई. भाषा विकसित हुई. दो पैरों पर चलना सीखा. कान छोटे और ब्रेन ज्यादा तेज होता गया. 

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पेंगुइन के बारे में बहुत से एक्सपर्ट मानते हैें कि उनके पूर्वज उड़ने, चलने और तैरने वाले रहे होंगे. (Pixabay)

पेंगुइन के पूर्वज उड़ा करते थे

वैज्ञानिक इसी विकास के क्रमशः खत्म होने की थ्योरी पर बात कर रहे हैं. ऐसा हो भी चुका है. पेंगुइन के पूर्वज उड़ने की भी क्षमता रखते थे, और तैराक भी थे. लगभग 60 मिलियन साल पहले के फॉलिस की जांच से ये साफ हो गया कि समय के साथ पेंगुइन की उड़ने की ताकत खत्म हो गई. अब भी इनके पास विंग बोन्स तो हैं, लेकिन ये पानी में लंबी उछालें ही मार सकती हैं. 

क्या सांप के पैर भी हुए गायब

पहले सांप के पैर हुआ करते थे, इसके बहुतेरे प्रमाण मिल चुके. साल 2015 में साइंस एडवांसेज जर्नल में छपे एक आर्टिकल में वैज्ञानिक दावा करते हैं कि सांप के ही पूर्वज पहले पैरों पर चला करते थे. बाद में पैर घटते हुए छोटे होते गए और फिर गायब हो गए ताकि वो जमीन पर तेजी से सरक सके. सांप की चाल अब दो या चार पैरों पर चलने वालों से काफी तेज होती है. 

पक्षियों को डायनासोर से इवॉल्व हुआ माना जाता है. सांकेतिक फोटो (Pixabay)

डायनासोर के ये वंशज अब भी बाकी

पक्षियों के बारे में कहा जाता है कि वे डायनासोर से इवॉल्व हुए. वैज्ञानिक इसपर वैसे दो खेमों में बंटे हुए हैं. कोई कहता है कि पक्षियों के पूर्वजों के बारे में कोई जानकारी नहीं, जबकि ज्यादातर साइंटिस्ट इन्हें डायनासोर के वंशज मानते हैं जिनके दांत और हिंसक नेचर खत्म हो गए. समय के साथ इनका वजन कम हुआ, पंख और चोंच तैयार हो गई. वैसे इस थ्योरी में भी बड़ा विवाद है. डायनासोर चूंकि उल्कापिंड के टकराने से रातोंरात खत्म हो गए तो क्या उनका इवॉल्यूशन पहले ही होने लगा था! जो भी हो, फिलहाल बर्ड्स को वैज्ञानिक रिवर्स डिवॉल्यूशन की श्रेणी में रखते हैं.

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अब भी हो रहा बदलाव

रिग्रेसिव इवॉल्यूशन के कई दूसरे उदाहरण लगातार दिख रहे हैं. जैसे समुद्र की गहराई में रहती मछलियों की देखने की क्षमता कम होती जा रही है. इससे पता लगता है कि चीजें उल्टी दिशा में जा सकती हैं लेकिन ये तभी होगा, जब हमें किसी खास अंग की जरूरत न रह जाए. जैसे अगर मस्तिष्क का इस्तेमाल न हो तो उसकी जरूरत खत्म होने लगेगी. ऐसे में ये नहीं होगा कि सिर से ब्रेन नाम का स्ट्रक्चर एकदम से गायब हो जाएगा बल्कि धीरे-धीरे उसकी जटिल संरचना आसान बनने लगेगी. पीढ़ी-दर-पीढ़ी बच्चे कमजोर पड़ने लगेंगे और फिर ब्रेन उतना ही बचेगा, जितने से काम चल जाए.

देखा जाए तो ये भी एक तरह का इवॉल्यूशन ही है, यानी जरूरत के मुताबिक विकास होना. तो कुल मिलाकर, इससे इनकार नहीं किया जा सकता कि आगे चलकर शायद इंसानों में भी कई बदलाव देखने में आएं. 

 

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