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गाजा को घेरे इजरायली टैंकों पर Cope Cage... जानिए क्या है हमास के आत्मघाती ड्रोन से बचने का ये देसी जुगाड़

Gaza पट्टी पर Israeli टैंक तैनात हैं. लेकिन इन टैंकों के ऊपर एक जालीदारी छतरी लगी हुई दिख रही है. ऐसी ही छतरियां Russia-Ukraine War के समय भी टैंकों के ऊपर देखने को मिली थीं. इन्हें असल में एंटी-ड्रोन केज या एंटी-ड्रोन ग्रिल कहते हैं. आइए जानते हैं कि इससे टैंक या जवानों को क्या फायदा होता है?

इजरायली मेरकावा टैंकों के ऊपर इस तरह की छतरी लगाई गई है. जो इसे ड्रोन के हमलों से बचाएगी. इजरायली मेरकावा टैंकों के ऊपर इस तरह की छतरी लगाई गई है. जो इसे ड्रोन के हमलों से बचाएगी.
ऋचीक मिश्रा
  • नई दिल्ली,
  • 19 अक्टूबर 2023,
  • अपडेटेड 1:44 PM IST

Russia-Ukraine War के समय रूसी टैंकों पर लोहे या धातु की एक जालीदार छतरी देखने को मिलती थी. अब ऐसी छतरियां Israeli Tanks पर लगी दिख रही हैं. ये टैंक्स Gaza Strip के बाहर खड़े हैं. ये हैं इजरायल के मेरकावा टैंक्स (Merkava Tanks). इन छतरियों को एंटी-ड्रोन केज (Anti-Drone Cages) या एंटी-ड्रोन ग्रिल (Anti-Drone Grill) कहते हैं. ये टैंक के ऊपर सवाल मशीन गन चलाने वाले जवान को आत्मघाती ड्रोन हमलों से बचाता है. 

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इस पर अगर छोटे-मोटे आत्मघाती ड्रोन से हमला करें तो ये केज या ग्रिल संभाल लेते हैं. जवान इसमें जख्मी हो सकते हैं लेकिन मरते नहीं. हालांकि ज्यादा ताकतवर ड्रोन, बम या एंटी-टैंक मिसाइल या रॉकेट से यह बचा नहीं सकता. इससे पहले ऐसे केज या ग्रिल रूस और यूक्रेन युद्ध के समय रूसी टैंकों पर देखने को मिले थे. 

कुछ लोग इन्हें कोप केज (Cope Cages) भी कहते हैं. ये छोटो-मोटो ड्रोन्स और क्वॉडकॉप्टर्स से बचाता है. खासतौर से ग्रैनेड फेंकने वाले ड्रोन्स और आत्मघाती ड्रोन्स. ड्रोन्स की वजह से अब जंग का चेहरा बदल गया है. बड़े ड्रोन्स जैसे अमेरिकन रीपर या तुर्की का बेरक्तार तो बड़े हमलों के लिए इस्तेमाल होते हैं. लेकिन टैंकों और जवानों पर हमले के लिए सस्ते ड्रोन्स और क्वॉडकॉप्टर्स का इस्तेमाल होता है. 

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इस्लामिक स्टेट के हमलों से बचने के लिए आया तरीका

इस मामले में इस्लामिक स्टेट (ISIS) काफी आगे निकल गया था. वह सस्ते ड्रोन्स लेकर उन्हें हवाई हथियार में बदल देता था. इसके बाद यही टैक्टिक यूक्रेन में इस्तेमाल हुआ. तब रूसी टैंक्स के ऊपर एंटी-ड्रोन केज लगाए गए. अब यह तरीका इजरायल-हमास युद्ध में इस्तेमाल हो रहा है. हमास अपने देसी और सस्ते ड्रोन्स के जरिए इजरायल के टैंक्स और जवानों पर हमला कर सकता है. इसलिए इजरायली टैंक्स पर ये कवच लगाए जा रहे हैं. 

शुरूआत आर्मेनिया-अजरबैजान जंग से हुई थी

Cope Cages शब्द तब प्रचलन में आए जब इन्हें रूसी टैंक्स के ऊपर लगा हुआ देखा गया. यूक्रेन में घुसपैठ के समय रूस ने इस तकनीक का इस्तेमाल किया था. हालांकि इसका पहला इस्तेमाल 2020 में नोगर्नो-काराबख युद्ध के दौरान किया गया था. यह जंग आर्मेनिया और अजरबैजान के बीच चल रही थी. बाद में इसके और नाम भी पड़ गए. जैसे- एंटी-यूएवी, रूफ स्क्रीन्स. अब इजरायल ने अपने टैंकों पर इसे लगाना शुरू कर दिया है. 

अगर कोप केज न हो तो क्या होगा? 

कोप केज न होने पर टैंक या बख्तरबंद के ऊपर मशीन गन लेकर खड़े सैनिक की मौत हो सकती है. इसके लगने से स्नाइपर को दिक्कत होगी. साथ ही ड्रोन से गिराए जाने वाले बम या आत्मघाती ड्रोन का हमला सीधे टैंक या सैनिक को नुकसान नहीं पहुंचाएगा. हालांकि इजरायली मेरकावा टैंक्स में ट्रॉफी सिस्टम लगा है, जो आते हुए दुश्मन के रॉकेट, मिसाइल हमलों के पूर्व चेतावनी दे देता है. इसके अलावा छोटे हथियार दाग कर रॉकेट और मिसाइलों को टैंक से टकराने से पहले ही फोड़ डालता है.  

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मेरकावा टैंक्स में एक्सप्लोसिव रिएक्टिव आर्मर नहीं है. ट्रॉफी से रॉकेट, मिसाइल, RPG से बचा जा सकता है. लेकिन ड्रोन्स के लिए कोई तकनीक नहीं है. इसलिए कोप केज की जरूरत है. कई बार फाल्स डिटेक्शन होने पर भी ट्रॉफी अपने हथियार दाग ककर वेस्ट कर देता है. इसलिए इन केज की जरूरत है.  

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