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अगस्त में Space Station जाएगा भारतीय एस्ट्रोनॉट! केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह का खुलासा

भारत का एक एस्ट्रोनॉट बहुत जल्द नासा में ट्रेनिंग के लिए जाएगा. ताकि वह स्पेस स्टेश की यात्रा कर सके. यह खुलासा केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में दिया है. इसके लिए चार में से किसी एक गगनयात्री को चुना जाएगा. यानी गगनयान मिशन के चारों एस्ट्रोनॉट्स में किसी एक को.

ये हैं वो चार भारतीय एस्ट्रोनॉट, जिनमें से किसी एक को अगस्त 2024 या उसके बाद किसी भी समय इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन भेजा जाएगा. ये हैं वो चार भारतीय एस्ट्रोनॉट, जिनमें से किसी एक को अगस्त 2024 या उसके बाद किसी भी समय इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन भेजा जाएगा.
आजतक साइंस डेस्क
  • नई दिल्ली,
  • 25 जुलाई 2024,
  • अपडेटेड 4:01 PM IST

Gaganyaan के लिए ट्रेनिंग कर रहे चार भारतीय वायुसेना के एस्ट्रोनॉट्स में से किसी एक को बहुत जल्द नासा भेजा जाएगा. ताकि वह स्पेस स्टेशन जाने की ट्रेनिंग ले सके. यह बात लोकसभा में केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताई. मंत्री ने बताया कि ISRO लगातार नासा के साथ मिलकर एक संयुक्त अभियान की तैयारी में है. 

इसरो इस बात पर नजर रख रहा है कि कैसे एक गगनयात्री को इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) भेजा जाए. यह नासा और इसरो का संयुक्त अभियान होगा. डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि गगनयान के लिए ट्रेन्ड किए जा रहे चारों गगनयात्रियों में से कोई एक नासा में ट्रेनिंग लेगा. फिर स्पेस स्टेशन जाएगा. 

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स्पेस स्टेशन भेजने के लिए नासा ने निजी कंपनी AXIOM Space को चुना है. इसी के यान में बैठकर भारतीय एस्ट्रोनॉट स्पेस स्टेशन पहुंचेगा. इसरो ने इसके लिए नासा की मौजूदगी में एक्सिओम स्पेस के साथ डील की है. यह एक्सिओम-4 मिशन होगा. यह इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन के लिए एक निजी मिशन होगा. 

अगस्त में भेजा जाएगा अंतरिक्ष स्टेशन पर भारतीय एस्ट्रोनॉट

संभवतः इस मिशन की लॉन्चिंग अगस्त 2024 या उसके बाद फ्लोरिडा के केनेडी स्पेस सेंटर से होगी. फिलहाल गगनयान के चार एस्ट्रोनॉट्स की ट्रेनिंग इसरो एस्ट्रोनॉट्स ट्रेनिंग फैसिलिटी (ATF) में हो रही है. इससे पहले ये एस्ट्रोनॉट्स रूस में अपनी बेसिक ट्रेनिंग पूरी कर चुके हैं. एस्ट्रोनॉट ट्रेनिंग के तीन सेमेस्टर में से दो सेमेस्टर पूरे हो चुके हैं. 

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जानिए कौन हैं वो एस्ट्रोनॉट्स, जिनमें से एक जाएगा ISS पर  

ग्रुप कैप्टन प्रशांत बालकृष्णनन नायर 

26 अगस्त 1976 में केरल के थिरुवाझियाद में जन्मे. एनडीए में ट्रेनिंग पूरी की. एयरफोर्स एकेडमी से स्वॉर्ड ऑफ ऑनर हासिल कर चुके हैं. 19 दिसंबर 1998 में उन्हें वायुसेना के फाइटर जेट प्रोग्राम में शामिल किया गया. फाइटर पायलट बनाए गए. वो CAT-A क्लास के फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर और टेस्ट पायलट हैं. करीब 3000 घंटे उड़ान अनुभव है. 

प्रशांत नायर ने Su-30MKI, MiG-21, MiG-29, हॉक, डॉर्नियर, एएन-32 आदि विमान उड़ाए हैं. वो यूनाइटेड स्टेट्स स्टाफ कॉलेज, DSSC, वेलिंग्टन और तंबरम के FIS के पूर्व छात्र भी रह चुके हैं. वो सुखोई-30 स्क्वॉड्रन के कमांडेंट भी रहे हैं. 

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ग्रुप कैप्टन अजित कृष्णन 

19 अप्रैल 1982 को तमिलनाडु के चेन्नई में जन्मे अजित ने एनडीए से सेना की ट्रेनिंग पूरी की है. राष्ट्रपति से गोल्ड मेडल और वायुसेना एकेडमी से स्वॉर्ड ऑफ ऑनर हासिल कर चुके हैं. 21 जून 2003 में उन्हें भारतीय वायुसेना के फाइटर स्ट्रीम में शामिल किया गया. उनके पास फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर और टेस्ट पायलट का 2900 घंटे का अनुभव है. अजित ने Su-30MKI, MiG-21, Mig-21 Bison, Mig-19, जुगआर, डॉर्नियर, एन-32 जैसे विमान उड़ाए हैं. वो वेलिंग्टन स्थित DSSC के पूर्व छात्र रहे हैं. 

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ग्रुप कैप्टन अंगद प्रताप  

17 जुलाई 1982 में उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में जन्मे अंगद प्रताप की मिलिट्री ट्रेनिंग एनडीए में हुई है. 18 दिसंबर 2004 में उन्हें वायुसेना के फाइटर स्ट्रीम में शामिल किया गया. उनके पास फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर और टेस्ट पायलट का करीब 2000 घंटे का अनुभव है. अंगद ने सुखोई-30एमकेआई, मिग-21, मिग-29, जगुआर, हॉक, डॉर्नियर और एन-32 जैसे विमान और फाइटर जेट्स उड़ाए हैं. 

विंग कमांडर शुभांशु शुक्ला 

10 अक्टूबर 1085 में लखनऊ में जन्मे शुभांशु की मिलिट्री ट्रेनिंग एनडीए में हुई है. वायुसेना के फाइटर स्ट्रीम में उन्हें 17 जून 2006 में शामिल किया गया. वो एक फाइटर कॉम्बैट लीडर हैं. साथ ही टेस्ट पायलट भी. उनके पास 2000 घंटे के उड़ान का अनुभव है. उन्होंने सुखोई-30एमकेआई, मिग-21, मिग-29, जगुआर, हॉक, डॉर्नियर, एन-32 जैसे विमान और फाइटर जेट्स उड़ाए हैं. 

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