
23 अगस्त 2024 को भारत राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस (National Space Day) मना रहा है. ये वही तारीख है जब पिछले साल ISRO का चंद्रयान-3 चांद के दक्षिणी ध्रुव के पास उतरा था. पूरे देश में नेशनल स्पेस डे की तैयारियां चल रही हैं. इसरो प्रमुख डॉ. एस. सोमनाथ ने देश भर के लोगों से इस सेलिब्रेशन में भाग लेने की अपील की है.
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यहां देखिए भारतीय एयरफोर्स से चुने गए चार एस्ट्रोनॉट्स की ट्रेनिंग का Video..
पहले जानते हैं चंद्रयान-3 के लैंडिंग की पूरी कहानी...
23 अगस्त 2023 की शाम पांच बजकर 20 मिनट पर ISRO ने चंद्रयान-3 की लैंडिंग का लाइव स्ट्रीमिंग शुरू हुई थी. यूट्यूब, फेसबुक और इसरो की साइट पर. लाखों-करोड़ों लोग उसे देख रहे थे. जब इसरो वैज्ञानिकों ने सूचना दी कि अब लैंडिंग शुरु होने वाली है. लोग आतुरता से इसरो की स्ट्रीमिंग से नजरें भी नहीं हटा रहे थे.
जिन चार्ट्स और ग्राफ्स को सिर्फ साइंटिस्ट समझते हैं, उन्हें देखकर लोग समझने की कोशिश कर रहे थे. हम आपको एक आसान से चार्ट से समझाते हैं कि इस लैंडिंग की खास बात क्या थी. लैंडिंग की जगह से चंद्रयान-3 ऊंचाई में 30 किलोमीटर और सतह से 745.6 किलोमीटर दूर था. यहां से शुरू होती है लैंडिंग. लैंडिंग को चार हिस्सों में बांटा गया था.
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रफ ब्रेकिंग फेज: 30 km की ऊंचाई से 7.4 km की दूरी तक चंद्रयान-3 के लैंडर को आना था. इसमें उसे 690 सेकेंड लगे. यानी 11.5 मिनट. इस दौरान चंद्रयान ने 713 km की यात्रा की. यात्रा की शुरुआत 1.68 km/sec की गति से हुई थी. जिसे घटाकर 358 मीटर/ सेकेंड किया गया. हॉरीजोंटल गति 0.61 मीटर प्रति सेकेंड थी.
एल्टीट्यूड होल्ड फेज : यानी 32 से 28.52 km की दूरी तय की गई. ऊंचाई थी 6.8 km. समय लगा मात्र 10 सेकेंड. नीचे आने की गति 336 मीटर/ सेकेंड थी. हॉरीजोंटल गति .59 मीटर प्रति सेकेंड थी.
फाइन ब्रेकिंग फेज: 28.52 km से 0 km तक की दूरी तय की. यानी लैंडर अब लैंडिंग वाली जगह के ठीक ऊपर था. ऊंचाई थी 0.8 से 1.3 km. क्योंकि उसे उतरने की सही जगह देखते हुए नीचे आना था. यानी वह हेलिकॉप्टर की तरह उड़ रहा था. उसके चारों पैर नीचे की तरफ थे. इस स्थिति में वह 2 मीटर प्रति सेकेंड की गति से 150 मीटर की ऊंचाई तक आया. ये पूरा प्रोसेस करने में इसे 175 सेकेंड लगे यानी करीब तीन मिनट.
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टर्मिनल डिसेंट फेज: ये शुरू होती है 150 मीटर की ऊंचाई से सीधे नीचे सतह की ओर. इस दौरान चंद्रयान-3 का लैंडर हॉरीजोंटली 0.5 मीटर प्रति सेकेंड और 2 मीटर प्रति सेकेंड की गति से वर्टिकली नीचे आ रहा था.
150 मीटर से 60 मीटर तक आने में उसे 73 सेकेंड लगे. जिसमें 52 सेकेंड रीटारगेटिंग थे. यानी सुरक्षित जगह खोजने में लगे. इसके बाद 60 मीटर से 10 मीटर की दूरी उसने 38 सेकेंड में पूरी की. आखिरी 9 सेकेंड में उसने 10 मीटर से सतह तक की दूरी तय की.
इतनी गणित और सटीकता के बाद विक्रम लैंडर ने अपने पांव चांद की जमीन पर रखे. तब जाकर यह मिशन सफल हुआ. इतना ही नहीं लैंडिंग के करीब तीन में जब लैंडिंग की वजह से उठी चांद की धूल जमीन पर बैठ गई, तब प्रज्ञान रोवर बाहर निकला.
अब जानिए हमारे एस्ट्रोनॉट्स के बारे में...
ये भारतीय वायुसेना के टेस्ट पायलट हैं. इन चारों ने वायुसेना के लगभग सभी फाइटर जेट्स उड़ाए हैं. आइए जानते हैं कि ये चारों कौन हैं? कहां के रहने वाले हैं? क्या पढ़ाई लिखाई की है?
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ग्रुप कैप्टन प्रशांत बालकृष्णनन नायर
26 अगस्त 1976 में केरल के थिरुवाझियाद में जन्मे. एनडीए में ट्रेनिंग पूरी की. एयरफोर्स एकेडमी से स्वॉर्ड ऑफ ऑनर हासिल कर चुके हैं. 19 दिसंबर 1998 में उन्हें वायुसेना के फाइटर जेट प्रोग्राम में शामिल किया गया. फाइटर पायलट बनाए गए. वो CAT-A क्लास के फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर और टेस्ट पायलट हैं. करीब 3000 घंटे उड़ान अनुभव है.
प्रशांत नायर ने Su-30MKI, MiG-21, MiG-29, हॉक, डॉर्नियर, एएन-32 आदि विमान उड़ाए हैं. वो यूनाइटेड स्टेट्स स्टाफ कॉलेज, DSSC, वेलिंग्टन और तंबरम के FIS के पूर्व छात्र भी रह चुके हैं. वो सुखोई-30 स्क्वॉड्रन के कमांडेंट भी रहे हैं.
ग्रुप कैप्टन अजित कृष्णन
19 अप्रैल 1982 को तमिलनाडु के चेन्नई में जन्मे अजित ने एनडीए से सेना की ट्रेनिंग पूरी की है. राष्ट्रपति से गोल्ड मेडल और वायुसेना एकेडमी से स्वॉर्ड ऑफ ऑनर हासिल कर चुके हैं. 21 जून 2003 में उन्हें भारतीय वायुसेना के फाइटर स्ट्रीम में शामिल किया गया. उनके पास फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर और टेस्ट पायलट का 2900 घंटे का अनुभव है. अजित ने Su-30MKI, MiG-21, Mig-21 Bison, Mig-19, जुगआर, डॉर्नियर, एन-32 जैसे विमान उड़ाए हैं. वो वेलिंग्टन स्थित DSSC के पूर्व छात्र रहे हैं.
ग्रुप कैप्टन अंगद प्रताप
17 जुलाई 1982 में उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में जन्मे अंगद प्रताप की मिलिट्री ट्रेनिंग एनडीए में हुई है. 18 दिसंबर 2004 में उन्हें वायुसेना के फाइटर स्ट्रीम में शामिल किया गया. उनके पास फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर और टेस्ट पायलट का करीब 2000 घंटे का अनुभव है. अंगद ने सुखोई-30एमकेआई, मिग-21, मिग-29, जगुआर, हॉक, डॉर्नियर और एन-32 जैसे विमान और फाइटर जेट्स उड़ाए हैं.
ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला
10 अक्टूबर 1085 में लखनऊ में जन्मे शुभांशु की मिलिट्री ट्रेनिंग एनडीए में हुई है. वायुसेना के फाइटर स्ट्रीम में उन्हें 17 जून 2006 में शामिल किया गया. वो एक फाइटर कॉम्बैट लीडर हैं. साथ ही टेस्ट पायलट भी. उनके पास 2000 घंटे के उड़ान का अनुभव है. उन्होंने सुखोई-30एमकेआई, मिग-21, मिग-29, जगुआर, हॉक, डॉर्नियर, एन-32 जैसे विमान और फाइटर जेट्स उड़ाए हैं.