
सौर मंडल के सबसे बड़े ग्रह बृहस्पति (Jupiter) वैसे ही सौर मंडल का राजा है. अब उसके ताज में एक और हीरा जुड़ गया है. बृहस्पति अब सौर मंडल का सबसे ज्यादा चांद वाला प्लैनेट बन गया है. बृहस्पति ग्रह के चारों तरफ 12 नए चांद खोजे गए थे, अब उनकी पुष्टि हो चुकी है. पहले बृहस्पति के पास 80 और शनि ग्रह (Saturn) के पास 83 चांद थे. लेकिन बारह नए चंद्रमाओं की पुष्टि के बाद बृहस्पति ग्रह के पास अब 92 चंद्रमा हो गए हैं.
स्काई एंड टेलिस्कोप के मुताबिक नए चंद्रमा छोटे आकार के हैं. इनका व्यास 1 से 3.2 किलोमीटर है. 12 में से 9 चंद्रमा तो बृहस्पति ग्रह के चारों तरफ एक चक्कर लगाने में 550 दिन लगाते हैं. बृहस्पति ग्रह के सबसे दूर जो चांद हैं, वो बृहस्पति ग्रह के घुमाव की दिशा से उलटा घूमते हैं. उलटी दिशा में घूमने वाले चंद्रमाओं को रेट्रोग्रेड ऑर्बिट वाले चांद कहते हैं. यानी ये चांद पहले एस्टेरॉयड थे, जो अब बृहस्पति ग्रह की गुरुत्वाकर्षण शक्ति के चलते उसकी कक्षा में आकर घूम रहे हैं.
इन 12 चंद्रमाओं की खोज साल 2021 से 2022 के बीच वॉशिंगटन स्थित कार्नेगी इंस्टीट्यूशन फॉर साइंस के एस्ट्रोनॉमर स्कॉट शेफर्ड ने की थी. उसके बाद उन्होंने अपनी खोज के बारे में इंटरनेशनल एस्ट्रोनॉमिकल यूनियन माइनर प्लैनेट सेंटर को बताई. यह संस्था सौर मंडल के छोटे पत्थरों, ग्रहों आदि की निगरानी करता है. चंद्रमाओं को आधिकारिक रूप से मान्यता देने से पहले उनकी कक्षा की जांच की जाती है. यानी उनकी पूरी यात्रा. तब जाकर पुष्टि होती है.
इससे पहले बृहस्पति को चार बड़े गैलीलियन चंद्रमाओं के प्राकृतिक ग्रह के नाम से जाना जाता था. इन चंद्रमाओं की खोज 1610 में गैलीलियो गैलीलेई ने की थी. इसमें Io है, जिसमें लावा की झीले हैं. खूब ज्वालामुखी फटते हैं. यूरोपा है जो पूरी तरह से बर्फ से ढंका है. अंदर समुद्र है. गैनीमेडे सौर मंडल का सबसे बड़ा चांद है. यह बुध ग्रह से भी बड़ा है. चौथा है कैलिस्टो (Callisto). यह सौर मंडल का सबसे ज्यादा गड्ढे वाला यानी क्रेटर वाला चंद्रमा है.
इस साल यूरोपियन स्पेस एजेंसी अपना JUICE यानी ज्यूपिटर आइसी मून एक्सप्लोरर लॉन्च करे जा रहा है. ताकि बृहस्पति औऱ बाकी चारों की स्टडी की जा सके. इसके बाद अगले साल NASA अपना यूरोपा क्लिपर मिशन भेज रहा है. ताकि वह यूरोपा चांद की नजदीक से स्टडी कर सके.