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हर इंसान के शरीर पर होती हैं ऐसी धारियां, जानिए क्या है ये

हम सभी ने जेब्रा (Zebra) देखा है. उसके शरीर पर काले और सफेद रंग की धारियों से ही उसे पहचाना जाता है. लेकिन अगर आपसे कहा जाए कि इंसानों के शरीर पर भी धारियां होती हैं, तो क्या आप मानेंगे? नहीं न...लेकिन आपको भरोसा करना होगा क्योंकि ये सच है. जानिए इंसानों में कहां होती हैं ये धारियां. 

इंसानों के पूरे शरीर पर इस तरह की अदृश्य धारियां होती हैं (Photo:Bygum et al, BMC Medical Genetics 2011) इंसानों के पूरे शरीर पर इस तरह की अदृश्य धारियां होती हैं (Photo:Bygum et al, BMC Medical Genetics 2011)
aajtak.in
  • वॉशिंगटन,
  • 10 अप्रैल 2023,
  • अपडेटेड 7:51 PM IST

इंसान की त्वचा एकदम साफ दिखती है. हां, रंग हलका या गहरा हो सकता है. लेकिन इंसान की त्वचा पर भी धारियां होती हैं, बल्कि त्वचा इन धारियों से भरी होती है. इन धारियों को ब्लाश्को (Blaschko) या ब्लाश्को लाइंस (Blaschko lines) कहा जाता है. ऐसा माना जाता है कि जब शरीर गर्भ में विकसित होता है, तब से ये लाइंस शरीर की कोशिकाओं की गतिविधियों को मैप करती हैं. इस रहस्यमयी पैटर्न को सिर्फ कुछ खास परिस्थितियों में ही दिखा जा सकता है. 

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इन लाइनों के बारे में सबसे पहले एक जर्मन डर्मैटोलॉजिस्ट अल्फ्रेड ब्लाश्को (Alfred Blaschko) ने बताया था, इसलिए इन लाइनों का नाम उनके नाम पर ही रखा गया. उन्होंने त्वचा की बीमारी से जूझ रहे लोगों के एक ग्रुप से डेटा इकट्ठा किया और उनकी त्वचा पर पड़े घावों के डिस्ट्रिब्यूशन को मैप किया.

अल्फ्रेड ब्लाश्को ने इन लाइनों की खोज की थी (Photo: Getty)

1901 में, उन्होंने अपने शोध के नतीजे सबके सामने रखे. उन्होंने बताया कि मानव त्वचा पर और भी पैटर्न मौजूद हैं- जैसे लैंगर लाइन, जिनका इस्तेमाल सर्जरी के दौरान चीरा लगाते समय किया जाता है. लेकिन ब्लाश्को लाइन किसी भी दूसरे पैटर्न या संरचनाओं से मेल नहीं खातीं.

100 से ज़्यादा सालों के बाद, वैज्ञानिक इस बात से सहमत हैं कि सबसे ज़्यादा संभावना यह है कि ब्लाश्को लाइंस भ्रूण के विकास (Embryonic development) के दौरान बनने वाले रास्तों को ट्रेस करती हैं. क्योंकि स्किन सेल्स माइग्रेट होती हैं और बड़ी संख्या में बढ़ती हैं. कहा जाता है कि ब्लाश्को ने एक यूनानी मूर्ति पर लाइनें बनाई थीं, जिसे उन्होंने अपने शोध में प्रदर्शित किया था. इसे इस तस्वीर से समझा जा सकता है.

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 शरीर पर आगे और पीछे, इस तरह नज़र आती हैं बलाश्को लाइंस (Photo: Wikipedia)

चित्र में देखा जा सकता है कि लाइनें अंदर दिख रही मिड लाइन को पार नहीं करती हैं. ये मिड लाइन एक काल्पनिक सीमा है जो शरीर के सामने छाती और पेट की लंबाई तक जाती दिखती है. पीठ पर, वे V का आकार बनाती हैं और हाथ-पैरों, सिर और चेहरे के चारों ओर ये लहरदार होती हैं.
 
अगर त्वचा की कोई खास बीमारी होती है, तो त्वचा पर घाव और पिगमेंटेशन हो सकता है, जो शरीर पर ब्लाश्को लाइन पर दिखाई देते हैं. त्वचा के घाव जो ब्लास्चको लाइनों पर मैप करते हैं, वे क्यूट्नियस मोज़ेकिज़्म (Cutaneous mosaicism) का एक उदाहरण हैं. स्किन सेल्स के एक सबसेट में जेनेटिक म्यूटेशन होने का मतलब है कि शरीर में अब अलग-अलग जेनेटिक मेटीरियल वाली दो अलग-अलग तरह की स्किन सेल्स मौजूद हैं. जहां सेल्स की ये दो अलग-अलग लाइनें मिलती हैं, वहां ब्लाश्को लाइनों के साथ-साथ घाव बन जाते हैं.

 

 

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