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क्या कोई जीव 'मरने' के बाद फिर जीवित हो सकता है? जवाब है- हां, वैज्ञानिकों ने कर दिखाया

क्या कोई हजारों सालों तक बर्फ में दबे रहने के बाद फिर जिंदा हो सकता है? ये तो नामुमकिन ही है. क्योंकि हजारों सालों तक बर्फ में दबे रहने के बाद कोई भी जीव जिंदा नहीं रहेगा. लेकिन वैज्ञानिकों ने एक जीव को 24 हजार साल बाद जिंदा कर दिया. आइए जानते है इसके पीछे की कहानी...

24 हजार साल बर्फ में दबे रहने के बाद इस डेलॉयड रोटीफर्स को फिर से जीवित किया गया. (फोटोः माइकल लेवका/adineta) 24 हजार साल बर्फ में दबे रहने के बाद इस डेलॉयड रोटीफर्स को फिर से जीवित किया गया. (फोटोः माइकल लेवका/adineta)
aajtak.in
  • मॉस्को,
  • 06 जून 2022,
  • अपडेटेड 7:59 PM IST
  • Bdelloid Rotifers है इस जीव का नाम
  • बुरे हालात में खुद को डाल देता है कोमा में

कहानियां अक्सर पुरानी ही होती हैं. आपको पिछले साल हुए एक रिसर्च की हैरान करने वाली कहानी बताते हैं. इसका मकसद था प्राचीन जीव को फिर से जीवित करके उसकी शारीरिक प्रक्रियाओं की जांच करना. वैज्ञानिकों ने 24 हजार साल से साइबेरिया के पर्माफ्रॉस्ट में दबे एक जीव को फिर जिंदा कर दिया. यानी जो जीव 24 हजार साल पहले बर्फ में दफ़न हो गया था, अब वो जीवित है. यह असंभव कार्य था. 

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जिस जीव को वैज्ञानिकों ने जीवित किया है, वह एक प्राचीन डेलॉयड रोटीफर्स (Bdelloid rotifers) है. यह किसी भी तरह के विपरीत मौसम में सर्वाइव करने की ताकत रखता है. जैसे- सूखा, भयानक सर्दी, भूख, यहां तक कि कम ऑक्सीजन में भी जिंदा रह जाता है. लेकिन शरीर से कोई गतिविधि नहीं करता, बस एक ही जगह पड़ा रहता है. जैसे कोमा पड़ा कोई इंसान. लेकिन उसे फिर से जीवित करना मुश्किल है. 

साइबेरिया में 11.5 फीट नीचे से लिए सैंपल

डेलॉयड रोटीफर्स (Bdelloid rotifers) बेहद सूक्ष्मजीव होते हैं. इन्हें जीवन देने के प्रयासों की कहानी एक वैज्ञानिक रिपोर्ट के तौर पर करेंट बायोलॉजी में प्रकाशित की गई थी. वैज्ञानिकों ने साइबेरिया के पर्माफ्रॉस्ट से 11.5 फीट बर्फ के अंदर से सैंपल लिया. सैंपल को धीरे-धीरे गर्म किया. उसके बाद उसमें मौजूद सूक्ष्मजीव को जीवित करने के लिए माहौल बनाया. 

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डेलॉयड रोटीफर्स खुद को विपरीत हालातों में निष्क्रिय कर देते हैं, उनका मेटाबॉलिज्म बंद हो जाता है. (फोटोः लीबोव श्माकोवा)

पाचन क्रिया को रोक देते हैं ऐसे जीव

रूस के पुशिनो स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ फिजियोकेमिकल एंड बायोलॉजिकल प्रॉब्लम्स में सॉयल क्रायोलॉजी के वैज्ञानिक स्टास मालाविन ने कहा कि हमारा प्रयोग यह स्पष्ट करता है कि सूक्ष्मजीव हजारों सालों तक जीवित रह सकते हैं. या फिर खुद को इस हालात में ढाल देते हैं कि वापस जिंदा हो सकते. इसके कहते हैं क्रिप्टोबायोसिस (Cryptobiosis). यानी जीव अपने मेटाबॉलिज्म को लंबे समय के लिए रोक देते हैं. 

जीवाश्म को प्रदूषण मुक्त रखना जरूरी

स्टास मालाविन की टीम जीवाश्म के रूप में बदल चुके या रह रहे जीवों की स्टडी के मामले में एक्सपर्ट हैं. इनकी टीम बस एक चीज का बहुत ध्यान रखती है जो सैंपल लिया गया है, वो बहुत ज्यादा प्रदूषित न हो. उसमें आधुनिक लेयर्स ने मिले हों. क्योंकि जब फ्रीजिंग की प्रकिया शुरु होती है तब ये सूक्ष्मजीवों इन लेयर्स के साथ मिल जाते हैं. सूक्ष्मजीवों के अंग इनके साथ मिल जाते हैं, जिनसे उनके जीवित रहते या वापस जीवित होने की संभावना कम हो जाती है. 

इनके अंग काम करना बंद कर देते हैं. शरीर की सारी प्रक्रियाएं धीमी हो जाती है. उपयुक्त माहौल मिलते ही फिर सक्रिय हो जाते हैं.

खुद को कोमा में डाल देते हैं ऐसे जीव

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स्टास ने बताया कि बहुअंगीय जीवों यानी जिनके पास कई अंग हैं, जैसे स्तनधारी या पक्षी. इन्हें बर्फ में से जिंदा निकालना मुश्किल है. या फिर दबे हुए स्तनधारियों को फिर से जीवित करना अत्यधिक मुश्किल. क्योंकि इनके कई अंग जम चुके होते हैं. खराब हो चुके होते हैं. इनमें वो काबिलियत नहीं होती कि ये विपरीत हालातों में खुद को कोमा में डालकर शरीर के मेटबॉलिज्म को निष्क्रिय कर दें. 

सिर्फ दोबारा जिंदा नहीं हुआ, बच्चे भी पैदा किए

डेलॉयड रोटीफर्स (Bdelloid rotifers) 24 हजार साल बाद न सिर्फ जीवित हुए बल्कि प्रजनन भी किया. उसने एसेक्सुअली यानी पार्थेनोजेनेसिस प्रक्रिया से नए रोटीफर्स पैदा कर दिए. पिछले साल की गई खोज से लेकर अब तक वैज्ञानिक इस डेलॉयड रोटीफर्स की स्टडी कर रहे हैं. इससे प्राचीन जीवों की स्टडी में मदद मिलेगी.

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