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नए मल्टी-प्लैनेट सिस्टम की खोज, धरती जैसे 'दो ग्रह' और मिले

MIT के वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष में एक मल्टी-प्लैनेट सिस्टम की खोज की है. यह सिस्टम पृथ्वी से केवल 33 प्रकाश वर्ष की दूरी पर है. इसमें पृथ्वी के आकार के दो ग्रह मौजूद हैं. 

नासा का ट्रांज़िटिंग एक्सोप्लैनेट सर्वे सैटेलाइट -TESS (Photo: NASA) नासा का ट्रांज़िटिंग एक्सोप्लैनेट सर्वे सैटेलाइट -TESS (Photo: NASA)
aajtak.in
  • वॉशिंगटन,
  • 21 जून 2022,
  • अपडेटेड 3:08 PM IST
  • पृथ्वी से केवल 33 प्रकाश वर्ष दूर है ये सिस्टम
  • इसमें पृथ्वी जैसे दो ग्रह मौजूद

नासा (NASA) के ट्रांज़िटिंग एक्सोप्लैनेट सर्वे सैटेलाइट (Transiting Exoplanet Survey Satellite- TESS) के जरिए अंतरिक्ष में एक मल्टीप्लैनेट सिस्टम (Multiplanet system) का पता चला है. यह सिस्टम पृथ्वी से केवल 33 प्रकाश वर्ष की दूरी पर है. इसमें पृथ्वी के आकार के दो ग्रह मौजूद हैं. 

इस मल्टीप्लैनेट सिस्टम के केंद्र में एक छोटा और ठंडा एम-ड्वार्फ तारा है, जिसका नाम है HD 260655. MIT के खगोलविदों का कहना है कि इसमें पृथ्वी के आकार के दो ग्रह भी मौजूद हैं. खोजकर्ताओं का कहना है कि यह ग्रह रहने योग्य नहीं हैं, क्योंकि उनकी ऑर्बिट बहुत तंग है, जिससे ग्रहों का तापमान ज्यादा है. ज्यादा तापमान की वजह से सतह पर पानी नहीं है.

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नासा के ट्रांज़िटिंग एक्सोप्लैनेट सर्वे सैटेलाइट की मदद से खोजा गया मल्टीप्लैनेट सिस्टम (Photo: NASA)

पहला ग्रह है HD 260655b जो हर 2.8 दिन में तारे की परिक्रमा करता है. यह पृथ्वी से करीब 1.2 गुना बड़ा है. दूसरा ग्रह जो बाहर की तरफ है वह है HD 260655c. यह हर 5.7 दिन में तारे की परिक्रमा करता है. यह पृथ्वी से 1.5 गुना बड़ा है. इसके अलावा, यह भी पता चला है कि ये दोनों ग्रह चट्टान के समान हैं.

मल्टीप्लैनेट सिस्टम की खोज से वैज्ञानिक खासे उत्साहित हैं. वैज्ञानिकों का मानना है कि इस सिस्टम से पृथ्वी के आस-पास के इलाकों को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलेगी. कैलिफोर्निया के पासाडेना में अमेरिकन एस्ट्रोनॉमिकल सोसायटी की बैठक में, वैज्ञानिक खोज के नतीजों के बारे में बताएंगे. 

 

रिसर्च टीम के एक सदस्य मिशेल कुनिमोटो का कहना है कि इस सिस्टम में दोनों ग्रहों को उनके तारे की चमक की वजह से, वायुमंडलीय अध्ययन के लिए सबसे अच्छा लक्ष्य माना जा रहा है. इन ग्रहों के चारों तरफ का वातावरण कैसा है, क्या यहां पानी है या यहां कार्बन आधारित प्रजातियां हैं, इन सभी सवालों के जवाब खोजने के लिए वैज्ञानिक अब इनका अध्ययन करेंगे. 

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