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इस तारीख को धरती पर लौटेगा सुनीता विलियम्स को स्पेस स्टेशन पर अटकाने वाला स्टारलाइनर कैप्सूल

सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर को स्पेस स्टेशन पर अटकाने वाला बोईंग स्टारलाइनर कैप्सूल अब 6 सितंबर की देर रात करीब सवा तीन बजे स्पेस स्टेशन से निकलेगा. 7 की सुबह 10 बजे के आसपास धरती पर लैंड करेगा. इस दौरान उसमें कोई भी एस्ट्रोनॉट नहीं होगा. ये कैप्सूल अब खाली आ रहा है.

ये है वो स्टारलाइनर कैप्सूल जिसने स्पेस स्टेशन पर सुनीता विलियम्स को फंसा दिया है. (सभी फोटोः NASA) ये है वो स्टारलाइनर कैप्सूल जिसने स्पेस स्टेशन पर सुनीता विलियम्स को फंसा दिया है. (सभी फोटोः NASA)
आजतक साइंस डेस्क
  • नई दिल्ली,
  • 31 अगस्त 2024,
  • अपडेटेड 10:42 AM IST

NASA और बोईंग ने मिलकर यह फैसला किया है कि 6 सितंबर 2024 की देर रात करीब सवा तीन बजे के आसपास स्टारलाइन कैप्सूल स्पेस स्टेशन से अलग होगा. 7 सितंबर की सुबह करीब 10 बजे धरती पर लैंड होगा. लैंडिंग न्यू मेक्सिको के व्हाइट सैंड्स स्पेस हार्बर में कराई जाएगी. 

नासा अपने सोशल मीडिया हैंडल्स और वेबसाइट पर इसका लाइव प्रसारण भी करेगा. ये वही स्पेसक्राफ्ट है जिससे सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर 5 जून को स्पेस स्टेशन गए थे. 8 दिन बाद उन्हें इसी यान से लौटना था. लेकिन तकनीकी गड़बड़ियों की वजह से दोनों स्पेस स्टेशन पर अटक गए. 

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स्टारलाइनर को खाली भेजने का फैसला क्यों लिया गया? 

NASA वैज्ञानिकों और प्रशासन के दिमाग में पहले हो चुके दो हादसों ने घर बना रखा है. जिसकी वजह से स्टारलाइनर को खाली लैंड कराने का फैसला लिया गया. ये हादसे हैं- चैलेंजर और कोंलबिया स्पेस शटल हादसा. इन हादसों से नासा एडमिनिस्ट्रेशटर बिल नेल्सन इतने प्रभावित हैं कि उन्होंने स्टारलाइनर को खाली लैंड कराने का फैसला किया.

कोलंबिया स्पेस शटल हादसा 1 फरवरी 2003 को हुआ था. चैलेंजर हादसा जनवरी 1986 में हुआ था. दोनों ही हादसों में कुल मिलाकर नासा के 14 एस्ट्रोनॉट्स मारे गए थे. जिसमें भारतवंशी कल्पना चावला भी थीं. 

स्टारलाइनर की पूरी कहानी... 

सुनीता विलियम्स जिस स्टारलाइनर स्पेसक्राफ्ट से स्पेस स्टेशन गई हैं. यह उसकी पहली मानवयुक्त ट्रायल उड़ान थी. स्टारलाइनर की कहानी पढ़ेंगे तो पता चलेगा कि यह अंतरिक्षयान शुरू से अंत तक दिक्कतों से घिरा रहा है. 

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बोईंग डिफेंस, स्पेस एंड सिक्योरिटी कंपनी ने एस्ट्रोनॉट्स को स्पेस स्टेशन तक पहुंचाने और लाने के लिए स्टारलाइनर स्पेसक्राफ्ट को बनाया.नासा ने कॉमर्शियल क्रू प्रोग्राम के तहत बोईंग को यह स्पेसक्राफ्ट बनाने के लिए कहा. करोड़ों-अरबों की फंडिंग की. इस स्पेसक्राफ्ट का मॉडल पहली बार 2010 में पेश किया गया था. 

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नासा ने अक्तूबर 2011 में बोईंग को स्पेसक्राफ्ट बनाने के लिए हरी झंडी दी. स्टारलाइनर बनते-बनते 6 साल लग गए. 2017 में बना. 2019 तक परीक्षण उड़ान होते रहे. इन उड़ानों में कोई इंसान शामिल नहीं था. पहली मानवरहित ऑर्बिटल फ्लाइट टेस्ट 20 दिसंबर 2019 को हुई. इस उड़ान में कोई इंसान नहीं था. 

दो सॉफ्टवेयर की गड़बड़ी की वजह से यह दूसरे ऑर्बिट में पहुंच गया. स्पेस स्टेशन से डॉकिंग हो नहीं पाई. दो दिन बाद न्यू मेक्सिको के व्हाइट सैंड्स मिसाइल रेंज में लैंड हुआ. 

दूसरी उड़ान भी गड़बड़ थी स्टारलाइनर की

दूसरी मानवरहित उड़ान 6 अप्रैल 2020 को हुई. मकसद स्पेस स्टेशन तक जाना था. डॉकिंग करनी थी. फिर वापस आना था. लेकिन लॉन्चिंग टालनी पड़ी. अगस्त 2021 में लॉन्चिंग की तैयारी हुई. लेकिन फिर स्पेसक्राफ्ट के 13 प्रोप्लशन वॉल्व में कमियां मिलीं.  

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इसके बाद बोईंग ने पूरे स्पेसक्राफ्ट को फिर से बनाया. मई 2022 में ट्रायल उड़ान की तैयारी की गई. 19 मई 2022 को स्टारलाइनर ने फिर से उड़ान भरी. इस बार उसमें दो डमी एस्ट्रोनॉट्स बिठाए गए थे. यानी इंसानों जैसे दिखने वाले निर्जीव मॉडल. लेकिन ऑर्बिटल मैन्यूवरिंग और एटीट्यूड कंट्रोल सिस्टम थ्रस्टर्स फेल हो गए. 

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किसी तरह से 22 मई 2022 को स्टारलाइनर को स्पेस स्टेशन से जोड़ा गया. 25 मई 2022 को स्टारलाइनर स्पेस स्टेशन से वापस धरती पर आया. रीएंट्री के समय स्पेसक्राफ्ट से नेविगेशन सिस्टम खराब हुआ. कम्यूनिकेशन गड़बड़ा गया. साथ ही जीपीएस सैटेलाइट से कनेक्शन टूटा. लेकिन बोईंग ने कहा ये सामान्य है. 

तीसरी उड़ान कई बार टलने के बाद हुई... 

तीसरी मानवयुक्त उड़ान साल 2017 में तय की गई थी. लेकिन कई वजहों से देरी होते-होते यह जुलाई 2023 तक आ गई. 1 जून 2023 को बोईंग ने कहा कि हम इस उड़ान को टाल रहे हैं. 7 अगस्त 2023 को कंपनी ने कहा कि स्पेसक्राफ्ट की सारी दिक्कतें खत्म हो चुकी हैं. अगली उड़ान 6 मई 2024 को तय की गई. यानी इस साल. 

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लेकिन यह लॉन्चिंग फिर टाली गई. क्योंकि एटलस रॉकेट में ऑक्सीजन वॉल्व में कुछ दिक्कत आ रही थी. इसके बाद स्पेसक्राफ्ट में हीलियम लीक होने से लॉन्चिंग टाली गई. 5 जून को सुनीता विलियम्स और बैरी बुच विलमोर इस स्पेसक्राफ्ट को लेकर अंतरिक्ष के लिए रवाना हुए. 8 दिन बाद 13 जून को इन्हें वापस आना था लेकिन अब तक स्पेस स्टेशन पर ही फंसे हुए हैं. 

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यह स्टारलाइनर की पहली मानवयुक्त उड़ान थी... 

स्टारलाइनर स्पेसक्राफ्ट की यह पहली मानवयुक्त उड़ान है. यानी सुनीता और बैरी के साथ इसने स्पेस स्टेशन के लिए उड़ान भरी है. अंतरिक्ष यात्रा हमेशा से ही खतरों से भरा रहा है. लेकिन इस मिशन ने तो बोईंग के लिए मुसीबत खड़ी कर दी है. सवाल ये उठता है कि क्या हमारे एस्ट्रोनॉट्स अंतरिक्ष स्टेशन पर खतरे में हैं? 

स्पेस स्टेशन एक बार में आठ स्पेसक्राफ्ट को डॉक कर सकता है. यानी यहां पर किसी भी समय नया स्पेसक्राफ्ट अटैच करने की संभावना रहती है. 365 फीट लंबे स्पेस स्टेशन में पर्याप्त जगह है, जहां पर सुनीता विलियम्स आराम से और सुरक्षित रह सकती हैं. अगर स्पेसक्राफ्ट में कोई दिक्कत होती है तो उसे किसी भी समय धरती पर वापस भेजा जा सकता है. जो देरी हो रही है वह सतर्कता की वजह से की जा रही है. 

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