
NASA की सबसे बड़ी प्रयोगशाला है जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी (JPL). नासा ने फैसला लिया है कि वो यहां से 530 कर्मचारियों को बाहर निकालेगा. साथ ही 40 कॉन्ट्रैक्टर्स के साथ समझौते खत्म करेगा. प्रयोगशाला ने अपने बयान में लिखा है कि इससे हमारे टेक्निकल और सपोर्ट एरिया पर असर पड़ेगा. लेकिन यह दर्दभरा जरूरी फैसला है.
यह फैसला इसलिए लिया गया है ताकि बजट एलोकेशन सही से किया जा सके. संतुलन बनाया जा सके. इसके बावजूद जेपीएल और उसके लोग नासा और अपने देश के लिए जरूरी काम करते रहेंगे. JPL का मुख्यालय लॉस एंजेल्स में है. जेपीएल की फंडिंग तो सरकार करती है लेकिन इसका मैनेजमेंट कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी यानी CALTECH करता है.
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इस सेंटर के पास कई बड़े मिशन हैं. जैसे- मंगल ग्रह पर भेजा गया क्यूरियोसिटी (Curiosity) और पर्सिवरेंस (Perseverance) रोवर मिशन. पर्सिविरेंस का मुख्य काम है मंगल ग्रह के सैंपल जमा करना और उसे धरती पर वापस भेजकर JPL तक पहुंचाना. जेपीएल मंगल ग्रह के इस सैंपल की जांच करेगा. ताकि वहां पर इंसानी बस्ती बसाई जा सके. साथ ही वहां पर जीवन की खोज की जा सके.
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पिछले साल इस मिशन के लिए जो बजट था, वो 8 से 11 बिलियन डॉलर था. यानी 66.36 हजार करोड़ से 91.25 हजार करोड़ रुपए. इतने भीमकाय बजट पर कुछ अमेरिकी सांसदों की नजर पड़ गई. उनका कहना था कि ये बहुत ज्यादा है. इसलिए अब इसे 63 फीसदी घटा दिया है. इसलिए लैब ने अपने रोबोटिक प्लैनेटरी एक्सप्लोरेशन मिशन से जुड़े लोगों की छंटनी करने का फैसला किया है.