
सिर्फ 16 साल और. मुंबई का 13 फीसदी यानी 830 वर्ग किलोमीटर इलाका समंदर में डूब जाएगा. सगी के अंत तक डूबने वाले इलाके की मात्रा बढ़कर 1377.12 वर्ग किलोमीटर हो जाएगी. यानी 2150 तक मुंबई खत्म. आर्थिक राजधानी के नीचे से गायब हो जाएगा 'Earth'. ये कहानी हम करीब एक महीने पहले बता चुके हैं...
सवाल सिर्फ इस कहानी या मुंबई जैसे शहरों का नहीं है, जो समंदर किनारे बसे हैं. अपनी खूबसूरती के लिए जाने जाते हैं. मुद्दा ये है कि जिस समंदर के सहारे इनका व्यवसाय चलता है. वही समंदर इन्हें निगल लेगा. प्राचीन द्वारका की तरह ये शहर भी पानी के अंदर होंगे. उन्हें देखने के लिए ट्रांसपैरेंट सबमरीन या स्कूबा डाइविंग की मदद लेनी होगी.
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समंदर के बढ़ते जलस्तर को नापने के लिए नासा के वैज्ञानिकों ने खास रोबोट्स तैयार किए हैं. ये रोबोट्स पानी के नीचे तैनात किए जा रहे हैं. नासा की जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी ने नया प्रोजेक्ट शुरू किया है. इसका नाम है IceNode. इस मिशन में नासा वैज्ञानिक अंटार्कटिका की बर्फीली परत के नीचे समंदर के अंदर ऑटोनॉमस अंडरवाटर रोबोट्स छोड़ रहे हैं. ये अंटार्कटिका की स्टडी समंदर के नीचे से करेंगे.
जानिए क्या है IceNode मिशन में खास, जिसे कर रहा है नासा?
इस साल मार्च में नासा के वैज्ञानिकों ने एक सिलेंडर जैसे रोबोट को अलास्का के ब्यूफोर्ट सागर में बर्फ की मोटी सतह से 100 फीट नीचे तैनात किया. ऐसे ही कई रोबोट्स को अंटार्कटिका में तैनात करने की तैयारी है. ये सभी रोबोट्स लंबे समय तक बर्फ की मोटी परत के नीचे बर्फ के पिघलने और समंदर के जलस्तर के बढ़ने का डेटा जमा करेंगे.
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क्योंकि सबसे कम लोगों की पहुंच वाला अंटार्कटिका ऐसा महाद्वीप है, जिसकी तबियत बिगड़ी तो पूरी दुनिया हिल जाएगी. यानी वहां होने वाले किसी भी मौसमी बदलाव का असर पूरी दुनिया पर पड़ता है. इसलिए वहां पर ऐसे यंत्र लगाने जरूरी हैं, जो भविष्य में आने वाली आपदा की डिटेल जानकारी दे सकें.
पूरा अंटार्कटिका पिघला तो समंदर 200 फीट ऊपर आ जाएगा
वैज्ञानिकों के अनुमान के मुताबिक अगर अंटार्कटिका की पूरी बर्फ पिघल जाए तो दुनिया के लगभग सभी समंदर की जलस्तर 200 फीट ऊपर आ जाएगा. इतने में तो भारत के कई तटीय राज्यों का बड़ा इलाका डूब जाएगा. दुनिया के नक्शे से कई द्वीप गायब हो जाएंगे. हो सकता है आपको समंदर देखने के लिए चेन्नई न जाना पड़े, वो बेंगलुरु में ही दिख जाए. क्योंकि जिस हिसाब से गर्मी बढ़ रही है, ग्लोबल वॉर्मिंग बढ़ रही है. ग्लेशियर और अंटार्कटिका पिघल रहा है. वह भी तेजी से.