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जमीन से 660KM नीचे मिले हीरे में कैद था नया खनिज 'डेवमॉयट', वैज्ञानिक हैरान

धरती के अंदर बेहद खूबसूरत दुनिया है. जमीन से 660 किलोमीटर नीचे मैंटल से मिले एक प्राचीन हीरे के अंदर ऐसा खनिज मिला है, जो इससे पहले कभी नहीं खोजा गया. यहां तीन बातें एकदम अलग हैं. पहली- धरती के लोअर मैंटल से हीरे की खोज. दूसरा- हीरा नायाब और प्राचीन है. तीसरा- इसके अंदर दबा हुआ ऐसा खनिज मिला जो पहले कभी नहीं देखा गया. खास बात ये है कि इस लोअर मैंटल के 5% हिस्से में यह नया खनिज पाया जाता है.

हीरे के अंदर दिख रहे छोटे-छोटे बिंदु जैसी आकृति ही नया खनिज डेवमॉयट है. (फोटोः ऐरन सेलेस्टियन/नेचुरल म्यूजियम ऑफ लॉस एंजिल्स काउंटी) हीरे के अंदर दिख रहे छोटे-छोटे बिंदु जैसी आकृति ही नया खनिज डेवमॉयट है. (फोटोः ऐरन सेलेस्टियन/नेचुरल म्यूजियम ऑफ लॉस एंजिल्स काउंटी)
aajtak.in
  • लॉस एंजेल्स,
  • 14 नवंबर 2021,
  • अपडेटेड 8:05 AM IST
  • पहली बार मिला ऐसा खनिज, जिसकी इंसान को जानकारी नहीं थी.
  • हीरे के अंदर था सुरक्षित, बाहर आते ही टूटने का खतरा है इस खनिज को
  • लोअर मैंटल मे 5 फीसदी हिस्से में मौजूद है यह नया खनिज

धरती के अंदर बेहद खूबसूरत दुनिया है. जमीन से 660 किलोमीटर नीचे मैंटल से मिले एक प्राचीन हीरे के अंदर ऐसा खनिज मिला है, जो इससे पहले कभी नहीं खोजा गया. यहां तीन बातें एकदम अलग हैं. पहली- धरती के लोअर मैंटल से हीरे की खोज. दूसरा- हीरा नायाब और प्राचीन है. तीसरा- इसके अंदर दबा हुआ ऐसा खनिज मिला जो पहले कभी नहीं देखा गया. खास बात ये है कि इस लोअर मैंटल के पांच फीसदी हिस्से में यह नया खनिज पाया जाता है. 

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इस खनिज का नाम है डेवमॉयट (Davemaoite). बोत्सवाना में मिले छोटे से हीरे के अंदर यह क्रिस्टल जैसा खनिज मिला है. इस खनिज के मिलने से वैज्ञानिकों को धरती की गहराई में नए रसायनों की जानकारी होगी. धरती की परतों को लेकर रहस्यों का खुलासा होगा. असल में यह हीरा बोत्सवाना के ओरापा स्थित एक हीरे की खदान की सबसे गहरी गुफा से निकला है. यह चार मिलिमीटर चौड़ा है. इसका वजन सिर्फ 81 मिलिग्राम्स है. इसके बारे में हाल ही में साइंस जर्नल में रिपोर्ट प्रकाशित हुई है. 

1987 में मिला था हीरा पर किसी को इसकी खासियत नहीं पता थी

इस हीरे को 1987 में एक डायमंड डीलर ने कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के वैज्ञानिक को बेंच दिया था. यह वैज्ञानिक हीरे की स्टडी के लिए प्रसिद्ध हैं. लेकिन न उस समय डीलर को इस हीरे की खासियत पता थी, न ही वैज्ञानिक को. अब यह हीरा कैलिफोर्निया के लॉस एंजिल्स काउंटी में स्थित नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम में रखा है. हाल ही में लास वेगास स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ नेवादा के साइंटिस्ट ओलिवर शॉनर ने इसकी स्टडी की. 

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असल में ओलिवर शॉनर दुनिया के सबसे गहरे हीरों की खोज में लगे थे. तब उन्हें इस हीरे के बारे में पता चला. ताकि वह धरती की गहराइयों की रसायनिक गणित को समझ सकें. आमतौर पर हीरे जमीन के नीचे 120 से 250 किलोमीटर की गहराई में बनते हैं. वहीं मिलते भी हैं. लेकिन यह प्राचीन और नायाब हीरा धरती के लोअर मैंटल से मिला है. यह परत जमीन से 660 किलोमीटर नीचे से शुरु होती है. 

हीरे के अंदर लाल घेरे में दिख रहे हैं डेवमॉयट क्रिस्टल. (फोटोः ऐरन सेलेस्टियन/नेचुरल म्यूजियम ऑफ लॉस एंजिल्स काउंटी)

एक्सरे करते ही वैज्ञानिक हुए हैरान, हीरे के अंदर दिखा क्रिस्टल जैसा खनिज

जब ओलिवर शॉनर और उनके साथियों ने इस हीरे का एक्सरे किया तो उन्हें बीच में एक खनिज दिखाई दिया. उसके बाद इन लोगों ने हीरे को लेजर से काटा और क्रिस्टल जैसे खनिज डेवमॉयट को बाहर निकाला. फिर मास स्पेक्ट्रोमेट्री (Mass Spectrometry) तकनीक के जरिए यह पता करने की कोशिश की कि डेवमॉयट किस चीज से बना है. यह एक खास प्रकार के कैल्सियम सिलिकेट से बना है, जो सिर्फ धरती के लोअर मैंटल में मिलता है. लेकिन इससे पहले यह कभी न देखा गया.. न ही खोजा गया. यानी इंसान इस खनिज से अनजान था. 

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डेवमॉयट (Davemaoite) के कम क्यूबिक अरेंजमेंट में होते हैं. जिसे परोव्सकाइट स्ट्रक्चर (Perovskite Structure) कहते हैं. परोवस्काइट के एटॉमिक स्ट्रक्चर में कैल्सियम, सिलिकॉन और ऑक्सीजन का मिश्रण होता है. यह स्ट्रक्चर बेहद जटिल वातावरण में बनता है. यानी जमीन के ऊपर पड़ने वाले दबाव से 2 लाख गुना ज्यादा दबाव के अंदर विकसित होता है. सतह पर मिलने वाला कैल्सियम सिलिकेट सफेद रंग के खनिज में मिलता है. जिसे वोलास्टोनाइट (Wollastonite) कहते हैं. यह सुई जैसा क्रिस्टल होता है. 

डेवमॉयट (Davemaoite) का नाम डीप अर्थ साइंटिस्ट हो-क्वांग डेव माओ (Ho-Kwang Dave Mao) के नाम पर रखा गया है. हो क्वांग डेव माओ वॉशिंगटन डीसी स्थित कार्नेगी इंस्टीट्यूशन फॉर साइंसेज में काम करते हैं. ओलिवर शॉनर ने कहा कि अगर इस क्रिस्टल को धरती के ऊपर लाते हैं तो यह आसानी से टूट सकता है, क्योंकि यहां दबाव में भारी कमी आती है. लेकिन यह एक हीरे के अंदर दबा था, इसलिए यह सुरक्षित था. इस हीरे की उम्र करीब 10 करोड़ से लेकर 150 करोड़ साल के बीच हो सकती है. हालांकि इसकी असली उम्र का पता लगाया जा रहा है. 

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