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वैज्ञानिकों की चेतावनी- कोरोना के पुराने वैरिएंट अब भी हैं बाकी, मच सकती है दोबारा तबाही, स्टडी में दिखे प्रमाण

इंसानों में भले ही कोरोना के शुरुआती वैरिएंट खत्म हो चुके हों, लेकिन अब भी ये गायब नहीं हुए हैं. एक स्टडी के अनुसार ये हिरणों में लगातार दिख रहे हैं. साढ़े 5 हजार से ज्यादा सैंपल्स पर हुए इस अध्ययन के बाद से साइंटिस्ट चिंता जता रहे हैं कि आगे म्यूटेट होकर वे और भी खतरनाक हो सकते हैं.

कोरोना वायरस को फिलहाल ट्रांजिशन पीरियड में बताया जा रहा है. सांकेतिक फोटो (Pixabay) कोरोना वायरस को फिलहाल ट्रांजिशन पीरियड में बताया जा रहा है. सांकेतिक फोटो (Pixabay)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 03 फरवरी 2023,
  • अपडेटेड 11:16 AM IST

कोरोना को लेकर अगर आप निश्चिंत हो चुके हों तो संभलने का समय आ गया है. इसे लेकर वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) ने कहा है कि बीमारी फिलहाल ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी बनी रहेगी. ऐसे में अगर अभी लापरवाही हुई तो मुश्किल बढ़ सकती है. खासकर तब जबकि कोरोना के पुराने वैरिएंट भी अब तक बने हुए हैं. प्रोसिडिंग्स ऑफ नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज (पीएनएएस) में छपे अध्ययन में माना गया कि हिरणों में कोरोना के पुराने वैरिएंट अब भी सर्कुलेट हो रहे हैं, जो कि इंसानों तक दोबारा पहुंच सकते हैं. 

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साल 2020 की शुरुआत में चीन से निकलकर कोरोना जब दुनिया में फैलने लगा तो इसने अपने रूप में कई बदलाव किए. पहले टाइप को अल्फा नाम दिया गया, जिसके बाद बीटा, गामा, डेल्टा और ओमिक्रॉन आए. फिजिक्स या मैथ्स की तरह सुनाई देने वाले इस वैरिएंट्स ने दुनिया में खूब तबाही मचाई. WHO ने इन्हें वैरिएंट ऑप कन्सर्न कहा यानी जिसपर चिंता करने की जरूरत है. वहीं कुछ ऐसे वैरिएंट भी आए, जो घातक या संक्रामक नहीं थे, उन्हें वैरिएंट ऑफ इंट्रेस्ट कहा गया. इनपर नजर रखने की तो जरूरत थी, लेकिन घबराने की नहीं. 

वैरिएंट ऑफ इंट्रेस्ट पर हुई हालिया स्टडी कहती है कि म्यूटेशन के बाद ये खत्म नहीं हुए, बल्कि हिरणों में उसी अवस्था में बने हुए हैं. कॉर्नेल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने इसकी जांच के लिए दिसंबर 2021 से लेकर लगभग हाल तक के सैंपल लिए. अमेरिका और कनाडा के सफेद पूंछ वाले हिरण अल्फा और गामा वैरिएंट से संक्रमित पाए गए. 

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हिरणों के साढ़े 5 हजार सैंपल्स की जांच में संक्रमण मिला. सांकेतिक फोटो (Pixabay)

स्टडी के लिए न्यूयॉर्क स्टेट और कनाडा में उन हिरणों को टिशू सैंपल लिया गया, जिनका शिकार हो चुका था. कुल 5,500 सैंपल्स में से शुरुआती महीनों के संक्रमण सिर्फ  0.6 प्रतिशत दिखा, जबकि आगे बढ़ते हुए लगभग 21 प्रतिशत तक पहुंच गया. यानी जब दुनिया में ओमिक्रॉन था, तब भी हिरणों में अल्टा, डेल्टा और गामा जैसे पुराने वैरिएंट बने हुए थे. जीनोम सीक्वेंसिंग में आए इस रिजल्ट के बाद वैज्ञानिक आशंकित हैं कि शायद ये वैरिएंट आगे चलकर इंसानों तक दोबारा फैल जाएं. या फिर जानवरों में ही ये ज्यादा खतरनाक हो जाएं. 

वैज्ञानिक हालांकि ये समझ नहीं सके कि हिरणों में अगर ये वैरिएंट आए भी तो अब तक यही क्यों बने हुए हैं. इसके साथ ही ये ये आशंका भी जोर पकड़ रही है कि फ्यूचर में शायद हिरणों के संपर्क में आने वालों से कोरोना के ये वैरिएंट एक बार फिर इंसानों में पहुंच जाए और दोबारा तबाही मचाएं. कनाडा के ओंटेरियो में एक ऐसा मामला दिख भी चुका है. सेंटर्स फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन ने अध्ययन के नतीजों को देखते हुए हिरणों के सीधे संपर्क में आने वालों को सावधानी बरतने की सलाह दी है. 

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