
तुर्की में 6 फरवरी 2023 की सुबह सवा चार बजे से अब तक 550 बार धरती कांप चुकी है. रिक्टर पैमाने पर सात तीव्रता के दो बार भूंकप आए. 6 से 7 तीव्रता के बीच 3 भूकंप, 5 से 6 तीव्रता के 26, 4 से 5 तीव्रता के 185 और 3 से 4 तीव्रता के 334 भूकंप आ चुके हैं. पहले भूकंप यानी 7.8 तीव्रता से जब धरती कांपी थी, तब उससे निकली भूंकपीय लहर 266 किलोमीटर तक तुरंत महसूस की गई. ताकतवर भूकंपों की गहराई 10 से 20 किलोमीटर के बीच थी.
एक शहर है दियारबकीर. पहले ही झटके ने एकसाथ 18 ऊंची इमारतों को गिरा दिया. पहली लहर का असर 2000 किलोमीटर तक महसूस किया गया. सबसे ज्यादा असर तुर्की, सीरिया, लेबनान और साइप्रस में दिखाई दिया. हालांकि नुकसान सबसे ज्यादा तुर्की और सीरिया में हुआ है.
पिछले 36 से 40 घंटों में तुर्की में 550 बार कांप चुका है. पहली भूकंप के बाद अगले 14 घंटे में 200 भूकंप आए. जो 3 तीव्रता के ऊपर के थे. क्योंकि इसके नीचे के महसूस नहीं होते. ये सब हो क्यों रहा है. अब हम आपको वो बताते हैं. क्योंकि तुर्की के नीचे की टेक्टोनिक प्लेट लगातार हिल रही है. वह अफ्रीन प्लेट की तरफ दबाव बना रही है. इसलिए यहां पर रिक्टर पैमाने पर सात तीव्रता के ज्यादा भूकंप आते हैं.
इस नक्शे से समझिए कि तुर्की की जमीन के नीचे क्या हो रहा है
इस नक्शे में आपको स्पष्ट तौर पर दिख रहा है कि एनाटोलियन माइक्रोप्लेट्स (Anatolian Microplates) एजियन माइक्रोप्लेट्स (Aegean Microplates) की तरफ बढ़ रही हैं. उधर अरेबियन टेक्टोनिक प्लेट (Arabian Plate) तुर्की की प्लेट को दबा रहा है. उपर से यूरेशियन प्लेट अलग दिशा में जा रही है. इन प्लेटों की धक्का-मुक्की से ताकत निकल रही है, उसी से पूरी धरती कांप रही है.
असल में तुर्की की टेक्टोनिक प्लेट दो हिस्से में बंटी है. पहली जिसपर इमारतें बनी हैं. दूसरी उससे काफी नीचे. आप देखेंगे कि नीचे वाली प्लेट पहले पीछे थी. जो अब दबाव की वजह से लगातार आगे बढ़ रही है. यही नहीं ये भी हो सकता है कि निचली प्लेट के खिसकने के चलते ऊपर की जमीन फट जाए. बीच में एक बड़ी दरार बन जाए. या पूरा देश दो हिस्सों में बंट जाए. क्योंकि माइक्रोप्लेट्स छोटी और कमजोर होती है. एनाटोलियन माइक्रोप्लेट्स बहुत ताकतवर नहीं हैं.
कितने प्लेटों पर बसा है तुर्की और आसपास का इलाका
तुर्की चार टेक्टोनिक प्लेटों के जंक्शन पर बसा हुआ है. इसलिए किसी भी प्लेट में जरा सी हलचल पूरे इलाके को हिला देता है. तुर्की का ज्यादातर हिस्सा एनाटोलियन माइक्रोप्लेट्स (Anatolian Microplates) पर है. इस प्लेट के पूर्व में ईस्ट एनाटोलियन फॉल्ट है. बाईं तरफ अरेबियन प्लेट (Arabian Plate) है. दक्षिण और दक्षिण-पश्चिम में अफ्रीकन प्लेट (African Plate) है. जबकि, उत्तर दिशा की तरफ यूरेशियन प्लेट है.
विपरीत दिशा में घूम रही है तुर्की के नीचे की जमीन
तुर्की के नीचे मौजूद माइक्रोप्लेट्स विपरीत दिशा में घूम रहा है. यानी एंटीक्लॉकवाइज. इन छोटी प्लेट्स को अरेबियन प्लेट धकेल रही है. घूमती हुई एनाटोलियन प्लेट को जब अरेबियन प्लेट से धक्का लगता है, तब यह यूरेशियन प्लेट से टकराती है. इसे भूकंप आते हैं. वो भी दो-दो बार. पहले अरेबियन प्लेट की टक्कर से. दूसरा यूरेशियन की टक्कर से.
असल में एनाटोलियन माइक्रोप्लेट्स बाल्टी में तैरते किसी कटोरी की तरह है. जो चारों तरफ से आने वाले दबाव की वजह से इधर-उधर तैर रहा है. जिस दिशा से भूगर्भीय ताकत आएगी वह उसके विपरीत दिशा में चली जाएगी. एनाटोलियन माइक्रोप्लेट्स यूरेशियन प्लेट से अलग हो चुकी है. अब इसे अरेबियन प्लेट दबा रहा है. जबकि यूरेशियन प्लेट इस दबाव को रोक रही है. अफ्रीकन प्लेट लगातार एनाटोलियन के नीचे सरक रही है. ये घटना साइप्रस के नीचे हो रहा है.
एक घटना ने वैज्ञानिकों के उड़ा दिए थे होश, फिर की थी स्टडी
30 अक्टूबर 2020 को तुर्की के समोस आइलैंड में खतरनाक भूकंप आया. तीव्रता 7 थी. ये हुआ इसलिए था क्योंकि एजियन और एनाटोलियन प्लेट्स का ऊपरी हिस्सा एकदूसरे से अलग हो रहा था. दोनों पूर्व और पश्चिम दिशा की ओर बढ़ रहे थे. इसकी वजह से उत्तर-दक्षिण दिशा से नीचे की प्लेट ने जगह भरने की कोशिश की. उधर अफ्रीकन प्लेट ने यूरेशिनय को धक्का देना शुरू कर दिया. इसकी वजह से ऊपरी का क्रस्ट कई छोटे-छोटे प्लेट्स में बंट गया. यानी माइक्रोप्लेट्स में बंट गए.
एजियन माइक्रोप्लेट्स काफी सदियों से ज्वालामुखीय और भूकंपीय गतिविधियों से जुड़े रहे हैं. जुलाई 1956 में 7.7 तीव्रता के भूकंप नक्सोस और सैंटोरिनी द्वीपों पर तबाही मचाई थी. इतना ही नहीं 3650 साल पहले सैंटोरिनी में आए भयानक भूकंप की वजह से मिनोआन सभ्यता का खात्मा हो गया था. इसलिए समोस आइलैंड पर आए भूकंप की स्टडी करना जरूरी था. यह स्टडी 22 मार्च 2021 को नेचर साइंटिफिक रिपोर्ट्स में प्रकाशित हुई थी.
7 रिक्टर के ऊपर कब और कितने भूकंप आए, कितने लोग मारे गए
7.8 तीव्रताः तुर्की में आज आए भूकंप की बराबर तीव्रात का भूकंप इससे पहले 1939 में आया था. उसमें 32,700 से ज्यादा लोग मारे गए थे.
7.6 तीव्रताः 17 अगस्त 1999 में तुर्की के इजमित में भूकंप आया. इसमें 17 हजार से ज्यादा लोग मारे गए थे. उससे पहले 23 जुलाई 1784 को एरजिनकान में इसी पैमाने का भूकंप आया था. जिसमें 5 से 10 हजार लोगों के मारे जाने का अनुमान है.
7.5 तीव्रताः इस तीव्रता के तुर्की में अब तक छह भूकंप आए हैं. 13 दिसंबर 115 सीई में 7.5 तीव्रता का भूकंप आया था. जिसमें ढाई लाख से ज्यादा लोग मारे गए थे. 23 फरनरी 1653 को आए भूकंप में 2500 लोग मारे गए. 7 मई 1930 को आए भूकंप में 2500 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी. 26 नवंबर 1943 को आए भूकंप में करीब 5 हजार लोग मारे गए थे. 1 फरवरी 1944 में फिर इसी तीव्रता का भूकंप आया. चार हजार लोग मारे गए. 24 नवंबर 1976 को आए भूकंप में चार हजार लोग मारे गए.
7.4 तीव्रताः इस तीव्रता का भूकंप एक ही बार आया है. ये बात है 2 जुलाई 1840 की है. इस भूकंप में 10 हजार लोग मारे गए थे.
7.3 तीव्रताः 3 अप्रैल 1881 में आए भूकंप से 7866 लोगों की मौत हुई. 10 अक्टूबर 1883 को आए भूकंप से 120 लोग मारे गए. 9 अगस्त 1953 को आए भूकंप से 216 लोग मारे गए.
7.2 तीव्रताः 10 सितंबर 1509 में आए भूकंप से 10 हजार लोग मारे गए. 3 अप्रैल 1872 में 1800 लोग मारे गए. 18 मार्च 1953 को 265 लोग, 12 नवंबर 1999 में 894 लोग, 28 मार्च 1970 को 1086 लोग और 23 अक्टूबर 2011 को 604 लोग मारे गए.
7.1 तीव्रताः 22 मई 1766 को 4 हजार लोग मारे गए. 20 सितंबर 1899 को 1470 लोग मारे गए. 25 अप्रैल 1957 को 67 लोग और 26 मई 1957 को 52 लोग मारे गए.
7.0 तीव्रताः 13 जुलाई 1688 को 10 हजार लोग मारे गए. 10 जुलाई 1894 को 1300 लोग मारे गए. 6 अक्टूबर 1964 को 23 लोग मारे गए. 20 दिसंबर 1942 को तीन हजार लोग मारे गए. 30 अक्टूबर 2020 में 117 लोग मारे गए.
जानिए क्या होती हैं टेक्टोनिक प्लेट्स
हमारी पृथ्वी प्रमुख तौर पर चार परतों से बनी है. यानी इनर कोर (Inner Core), आउटर कोर (Outer Core), मैंटल (Mantle) और क्रस्ट (Crust). क्रस्ट सबसे ऊपरी परत होती है. इसके बाद होता है मैंटल. ये दोनों मिलकर बनाते हैं लीथोस्फेयर (Lithosphere). लीथोस्फेयर की मोटाई 50 किलोमीटर है. जो अलग-अलग परतों वाली प्लेटों से मिलकर बनी है. जिसे टेक्टोनिक प्लेट्स (Tectonic Plates) कहते हैं.
क्यों आता है भूकंप?
धरती के अंदर सात टेक्टोनिक प्लेट्स हैं. ये प्लेट्स लगातार घूमती रहती हैं. जब ये प्लेट आपस में टकराती हैं. रगड़ती हैं. एकदूसरे के ऊपर चढ़ती या उनसे दूर जाती हैं, तब जमीन हिलने लगती है. इसे ही भूकंप कहते हैं. भूकंप को नापने के लिए रिक्टर पैमाने का इस्तेमाल करते हैं. जिसे रिक्टर मैग्नीट्यूड स्केल कहते हैं.