
अमेरिका में पालतू तोते रखने वालों के लिए एक एक्सपेरिमेंट किया गया. बेहद हैरान करने वाला प्रयोग. उनके तोतों को दूसरे तोतों से बात करने की ट्रेनिंग दी गई. वो भी वीडियो कॉल पर. अब ये तोते टचस्क्रीन टैबलेट पर वीडियो कॉल करते हैं. अगर बात करने का मन होता है तो अपने पास में बंधी घंटियां बजाने लगते हैं. ताकि उनका मालिक कॉल लगाकर उनकी बात करवा सके.
पालतू तोते आमतौर पर घर में किसी के नहीं रहने पर. या फिर आसपास और तोतों के नहीं होने पर अकेला महसूस करते थे. तबियत खराब कर लेते थे. इसलिए यह वीडियो कॉल एक्सपेरिमेंट उनको स्वस्थ रखने के लिए मददगार साबित हो रहा है.
जब तोते वीडियो कॉल पर बातें करना, खुद को संवारना, गाने गाना सीख गए तब उन्हें दोस्त चुनने का विकल्प दिया गया. ताकि वो वीडियो कॉल में दिख रहे अलग-अलग तोतों में से किसी एक को चुन सकें. ये प्रयोग किया है यूनिवर्सिटी ऑफ ग्लासगो की डॉ. इलियेना हर्स्की डगलस और उनके साथियों ने.
लॉकडाउन में आया तोते के Video Call का आयडिया
डॉ. इलियेना को ये खयाल तब आया जब कोरोना के समय लॉकडाउन लगा था. लोग वीडियो कॉल करके एकदूसरे का खालीपन और बोरियत दूर कर रहे थे. ताकि कोई अकेलापन न महसूस करे. अमेरिका के घरों में 2 करोड़ से ज्यादा तोते पालतू हैं. हम सिर्फ ये पता करना चाहते थे कि क्या इन तोतों के लिए वीडियो कॉल सर्विस फायदेमंद होगी या नहीं.
1000 घंटे चला 18 पालतू तोतों पर एक्सपेरिमेंट
इंसान सिर्फ उनके सामने टैबलेट ऑन करके रखता है. उसके पसंद के दोस्तों को स्क्रीन पर बुलाता है. फिर तोता जिसकी तरफ चोंच मारता है, उसे कॉल लगा दी जाती है. इसके बाद दोनों तोते आपस में बातें करते हैं. डॉ. इलियेना ने 18 पालतू तोतों पर वीडियो कॉल का एक्सपेरिमेंट 1000 घंटे तक किया. इनके फुटेज निकाले.
अकेले रहने पर बिगड़ जाता है तोतों का व्यवहार
जंगल में तोते बड़े समूहों में रहते हैं. सामाजिक तौर पर एकदूसरे से मिलते जुलते हैं. अगर पक्षी अकेले रहने लगते हैं तब इनके अंदर मनोवैज्ञानिक दिक्कतें आने लगती हैं. वो चिल्लाने लगते हैं. तेजी से आगे-पीछे दौड़ने लगते हैं. या खुद को नुकसान पहुंचाने की आदत डाल लेते हैं. जैसे अपने पंखों को नोचना. इसे रोकने के लिए यह वीडियो कॉल प्रयोग हुआ.
पहले घंटी बजाकर मालिक को बुलाते हैं, फिर होती है कॉल
इस प्रयोग में जिन पालतू तोतों को शामिल किया गया, वो पैरट किंडरगार्टेन से लाए गए थे. यहां पर तोतों के लिए कोचिंग और एजुकेशनल प्रोग्राम चलते हैं. साथ ही तोतों को पालने वाले लोगों की भी ट्रेनिंग चलती है. सबसे पहले तोतों को घंटियां बजाना सिखाया गया. ताकि वो उसे बजाकर अपने मालिक से टैबलेट मंगवा सकें.
इसके बाद टैबलेट से अपने पसंदीदा दोस्त को चुनकर उसे वीडियो कॉल करवा सकें. इस पूरी स्टडी के दौरान इन 18 तोतों ने 147 कॉल्स लगाए या लगवाए. इस दौरान सभी तोतों के मालिकों से उनके व्यवहार में आ रहे बदलावों को नोट करने को कहा गया था. फिर स्टडी में शामिल होकर उन बदलावों को शेयर करना था.