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Modi का ड्रीम, ISRO का प्लान और चांद पर भारतीय 'कदम' ... जानिए क्या है Mission 2040 का फ्यूचर रोडमैप

PM Modi ने Chandrayaan-3 के प्रोपल्शन मॉड्यूल को धरती की ऑर्बिट में लाने पर ISRO को बधाई दी. साथ ही यह भी कहा कि इससे हमारे स्पेस स्टेशन और चांद पर भारतीयों को पहुंचाने का लक्ष्य पूरा होगा. पर असल में इसरो का प्लान क्या है? चांद की सतह पर भारतीयों को पहुंचाने का रोडमैप क्या होगा? कैसे पहुंचेंगे वहां पर?

2035 तक भारतीय स्पेस स्टेशन और उसके बाद फिर चांद पर पहुंच जाएंगे भारतीय एस्ट्रोनॉट्स. 2035 तक भारतीय स्पेस स्टेशन और उसके बाद फिर चांद पर पहुंच जाएंगे भारतीय एस्ट्रोनॉट्स.
ऋचीक मिश्रा
  • नई दिल्ली,
  • 07 दिसंबर 2023,
  • अपडेटेड 1:11 PM IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने ट्वीट करके ISRO को बधाई दी. उन्होंने लिखा... बधाई @isro. आपने तकनीकी तौर पर एक और मील का पत्थर स्थापित किया है. इससे हमारे भविष्य के स्पेस मिशन पूरे होंगे. ताकि 2040 में हम भारतीयों को चंद्रमा की सतह पर उतार सकें.  

ISRO की ये तारीफ इसलिए की गई थी क्योंकि हाल ही में उसने Chandryaan-3 के प्रोपल्शन मॉड्यूल (Propulsion Module) को चांद की ऑर्बिट से खींचकर धरती के ऑर्बिट में तैनात किया है. ऐसा पहली बार किया गया है जब किसी अन्य ग्रह पर मौजूद यान को वापस बुलाया गया हो. यानी इसरो अब भविष्य में ऐसा किसी भी मिशन में कर सकता है.  चांद पर विक्रम लैंडर की छलांग और PM को वापस बुलाना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है. 

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कुछ दिन पहले इसरो के प्रमुख S. Somanath ने चांद पर भारतीय एस्ट्रोनॉट्स को पहुंचाने का प्लान बताया. उन्होंने ISG-ISRS नेशनल सिम्पोजियम में एक प्रेजेंटेशन दिया. उन्होंने चांद पर भारतीय एस्ट्रोनॉट्स के पहुंचने का पूरा प्लान बताया. सबसे पहले हमें ह्यूमन रेटेड रॉकेट्स बनाने होंगे. जिनका इस्तेमाल फिलहाल Gaganyaan प्रोजेक्ट में किया जा रहा है. इन्हें LVM3 रॉकेट बुलाया जा रहा है. बाद में इन्हें अपग्रेड करके सेमी-क्रायो इंजन से चलाएंगे. 

पहले बनाया जाएगा भारतीय स्पेस स्टेशन

जिस तरह से प्रधानमंत्री ने इसरो की तारीफ की है, उससे लगता है कि इसरो इस बात को लेकर पूरी तरह कॉन्फीडेंट है कि वह अगले पांच साल में भारतीय स्पेस स्टेशन (Indian Space Station - ISS) का पहला यूनिट बना लेगी. 2047 तक तो चांद पर भारतीयों के कई मिशन हो चुके होंगे. लेकिन इसके पहले की चांद पर टूरिज्म हो, कई काम करने होंगे. 

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इंसानों से पहले चांद पर भेजे जाएंगे रोबोट्स

सबसे पहले जरूरी है भारतीय स्पेस स्टेशन की. उससे पहले गगनयान के फॉलो-ऑन मिशन पूरे किए जाएंगे. यानी गगनयान के जरिए भारतीय स्पेस स्टेशन तक भारतीयों को भेजा जाएगा. क्योंकि भारतीय स्पेस स्टेशन धरती और चांद के बीच एक मिड-वे का किरदार निभाएगा. इंसानों को चांद पर भेजने से पहले रोबोट्स को चांद के ऑर्बिट में भेजा जाएगा.

स्पेस स्टेशन की पहली यूनिट 2028 तक बनेगी

S. Somanath ने कहा है कि उन्होंने प्रधानमंत्री को अधिक आत्मविश्वास वाला कोई मिशन नहीं बताया है. 2040 आने में अभी 17 साल बाकी हैं. इतना समय काफी है चांद पर भारतीयों को भेजने और उससे संबंधित तकनीकों को विकसित करने के लिए. हम तेजी से भारतीय स्पेस स्टेशन के लिए काम कर रहे हैं. हम इसकी पहली यूनिट 2028 तक बना लेंगे. 

2035 तक बन जाएगा भारतीय स्पेस स्टेशन

सोमनाथ ने बताया कि हमारा स्पेस स्टेशन धरती के ऊपर 120 से 140 किलोमीटर की ऊंचाई पर चक्कर लगाएगा. इसमें सीमित समय के लिए तीन भारतीय एस्ट्रोनॉट्स रहेंगे. लेकिन ये एक प्लान है, जो समय और परिस्थितियों के अनुसार बदल सकता है. हालांकि हमारा टारगेट है कि हम 2035 तक भारतीय स्पेस स्टेशन को धरती की निचली कक्षा में स्थापित कर दें. लेकिन इस काम में हमने प्रधानमंत्री को ये भी बताया है कि इसमें एक-दो साल आगे-पीछे हो सकता है. 

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नेक्स्ट जेनरेशन लॉन्च व्हीकल बनाया जाएगा

स्पेस स्टेशन का पहला यूनिट तो इसरो के पास मौजूद हैवी रॉकेट से भेजा जा सकता है. लेकिन उसके बाद के हिस्सों को अंतरिक्ष में भेजने के लिए NGLV यानी नेक्स्ट जेनरेशन लॉन्च व्हीकल की जरूरत पड़ेगी. इसे बनाने में 2034-35 हो जाएगा. अपना स्पेस स्टेशन बनाने के लिए यह रॉकेट जरूरी है. इसरो की एक बड़ी टीम इस रॉकेट पर काम कर रही है.

तीन चरणों में भारतीय पहुंचेंगे चांद पर 

इसरो प्रमुख ने बताया कि ये सारी तकनीक हम स्वदेशी तरीके से ही बनाएंगे. देश में मौजूद कंपनियों से ही बनवाएंगे. या खुद बनाएंगे. इसके बाद 2047 में तक हम चांद पर भारतीयों को पहुंचाने के कई मिशन करेंगे. ये तीन बड़े चरणों में बंटा हुआ है. पहला फेज - 2023-28 के बीच तकनीकी बनाई जाएगी. दूसरा फेज- 2028-40 में लूनर रीच-आउट फेज और तीसरा 2040 से 47 के बीच लूनर बेस फेज. यानी तब जाकर चांद पर भारतीय बेस कैंप बनेगा. 

Chandrayaan के कई मिशन होंगे

इस बीच कई और मिशन भी होंगे. नए रॉकेट बनाए जाएंगे. ह्यूमन रेटिंग होगी. स्पेस स्टेशन बनाया जाएगा. तब तक Chandrayaan-4 और Chandryaan-5 मिशन भी हो चुके होंगे. ताकि हम भारतीयों को चांद पर भेजने से पहले चांद की स्थिति और लोकेशन की कायदे से रेकी कर सकें. वहां की जांच-पड़ताल कर सकें. Chandrayaan-6 तक चांद पर भारतीयों की बस्ती बसने लायक तकनीक पहुंचा चुके हैं. Chandrayaan-7 तक चांद पर भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर का जलवा होगा. अभी ये प्लान सरकार की तरफ से अप्रूव नहीं हुए हैं. लेकिन इसरो की प्लानिंग है. 

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