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अंतरिक्ष में मिले दो विचित्र विशालकाय तारे, वैज्ञानिकों ने नाम रखा गॉडजिला-मोथरा

दो नए, दुर्लभ और बेहद विचित्र विशालकाय तारे मिले हैं. एक का नाम है गॉडजिला. दूसरे का मोथरा. ये धरती से इतनी ज्यादा दूर हैं कि वहां से यहां तक रोशनी आने में 1040 करोड़ साल लग जाते हैं. यह अत्यधिक दुर्लभ कायजू तारों की श्रेणी के तारे है. ये तारे बेहद बड़े और ज्यादा चमकदार होते हैं.

ये है जेम्स वेब स्पेस टेलिस्कोप की वो तस्वीर जिसमें गॉडजिला-मोथरा तारा दिख रहा है. (सभी फोटोः जोश डिएगो/JWST) ये है जेम्स वेब स्पेस टेलिस्कोप की वो तस्वीर जिसमें गॉडजिला-मोथरा तारा दिख रहा है. (सभी फोटोः जोश डिएगो/JWST)
aajtak.in
  • मैड्रिड,
  • 04 अगस्त 2023,
  • अपडेटेड 7:00 PM IST

स्पेन के स्पैनिश नेशनल रिसर्च काउंसिल के एस्ट्रोफिजिसिस्ट जोश डिएगो ने अंतरिक्ष में बेहद दुर्लभ, नया, विशालकाय और विचित्र तारा खोजा है. इस तारे को मोथरा (Mothra) नाम दिया गया है. यह धरती से इतनी ज्यादा दूरी पर है कि वहां से रोशनी यहां तक आने में 1040 करोड़ साल लग जाते हैं. 

जोश डिएगो ने इस तारे को बेहद दुर्लभ कायजू तारों (Kaiju Stars) की कैटेगरी में रखा है. इस कैटेगरी में उम्मीद से कहीं ज्यादा बड़े और चमकदार तारों को रखा जाता है. इस खोज की रिपोर्ट प्रीप्रिंट पेपर arXiv में प्रकाशित किया गया है. इसके अलावा एक और तारा खोजा गया है. जो मोथरा से ज्यादा चमकदार है. उसका नाम गॉडजिला (Godzilla) है. यह अंतरिक्ष में पाया गया अब तक का सबसे चमकदार तारा है. 

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इन दोनों के बीच काफी अंतर है. यानी कायजू तारा मोथरा और गॉडजिला के बीच. लेकिन कई समानताएं भी हैं. जो ये बताती हैं कि हमारे और इन दोनों तारों के बीच डार्क मैटर का बहुत बड़ा गोला है. इन तारों को खोजने के बाद जोश डिएगो और उनकी टीम अब डार्क मैटर की स्टडी पर लग गए हैं. इससे डार्क मैटर की सच्चाई पता चलेगी. 

मोथरा को आधिकारिक तौर पर EMO J041608.8-240358 नाम से बुलाया जाता है. ये तारा जिस आकाशगंगा में है उसकी खोज जेम्स वेब स्पेस टेलिस्कोप (JWST) ने की थी. ये तारा जिस इलाके में हो वो थोड़ा सा घुमावदार है. यानी यहां पर स्पेस टाइम ही मुड़ा हुआ है. इसके बीच से निकलने वाली रोशनी खराब हो जाती है. डुप्लीकेट हो जाती है. मैग्नीफाई भी हो जाती है. 

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गॉडजिला और मोथरा दोनों जिस जगह पर हैं, वहां से हमारी धरती के बीच कई आकाशगंगाओं का समूह है. इन तारों की स्टडी के लिए वैज्ञानिकों ने हबल स्पेस टेलिस्कोप के डेटा की स्टडी की. हबल ने इस जगह की तस्वीर 2014 में छह महीने के अंतर पर दो बार ली थी. जब हबल और जेम्स वेब के डेटा को मिलाया गया तब असली तस्वीर निकल कर सामने आई. मोथरा असल में दो विशालकाय तारों का समूह है. एक लाल रंग का है. दूसरा नीले रंग का है. 

लाल तारा ठंडा और कम गर्म है. 5000 केल्विन के आसपास. इसकी रोशनी हमारे सूरज से 50 हजार गुना ज्यादा है. नीला तारा गर्म है. 14 हजार केल्विन के आसपास. ये हमारे सूरज से 1.25 लाख गुना ज्यादा चमकदार है. लेकिन हैरान करने वाला मामला है मैग्निफिकेशन यानी तारे की बढ़ाई. क्योंकि आकाशगंगाओं का समूह अकेले ये काम नहीं कर सकता. इसके लिए कम से कम चार हजार से ज्यादा वजहें होंगी. 

इससे लगता है कि ड्वार्फ गैलेक्सी में हमेशा डार्क मैटर ज्यादा होता है. ये डार्क मैटर ही है, जिससे ब्रह्मांड चिपका हुआ है. गॉडजिला और मोथरा के आसपास डॉर्क मैटर का ब्लॉब है. 
 

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