
रूस (Russia) ने एक ऐसा हथियार बना लिया है, जो असीमित रेंज तक जा सकता है. यानी कई सालों तक लगातार चल सकता है. यह एक टॉरपीडो है जो परमाणु ऊर्जा से चलता है. इसमें परमाणु हथियार लगा है. यानी दुश्मन के ठिकाने पर हमले के साथ ही यह 1640 फीट ऊंची सुनामी पैदा कर सकता है. इस टॉरपीडो को नाम दिया गया है द पोसाइडन (The Poseidon).
पोसाइडन इंटरकॉन्टीनेंटल न्यूक्लियर पावर्ड न्यूक्लियर-आर्म्ड ऑटोनॉमस टॉरपीडो है. यानी एक बार टारगेट सेट तो दाग कर भूल जाओ. यह अपने आप टारगेट का पीछा अनंत समय तक करता रहेगा. रूस ने शुरुआत में इस टॉरपीडो के प्रोजेक्ट का कोड स्टेटस-6 (Status-6) रखा था. इसे ओशिएनिक मल्टीपरपज सिस्टम नाम दिया गया था. इस टॉरपीडो का वजन 100 मीट्रिक टन है. यह करीब 65.6 फीट लंबी है. इसका व्यास 2 मीटर है.
माना जा रहा है कि यह जब विस्फोट करेगी तो इसमें मौजूद परमाणु हथियार से 100 मीट्रिक टन की ताकत का विस्फोट होगा. जो कि किसी भी शहर को तबाह करने के लिए काफी है. अधिकतम 3280 फीट की गहराई में जा सकती है. इसकी अधिकतम गति 185 किलोमीटर प्रतिघंटा है. इसका गाइडेंस सिस्टम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सैटेलाइट कंट्रोल से चलता है. इसे दागने के लिए पनडुब्बी की जरुरत होती है.
पोसाइडन को टॉरपीडो कह रहे हैं लेकिन असल में यह एक रोबोटिक मिनी-सबमरीन है, जो खुद से दुश्मन तक जा सकती है. फिलहाल इसकी रेंज 10 हजार किलोमीटर बताई जा रही है, लेकिन परमाणु ऊर्जा की वजह से ये लंबे समय तक समुद्र में चल सकता है. इस सबमरीन में साइलेंट रनिंग मोड भी है. यानी दुश्मन के राडार पर इसे पकड़ना मुश्किल है. इसके अंदर सोवियत संघ के समय का तसार बोंबा परमाणु बम से छोटा बम लगाया जा सकता है.
पोसाइडन टॉरपीडो को टाइटेनियम एलॉय से बनाया गया है. यानी ये बेहद मजबूत है. दूसरा इसके अंदर स्टेल्थ टेक्नोलॉजी है. यानी दुश्मन का राडार और एकॉस्टिक ट्रैकिंग डिवाइस भी इसे पकड़ नहीं पाएगा. इसमें ऐसी तकनीक लगाई गई है, जिससे दुश्मन को लगेगा कि कोई सिविलियन जहाज आ रहा है. इसी धोखे में वह मारा जाएगा. इसकी गति कम है इसलिए भी इसके आने का पता दुश्मन को नहीं चलेगा. यह टारगेट से 2 या 3 किलोमीटर पहले अपनी गति बढ़ाएगा. लेकिन तब तक दुश्मन को बचने के मौका नहीं मिलेगा. काफी देर हो चुकी होगी.
असल में यह रूस का एक तरह से समुद्री ड्रोन है. जो स्टेल्थ है. मजबूत है. सबसे खतरनाक है. यह अगर दाग दिया गया तो दुश्मन के बंदरगाह, जहाजों की फ्लीट या शहर की बर्बादी तय है. रूस की नौसेना ऐसे 30 से ज्यादा टॉरपीडो बनाने की सोच रहा है. पहला बैच बना लिया गया है. लेकिन इसमें कितने टॉरपीडो हैं, इसकी जानकारी किसी को नहीं है. माना जा रहा है कि रूस इसे ऑस्कर क्लास और खबारोवस्क पनडुब्बियों में तैनात करेगा.