
रूस और यूक्रेन के बीच जंग (Russia Ukraine war) जारी है. युद्ध का आज 67वां दिन है. लेकिन दोनों ही देश हार मानने को तैयार नहीं हैं. इसी बीच सैटेलाइट से जो तस्वीरों सामने आई हैं, उनसे रूस (Russia) के पुख्ता इंतज़ामों का पता चलता है. क्रीमिया में काले सागर (Black Sea) में नौसैनिक अड्डे को अंडर वॉटर अटैक से बचाने के लिए, रूस ने सैन्य-प्रशिक्षित डॉल्फ़िन (Military-Trained Dolphins) को तैनात किया है.
ये तस्वीरें अमेरिकी सैटेलाइट कंपनी मैक्सार (Maxar) ने ली हैं और इनका विश्लेषण यूएस नेवल इंस्टीट्यूट (U.S. Naval Institute) ने किया है. तस्वीरों से पता चलता है कि फरवरी में यूक्रेन पर रूस के आक्रमण की शुरुआत के आसपास सेवस्तोपोल बंदरगाह (Sevastopol harbor) के प्रवेश द्वार पर दो डॉल्फ़िन तैनात की गई थीं.
क्रीमिया के दक्षिणी सिरे पर स्थित यह बंदरगाह, एक मुख्य पोर्ट है. साथ ही, रूस के लिए काफी सैन्य महत्व रखता है. हालांकि, यहां मौजूद कई रूसी जहाज यूक्रेन की मिसाइल रेंज से सुरक्षित तौर पर बाहर हैं, फिर भी पानी के अंदर उन पर हमला किया जा सकता है. ऐसे में प्रशिक्षित बॉटलनोज़ डॉल्फ़िन (Tursiops truncatus) उनकी रक्षा में अहम भूमिका निभाती हैं.
रूस ने ऐसा पहली बार नहीं किया है. 1960 के दशक से रूस समुद्री जानवरों को सैन्य प्रशिक्षण दे रहा है और उन्हें तैनात कर रहा है. शीत युद्ध (Cold War) के दौरान, अमेरिका और सोवियत संघ दोनों ने सैन्य समुद्री स्तनपायी कार्यक्रम (marine mammal programs) बनाए थे. अमेरिका ने डॉल्फ़िन और कैलिफ़ोर्निया समुद्री शेरों (Californian sea lions) यानी सील का इस्तेमाल किया था. जबकि, USSR ने आर्कटिक के इलाकों में डॉल्फिन, बेलुगा व्हेल और सील को तैनात किया था.
डॉल्फ़िन हाई पिच सीटी की आवाज़ के ज़रिए कम्यूनिकेट कर सकती हैं. साथ ही, वे ऑब्जेक्ट्स को सेंस कर लेती हैं और इकोलोकेशन (echolocation) के माध्यम से दूरी का भी पता लगा लेती हैं. इकोलोकेशन में हाई फ्रीक्वेंसी क्लिक भेजे जाते हैं जो ऑब्जेक्ट्स को वापस उछाल देते हैं. इससे डॉल्फ़िन से उनकी दूरी का पता कर लेती है. खास तौर पर प्रशिक्षित की गई डॉल्फ़िन इस प्राकृतिक सोनार (sonar)के इस्तेमाल से मेवल माइंस या दुश्मन गोताखोरों का पता लगाने और उनका ध्यान आकर्षित करने के लिए करती हैं. रूस यह भी दावा करता है कि वह डॉल्फ़िन की 'पता लगाने की क्षमता'( detecting abilities) का इस्तेमाल करने के लिए नए तरीके खोज रहा है.
Military marine mammal programs काफी महंगे होते हैं. हकाई मैगज़ीन (Hakai Magazine) के मुताबिक, 2012 से 2019 के बीच, अमेरिकी नौसेना ने सैन्य डॉल्फ़िन के रखरखाव पर करीब 7.5 करोड़ डॉलर खर्च किए थे. हालांकि, यह सार्वजनिक तौर पर पता नहीं चला है कि रूस अपने समुद्री स्तनपायी कार्यक्रमों पर कितना खर्च करता है.
यह पहली बार नहीं है जब रूस के समुद्री सैनिकों को देखा गया है. फोर्ब्स (Forbes) के मुताबिक, 2018 में सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला था कि रूस ने सीरिया के युद्ध के दौरान, सीरिया के टार्टस में एक बेस पर डॉल्फ़िन तैनात की थी. एक साल बाद, नॉर्वे के मछुआरों ने बताया कि एक पालतू बेलुगा व्हेल उनकी नावों को परेशान कर रही थी. व्हेल ने एक पट्टा पहना हुआ था जिसपर लिखा था'- सेंट पीटर्सबर्ग के उपकरण'(Equipment of St. Petersburg).
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