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पहली बार... धरती के अंदर से निकाली गई एक किलोमीटर लंबी चट्टान, ये जानना चाहते हैं वैज्ञानिक

वैज्ञानिकों ने धरती के समुद्र तल के नीचे मौजूद एक पहाड़ में ड्रिलिंग करके एक किलोमीटर लंबा पत्थर निकाला है. इसके जरिए वह धरती के इतिहास को जानना चाहते हैं. साथ ही ज्वालामुखीय गतिविधियों, ग्रैविटी और चुंबकीय शक्तियों का अध्ययन करना चाहते हैं.

ये है उस पत्थर से निकाले गए स्लैब, जिन्हें एक लाइन में लगाकर रखा गया है. (फोटोः लेस्ले एंडरसन/आईओडीपी) ये है उस पत्थर से निकाले गए स्लैब, जिन्हें एक लाइन में लगाकर रखा गया है. (फोटोः लेस्ले एंडरसन/आईओडीपी)
aajtak.in
  • लैंग्ले,
  • 10 जून 2023,
  • अपडेटेड 2:05 PM IST

धरती के अंदर क्या है? यह एक बड़ा रहस्य है. इसका खुलासा करने के लिए वैज्ञानिक नए-नए प्रयोग करते रहते हैं. ऐसे ही एक हैरान करने वाले प्रयोग के दौरान वैज्ञानिकों ने अटलांटिक महासागर में मौजूद अटलांटिस मैफिस पहाड़ में छेद किया. छेद भी एक किलोमीटर गहरा. इस प्रोजेक्ट को अंजाम दिया है JOIDES रेजोल्यूशन साइंटिफिक ड्रिलिंग वेसल ने. 

ये पत्थर धरती की दूसरी परत मैंटल से निकाली गई है. वैज्ञानिकों ने अटलांटिक महासागर के अंदर मौजूद अटलांटिस मैफिस पहाड़ के ऊपर ड्रिलिंग वेसल तैनात किया. उसके बाद पहाड़ की नोक से उसके अंदर ड्रिलिंग करना शुरू किया. यह पहाड़ मिड-अटलांटिक रिज पर है. ड्रिलिंग करीब 4156 फीट तक की गई.

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यह धरती के अंदर किया गया सबसे गहरा छेद नहीं है. लेकिन यह भूगर्भीय जानकारी हासिल करने के लिए जरूरी है. क्योंकि मैंटल से किसी पत्थर को निकालना बेहद कठिन काम है. अटलांटिस मैफिस पहाड़ मैंटल के पत्थरों से बना है. इसलिए वहां तक जाना और उसपर खुदाई करना आसान था. 

इस चट्टान का नाम है पेरिडोटाइट. वैज्ञानिकों का कहना हैं. कि यह एक बहुत बडी खोज हैं. जिससे हमें कई ऐतिहासिक गतिविधियों का पता लग सकता हैं. कुछ शोधकर्ताओं का यह मानना हैं कि आने वाली कई पीढ़ियों के लिए यह अविश्वसनीय रूप से महत्वपूर्ण डेटा देता रहेगा. वैज्ञानिक इसके जरिए धरती की कई चीजों का अध्ययन करना चाहते हैं. जैसे- चुंबकीय शक्ति, ग्रैविटी, टेक्टोनिक फ्लो, ज्वालामुखी आदि.

वैज्ञानिक कहते आए थे कि अगर वो पृथ्वी के निचले हिस्से से चट्टान निकाल पाएं तो धरती के आकार, गुण और ठहराव का पता आसानी से चल सकता है. इससे हम भूकंपों के आने की वजह पता कर सकते हैं. अलग-अलग परतों की जानकारी हासिल कर सकते हैं. यह धरती के विज्ञान और पृथ्वी के अलग-अलग भागों को समझने में मदद करेगा.

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समुद्री भागों से निकाली गई चट्टानों की स्टडी से भूवैज्ञानिक घटनाओं को भी समझ सकते हैं. चट्टानों में छिपे धातुओं और खनिजों का भी इससे पता लगा सकते है. पृथ्वी के मैंटल से निकाले गए पेरिडोटाइट चट्टान के एक किलोमीटर का सिर्फ एक छोटा सा हिस्सा मिला है. 

इस चट्टान में ओलिविन मिला है. जिसकी वजह से हाइड्रोजन चट्टानों के अंदर भरा-पड़ा होता है. इनकी बदौलत माइक्रोबियल जीवन को बढ़ावा मिलता है. यानी सूक्ष्मजीवन को. 

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