
जब तक आप अपने दोस्तों, रिश्तेदारों और पड़ोसियों से घिरे रहते हैं, जीवन में आनंद रहता है. फिर अचानक आप अकेले हो जाते हैं. वजह कुछ भी हो सकती है. ऐसा ही हुआ अंतरिक्ष में दूर मौजूद एक आकाशगंगा के साथ. पहले उसके आसपास बहुत सी चीजें थीं. लेकिन अब वह एकदम अकेली है. वजह वो आकाशगंगा खुद है. क्योंकि उसने अपने आसपास मौजूद कई सारी वस्तुओं को खा लिया. सबके अपने अंदर समा लिया.
असल में यह घटना 920 करोड़ साल पहले घटी थी. अब जाकर वैज्ञानिकों ने यह पहेली सुलझाई है. ये घटना तब की है जब हमारा ब्रह्मांड बन रहा था. अपने दोस्तों और आसपास के पड़ोसियों को खाने वाले इस गैलेक्सी का नाम है 3C 297. अब यह आकाशगंगा रहस्यमयी तरीके से एकदम अकेली है. वैज्ञानिक कहते हैं इसने करीब 100 आकाशगंगाओं को खाया होगा.
इटली स्थित टोरिनो यूनिवर्सिटी की एस्ट्रोनॉमर वैलेंशिया मिसाग्लिया ने बताया कि आकाशगंगाएं आमतौर पर गुच्छों में होती हैं. लेकिन यह आकाशगंगा एकदम अकेली है. इसके आसपास कुछ भी नहीं है. हमें उम्मीद थी कि हम इस आकाशगंगा के इलाके में कम से कम एक दर्जन गैलेक्सी देखेंगे लेकिन हमें कुछ नहीं मिला. इसकी जांच हमने चंद्रा एक्स-रे ऑब्जरवेटरी से की थी.
3C 297 एक बहुत ही ताकतवर गैलेक्सी है. इसमें से बहुत तेज रेडिएशन निकल रहा है. साथ ही इसके अंदर एक विशालकाय ब्लैक होल मौजूद है. जो अभी क्वासार (Quasar) के रूप में है. इसके रास्ते में और इसके आसपास जो भी चीजें मौजूद हैं, उसे खाता जा रहा है. उन्हें जला दे रहा है. कुछ भी नहीं छोड़ रहा. अपना आकार बढ़ाता जा रहा है. लेकिन अंतरिक्ष के उस इलाके में वह एकदम अकेला बचा है. सिर्फ अपनी भूख की वजह से.
इसके ब्लैक होल के ध्रुवीय इलाके से प्लाज्मा की तेज लहर निकल रही है. जो प्रकाश की गति के बराबर ही निकल रही है. इसकी वजह से आसपास के इलाके में वैक्यूम बन गया है. ब्लैक होल के चारों तरफ कई तरह की गैसें और वस्तुएं घूम रही हैं. क्योंकि ब्लैक होल के चारों तरफ तेज मैग्नेटिक फील्ड है.
इस गैलेक्सी से जो जेट्स निकल रही हैं, उनकी लंबाई 1.40 लाख प्रकाश वर्ष है. ये जेट्स गर्म गैस से टकराती हैं तो एक्स-रे निकालती है. चंद्रा एक्स-रे के डेटा से पता चलता है कि इस आकाशगंगा के चारों तरफ बहुत ज्यादा मात्रा में गर्म गैस मौजूद है. इन सभी से पता चलता है कि 3C 297 के आसपास बहुत तेज गुरुत्वाकर्षण शक्ति है जो इसे आसपास की चीजों को खींच ले रहा है.
दो डायमेंशन में 3C 297 के आसपास 19 गैलेक्सी हैं. लेकिन उनकी दूरी बहुत ज्यादा है. ये ऐसी दिशाओं में हैं कि इन्हें खाना आसान नहीं है. इसलिए यह आकाशगंगा अकेली है. इस आकाशगंगा की स्टडी से पता चलता है कि अंतरिक्ष में आकाशगंगाएं प्राचीन गैलेक्सियों का एक जीवाश्म समूह भी बना सकती हैं. यानी प्राचीन आकाशगंगाओं की अवशेष ही देखने को मिल सकते हैं. यह स्टडी हाल ही में द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल में प्रकाशित हुई है.