
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) 30 दिंसबर 2024 की रात 9 बजकर 58 मिनट पर स्पेडेक्स मिशन की लॉन्चिंग करेगा. इसमें इस सैटेलाइट के अलावा 23 और एक्सपेरिमेंट अंतरिक्ष में भेजे जा रहे हैं. लॉन्चिंग सतीश धवन स्पेस सेंटर के पहले लॉन्च पैड से PSLV-C60 रॉकेट के जरिए होगी. जो इस रॉकेट की 99 उड़ान है.
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देखिए MST तक रॉकेट पहुंचने का वीडियो
POEM-4 क्या है?
PS4-Orbital Experiment Module को पोयम (POEM) कहा जा रहा है. ये असल में पोलर सिंक्रोनस लॉन्च व्हीकल यानी PSLV का चौथा स्टेज है. जो कि स्पेडेक्स सैटेलाइट की ठीक नीचे रहेगा. इस जरिए वैज्ञानिक अंतरिक्ष में कुछ माइक्रोग्रैविटी प्रयोग कर सकते हैं. ये प्रयोग करीब तीन महीने तक चल सकते हैं. POEM में कुल मिलाकर 24 पेलोड्स जा रहे हैं. जिसमें से 14 पेलोड्स इसरो और डिपार्टमेंट ऑफ साइंस के हैं. बाकी के 10 गैर-सरकारी संस्थाओं जैसे कॉलेज, स्टार्टअप्स आदि के हैं.
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इसरो के 14 पेलोड्स का मतलब क्या है?
विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर (VSSC) के 5 पेलोड.
स्पेस फिजिक्स लेबोरेटरी (SPL) के 4 पेलोड.
इसरो इनर्शियल सिस्टम्स यूनिट (IISU) के 3 पेलोड.
SPL और IISU के अलग से एक-एक पेलोड.
अंतरिक्ष में कचरा पकड़ने वाला मिशन जा रहा साथ में
स्पेडेक्स के साथ IISU का वॉकिंग रोबोटिक आर्म (RRM-TD: Walking Robotic Arm) भी जा रहा है. ये कीड़ें की तरह अंतरिक्ष में चलकर दिखाएगा. इसके साथ VSSC का डेबरी कैप्चर रोबोटिक मैनीपुलेटर (Debris Capture Robotic Manipulator) जा रहा है. जो स्पेस में कचरा पकड़ने का काम करेगा.
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इसके अलावा कई ऐसे एक्सपेरिमेंट होने वाले हैं, जो इसरो को भविष्य में मानव और अन्य मिशन में मदद करेंगे. ये हैं- रिएक्शन व्हील असेंबली, मल्टी सेंसर इनर्शियल रेफरेंस सिस्टम, लीड एक्जेम्ट एक्सपेरिमेंटल सिस्टम, एमईएमएस-बेस्ड रेट सेंटर, पेलोड कॉमन ऑनबोर्ड कंप्यूटर, इलेक्ट्रॉन टेंपरेचर एनालाइजर, इलेक्ट्रॉन डेन्सिटी एंड न्यूट्रल विंड, लैंगमुइर प्रोब, PLASDEM, लेजर फायरिंग यूनिट, लेजर इनिशिएशन पाइरो यूनिट, कॉम्पैक्ट रिसर्च मॉड्यूल्स फॉर ऑर्बिटल प्लांट स्टडीज (CROPS) और पायलट-जी2 (ग्रेस).
10 पेलोड्स शिक्षण संस्थानों और स्टार्टअप्स के के जा रहे हैं
Amity University मुंबई की ओर से एमिटी प्लांट एक्सपेरिमेंटल मॉड्यूल इन स्पेस (APEMS) भेजा जा रहा है. ये पौधे पर ग्रैविटी के असर की स्टडी करेगा. SJC Institute of Technology कर्नाटक की तरफ से बीजीएस अर्पित यानी एमेच्योर रेडियो पेलोड फॉर इन्फॉर्मेशन ट्रांसमिशन जा रहा है. ये ऑडियो, टेक्स्ट, इमेज मैसेज को सैटेलाइट से धरती पर भेजने का एक्सपेरिमेंट है.
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बेंगलुरू के RV College of Engineering की तरफ से RVSat-1 पेलोड जा रहा है. ये माइक्रोगैविटी की स्टडी करेगा. बेलाट्रिक्स एयरोस्पेस बेंगलुरू की तरफ से बनाया गया ग्रीन प्रोपल्शन रुद्र 1.0 एचपीजीपी पेलोड अंतरिक्ष में ग्रीन प्रोप्ल्शन सिस्टम की जांच करेगा. यानी अंतरिक्ष में प्रदूषण कम करने की तैयारी है. ग्रीन प्रोपल्शन थ्रस्टर- व्योम-2यू जिसे मनास्तु स्पेस टेक्नोलॉजी मुंबई ने बनाया है. इसमें हाइड्रोजन परॉक्साइड आधारित थ्रस्टर की टेस्टिंग की जाएगी.
बेंगलुरू के गैलेक्सआई स्पेस सॉल्यूशंश की तरफ से SAR इमेजिंग डेमॉन्सट्रेशन पेलोड जा रहा है. अहमदाबाद के पीयरसाइट स्पेस की तरफ से वरुणा, आंध प्रदेश के एनस्पेस टेक की तरफ से स्वेचसैट, एमआईटी ड्ब्लूपीयू पुणे की तरफ से STeRG-P1.0 पेलोड और हैदराबाद के टेकमी2स्पेस की तरफ से MOI-TD पेलोड जा रहा है, जो स्पेस में एक एआई लैब होगा.
सामने से देखनी है लॉन्चिंग तो यहां से कर सकते हैं रजिस्ट्रेशन?
ISRO ने लाइव रॉकेट लॉन्च देखने के लिए रजिस्ट्रेशन लिंक खोल दिया है. सामने से लॉन्च देखने के लिए आपको चेन्नई जाना होगा. फिर वहां से श्रीहरिकोटा. आप यहां दिए इस लिंक पर क्लिक करके रजिस्टेशन कर सकते हैं.
https://lvg.shar.gov.in/VSCREGISTRATION/index.jsp
क्या है SpaDeX मिशन?
इस मिशन में दो सैटेलाइट हैं. पहला चेसर दूसरा टारगेट. चेसर सैटेलाइट टारगेट को पकड़ेगा. उससे डॉकिंग करेगा. इसके अलावा इसमें एक महत्वपूर्ण टेस्ट और हो सकता है. सैटेलाइट से एक रोबोटिक आर्म निकले जो हुक के जरिए यानी टेथर्ड तरीके से टारगेट को अपनी ओर खींचे. ये टारगेट अलग क्यूबसैट हो सकता है.
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इस प्रयोग से फ्यूचर में इसरो ऑर्बिट छोड़ अलग दिशा में जा रहे हिस्से को वापस कक्षा में लाने की तकनीक मिल जाएगी. साथ ही ऑर्बिट में सर्विसिंग और रीफ्यूलिंग का ऑप्शन भी खुल जाएगा. स्पेडेक्स मिशन में दो अलग-अलग स्पेसक्राफ्ट को अंतरिक्ष में जोड़कर दिखाया जाएगा. चंद्रयान-4 के लिए अंतरिक्ष में डॉकिंग बहुत जरूरी तकनीक है. डॉकिंग मतलब जो अलग-अलग हिस्सों को एकदूसरे की तरफ लाकर उसे जोड़ना.
अंतरिक्ष में दो अलग-अलग चीजों को जोड़ने की ये तकनीक ही भारत को अपना स्पेस स्टेशन बनाने में मदद करेगी. साथ ही चंद्रयान-4 प्रोजेक्ट में भी हेल्प करेगी. स्पेडेक्स यानी एक ही सैटेलाइट के दो हिस्से होंगे. इन्हें एक ही रॉकेट में रखकर लॉन्च किया जाएगा. अंतरिक्ष में ये दोनों अलग-अलग जगहों पर छोड़े जाएंगे.