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जिस स्टारलाइनर कैप्सूल से सुनीता विलियम्स गई थीं स्पेस स्टेशन, उसी की सीट उखाड़ी... जानिए वजह

बोईंग कंपनी के जिस स्टारलाइनर ने सुनीता विलियम्स को इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर अटकाया. उसकी सीट सुनीता ने उखाड़ दी. इस काम में उनका साथ बुच विलमोर ने भी दिया. असल में यह कैप्सूल 6 सितंबर की देर रात करीब सवा तीन बजे स्पेस स्टेशन से अलग होगा. 7 सितंबर की सुबह करीब 10 बजे धरती पर लैंड करेगा.

अंतरिक्ष यात्री बुच विल्मोर और सुनीता विलियम्स बोईंग के स्टारलाइनर कैप्सूल की जांच कर रहे हैं. (फोटोः एपी) अंतरिक्ष यात्री बुच विल्मोर और सुनीता विलियम्स बोईंग के स्टारलाइनर कैप्सूल की जांच कर रहे हैं. (फोटोः एपी)
आजतक साइंस डेस्क
  • नई दिल्ली,
  • 05 सितंबर 2024,
  • अपडेटेड 4:35 PM IST

जिस स्टारलाइनर कैप्सूल से भारतवंशी अमेरिकी एस्ट्रोनॉट सुनीता विलियम्स इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन गईं थीं. उन्होंने उसकी सीट ही उखाड़ दी. उनके इस काम में बुच विलमोर ने मदद की. दोनों ही 5 जून से स्पेस स्टेशन पर अटके हुए हैं.  बोईंग कंपनी का स्टारलाइनर स्पेसक्राफ्ट कल यानी 6 सितंबर को स्पेस स्टेशन से अलग होगा. 

यह काम 6 सितंबर की देर रात करीब सवा तीन बजे किया जाएगा. करीब सात घंटे की यात्रा करने के बाद वह कैप्सूल 7 सितंबर की सुबह करीब 10 बजे धरती पर लैंड करेगा. लैंडिंग न्यू मेक्सिको के व्हाइट सैंड्स स्पेस हार्बर में कराई जाएगी. यह स्पेसक्राफ्ट अब बिना किसी यात्री के आएगा. यानी इसमें एस्ट्रोनॉट नहीं होंगे. 

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नासा अपने सोशल मीडिया हैंडल्स और वेबसाइट पर इसका लाइव प्रसारण भी करेगा. स्टारलाइनर को अब नीचे भेजने से पहले उसकी सीट इसलिए उखाड़ी गई है क्योंकि उसमें अब इंसान नहीं लौट रहा है. तो खाली क्यों भेजा जाए. इस स्पेसक्राफ्ट में स्पेस स्टेशन से निकाला गया कचरा वापस आएगा. यानी अब यह यात्री कैप्सूल नहीं बल्कि कार्गो कैप्सूल बनकर जमीन पर लौटेगा. 

क्या कर रहे हैं इस समय सुनीता और बुच? 

वेटरन एस्ट्रोनॉट सुनीता और बुच इस समय स्टारलाइनर की फालतू चीजों को हटाकर उसमें जगह बना रहे हैं. ताकि ज्यादा से ज्यादा सामान उसमें वापस धरती भेजा जा सके. दोनों ने बड़ी सावधानी और बारीकी से स्टारलाइनर की सीटों को हटाया. इसके बाद पूरे कैप्सूल का फोटोग्राफिक सर्वे किया. केबिन का अच्छे से इंस्पेक्शन किया. ताकि स्पेस स्टेशन को छोड़ते समय किसी तरह की दिक्कत न हो. 

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क्यों कराया गया सुनीता-बुच से ये काम? 

असल में 8 दिन की यात्रा पर गए सुनीता-बुच वहां तीन महीने से स्पेस स्टेशन में हैं. ऐसे में कई तरह की शारीरिक दिक्कतें आती है. उन दिक्कतों की जांच एस्ट्रोनॉट के काम के दौरान हो जाती है. इसलिए ह्यूस्टन यानी धरती पर मौजूद स्पेस स्टेशन के हेडक्वार्टर से सुनीता और बुच को स्टारलाइनर में कुछ काम करने को कहा गया. 

जिसमें सीट हटाना. इंस्पेक्शन करना. उसकी लैंडिंग की तैयारी करना. बारीकी से चीजों को देखना. आई चार्ट को पढ़ना. इससे जमीन पर बैठे डॉक्टर उनकी शारीरिक क्षमता का आकलन करते हैं. ताकि यह पता चल सके कि दोनों के शरीर में कितनी ताकत है. वो ठीक हैं या नहीं. शरीर पर क्या असर पड़ रहा है.  

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स्टारलाइनर को खाली भेजने का फैसला क्यों? 

NASA वैज्ञानिकों और प्रशासन के दिमाग में पहले हो चुके दो हादसों से डरे हैं. जिसकी वजह से स्टारलाइनर को खाली लैंड कराने का फैसला लिया गया. ये हादसे हैं- चैलेंजर और कोंलबिया स्पेस शटल हादसा. इन हादसों से नासा एडमिनिस्ट्रेशटर बिल नेल्सन इतने प्रभावित हैं कि उन्होंने स्टारलाइनर को खाली लैंड कराने का फैसला किया. कोलंबिया स्पेस शटल हादसा 1 फरवरी 2003 को हुआ था. चैलेंजर हादसा जनवरी 1986 में हुआ था. दोनों ही हादसों में कुल मिलाकर नासा के 14 एस्ट्रोनॉट्स मारे गए थे. जिसमें भारतवंशी कल्पना चावला भी थीं. 

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