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चूहों की वो प्रजाति... जिसके नर 2-3 हफ्ते लगातार संबंध बनाकर देते हैं जान, शव खा जाती है मादा

नर की कुर्बानी... ऑस्ट्रेलिया में चूहों की ऐसी प्रजाति है, जिसमें नर एक बार में लंबे समय तक मादा से संबंध बनाता है. इसके बाद उसकी इस प्रक्रिया में जान चली जाती है. बचता है उसका मृत शरीर, जिसे अंत में उससे संबंध बनाने वाली मादा खा जाती है.

ये है ऑस्ट्रेलिया में पाई जाने वाली आंटेजिनस जीनस की एक प्रजाति का नर चूहा. (सभी फोटोः गेटी) ये है ऑस्ट्रेलिया में पाई जाने वाली आंटेजिनस जीनस की एक प्रजाति का नर चूहा. (सभी फोटोः गेटी)
आजतक साइंस डेस्क
  • नई दिल्ली,
  • 23 सितंबर 2024,
  • अपडेटेड 11:17 AM IST

छोटे मार्सूपियल्स यानी बेहद छोटे चूहों का एक जीनस है आंटेचिनस (Antechinus). ये ऑस्ट्रेलिया में पाई जाती है. इस जीनस में आने वाली सभी प्रजाति के चूहों की किस्मत खराब है. खासतौर से नर की. ये सिर्फ एक ही काम के लिए पैदा होते हैं. मादा को गर्भवती करने के लिए. ये काम पूरा करते-करते इनकी जान चली जाती है. 

इसके बाद इनके मृत शरीर को संबंध बनाने वाली मादा खा जाती है. ताकि उसे भविष्य में बच्चे पैदा करने के लिए ऊर्जा मिल सके. ये चूहे आमतौर पर कीड़ें, मकौड़े, सेंटीपीड्स और कभी-कभी छोटे मेंढक या सरिसृपों को खाते हैं. आंटेचिनस में जितनी भी प्रजातियों के नर चूहे हैं. उनकी खासियत सिर्फ इतनी है कि वो मादा के साथ एकबार में लंबे समय तक संबंध बनाएंगे. उसके बाद शरीर के अंगों के फेल होने की वजह से मर जाएंगे.  

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15 प्रजातियों चूहों के साथ यही हालात, 2-3 हफ्ते लगातार बनाते हैं संबंध

आंटेचिनस में चूहों की 15 प्रजातियां ऐसी हैं, जिसमें सभी नरों के साथ यही अंजाम होता है. अगर जीना है तो संबंध मत  बनाओ. और ऐसा होता नहीं. नर और मादा एक बार में लगातार दो से तीन हफ्ते तक संबंध बनाते हैं. इस दौरान नर अपनी नींद छोड़ देता है. वो अधिकतम समय और ऊर्जा संबंध बनाने में देता है. दिन में करीब 14 घंटे. 

सिर्फ इस उम्मीद में की मादा से पैदा होने वाले बच्चे में उसके जीन्स जाएंगे. लेकिन संबंध बनाने का यह लंबा समय मौत के साथ खत्म होता है. नर थकान और तनाव की वजह से मारा जाता है. टेस्टोस्टेरॉन और कॉर्टीसॉल का स्तर बहुत ज्यादा ऊपर होता है. टेस्टोस्टेरॉन कॉर्टीसोल को काम करने से रोकता है. ऐसे में अंग फेल हो जाते हैं. 

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नपुंसकता और मौत के बीच छोटा विंडो, जिसमें बनाना होता है संबंध

क्वींसलैंड यूनिवर्सिटी की स्तनधारी जीवों की इकोलॉजिस्ट डायना फिशर कहती हैं कुछ चूहे बच जाते हैं. लेकिन ये मामला बेहद दुर्लभ है. ऐसे मामलों में नर स्पर्म बनाना बंद कर देते हैं. उनके अंग से उनके टेस्टेस अलग हो जाते हैं. फिर वो संबंध बनाने का विचार छोड़ देते हैं. इसलिए वो बच जाते हैं. लेकिन इसके बाद वो कभी रिप्रोडक्शन नहीं कर पाते. 

असल में इन चूहों के साथ एक दिक्कत है. इनके स्पर्म एपिडिडिमिस नामक अंग में छिपे होते हैं. जो लगातार पेशाब के साथ बाहर निकलते रहते हैं. इसलिए नर के पास बहुत कम विंडो होता है कि वो नपुंसक बनने और मरने से पहले किसी मादा से संबंध बनाकर उसे गर्भवती कर सके. ताकि इनकी प्रजाति आगे बढ़ सके. 

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