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बर्फ कमल... कैसे बनता है ये फूल, जानिए क्या होते हैं Frost Flowers?

यहां दिख रही तस्वीर में आपको कमल जैसे फूल दिख रहे हैं. ये कमल नहीं बल्कि 'बर्फ कमल' हैं. ये आर्कटिक सागर में उगते हैं. वो खास दिनों के दौरान जब तापमान बेहद उपयुक्त होता है. आइए जानते हैं कि ये फूल कैसे बनते हैं. इनके पीछे का साइंस क्या है?

ये है बर्फ कमल, जो बेहद दुर्लभ होते हैं. सिर्फ आर्कटिक सागर और उसके आसपास के इलाकों में दिखते हैं. ये है बर्फ कमल, जो बेहद दुर्लभ होते हैं. सिर्फ आर्कटिक सागर और उसके आसपास के इलाकों में दिखते हैं.
आजतक साइंस डेस्क
  • अलास्का,
  • 22 जनवरी 2024,
  • अपडेटेड 5:01 PM IST

बर्फ कमल (Barfa Kamal) यह कोई शब्द नहीं है. लेकिन अगर कोई फूल कमल की तरह दिख रहा हो और वह बर्फ से बना हो तो उसे क्या कहेंगे? शायद बर्फ कमल ही.  असल में इन फूलों को फ्रॉस्ट फ्लावर (Frost Flower), आइस फ्लावर (Ice Flower) या सी-आइस (Sea Ice) कहते हैं. ये फूल हर जगह नहीं उगते. दुर्लभ होते हैं. 

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आमतौर पर ये फूल 3 से 4 सेंटीमीटर व्यास के होते हैं. ये गुच्छों में उगते हैं. कई बार पानी की सतह पर. कई बार गीली जमीन पर. कई बार ठंडे समुद्री किनारों के पास. ये असल में पतले-पतले बर्फ की परतें होती हैं, जो बेहद कम तापमान में बनती है. खासतौर से आर्कटिक सागर (Arctic Ocean) और उसके आसपास के इलाकों में. 

फ्रॉस्ट फ्लावर के कई रूप होते हैं- नीडल आइस (Needle Ice), फ्रॉस्ट पिलर्स (Frost Pillars), आइस रिबन्स (Ice Ribbons), रैबिट फ्रॉस्ट (Rabbit Frost) या रैबिट आइस (Rabbit Ice). जब बर्फ की पतली परतें हवा के दबाव में घूमकर फूलों जैसा रूप ले लेती हैं, तब उन्हें फ्रॉस्ट फ्लावर कहते हैं. ये आसानी से देखने को नहीं मिलते. 

ऐसे बनते हैं फ्रॉस्ट फ्लावर

इनके बनने प्रक्रिया तब शुरू होती है जब जमीन नहीं जमी होती लेकिन उसके ऊपर की हवा जम रही होती है. पानी जम रहा होता है. भाप या कोहरा जमने लगता है. इससे लंबे-लंबे और चौड़े-चौड़े बर्फ की पतली परतें जमने लगती हैं. ये ठंडी हवा के साथ फ्रीज हो जाते हैं. ऊपर से आने वाली भाप, नमी या कोहरा नई पत्तियां बनाता जाता है. फूल खिलता जाता है. 

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तापमान माइनस 8 डिग्री के नीचे हो

ये बर्फ कमल या बर्फ के फूल बेहद ठंडी जगहों पर सिर्फ सुबह या शाम के वक्त ही दिखते हैं. दिन में तापमान बढ़ने पर यह जल्दी ही पिघल जाते हैं. या गायब हो जाते हैं. जैसे ही रात आती है. मौसम सही रहता है तो ये फिर बनने लगते हैं. खासतौर से छाया वाले इलाकों में. ये तभी बनते हैं तापमान माइनस 8 डिग्री सेल्सियस से नीचे चला जाता है. 

सतह का तापमान ज्यादा, हवा का कम होना चाहिए

समुद्री पानी ये तब बनता है क्योंकि उसमें सल्फेट की मात्रा ज्यादा होती है. सबसे ज्यादा बेहतर स्थिति होती है माइनस 22 डिग्री सेल्सियस की, जिसमें यह फूल बनते हैं. लेकिन इसके लिए सतह पर मौजद बर्फ का तापमान बहुत कम नहीं होना चाहिए. वह ज्यादा होनी चाहिए और हवा का तापमान उसकी तुलना में कम होना चाहिए. तब बनते हैं ये फूल. 

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