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भारत में अगर तुर्की जैसा भूकंप आया तो क्या होगा? देश के वो 13 राज्य जहां मंडरा रहा है खतरा

तुर्की-सीरिया में आए भूकंप ने पूरी दुनिया को दहला दिया है. अगर अपने देश की बात करें तो पिछले साल भारत में करीब 1000 भूकंप के झटके आए थे. जिसमें से 240 बार तेजी से धरती हिली. भूकंप के इलाकों को पांच जोन में बांटा गया है. भारत में पांचवें जोन में आने वाले इलाकों को खतरे में माना गया है.

तुर्की के इस्केंडेरन शहर के बंदरगाह में आग लग गई. जबकि पूरे शहर में तबाही का मंजर साफ-साफ दिख रहा है. (फोटोः The Associated Press) तुर्की के इस्केंडेरन शहर के बंदरगाह में आग लग गई. जबकि पूरे शहर में तबाही का मंजर साफ-साफ दिख रहा है. (फोटोः The Associated Press)
ऋचीक मिश्रा
  • नई दिल्ली,
  • 07 फरवरी 2023,
  • अपडेटेड 7:03 PM IST

तुर्की में आए भयानक भूकंप की वजह से अब तक 3400 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. आठ हजार से ज्यादा लोगों को बचाया गया है. पिछले दो दिन में वहां 550 से ज्यादा भूकंप आ चुके हैं. भारत में हर साल कम से कम 1000 बार भूकंप आते हैं. कभी इससे थोड़े ज्यादा कभी थोड़े कम. दो सौ से ढाई सौ बार धरती का हिलना महसूस होता है. हमारे देश की जमीन का करीब 59 फीसदी हिस्सा भूकंप के उच्च खतरे वाले जोन में है. सबसे ज्यादा खतरा हिमालयी इलाकों को हैं. इस इलाके में कुछ ऐसे तगड़े भूकंप आ चुके हैं, जो रिक्टर पैमाने पर बेहद उच्च तीव्रता के थे. 

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1897 में शिलॉन्ग पठार पर 8.1 तीव्रता का भूकंप आया था. 1905 में कांगड़ा में 7.8 तीव्रता, 1934 में बिहार-नेपाल बॉर्डर पर 8.3 तीव्रता, अरुणाचल-चीन सीमा पर 1950 में 8.5 तीव्रता का भूकंप और फिर 2015 में 7.9 तीव्रता का भूकंप आया नेपाल में. इस इलाके में मध्यम से खतरनाक स्तर के भूकंप आते हैं. क्योंकि इन इलाकों के करीब ही दो महाद्वीपों की टेक्टोनिक प्लेट मिलती है. 

दक्षिणी तुर्की के ओस्मानिए शहर में अपनी संपत्ति और परिवार वालों को खोने के बाद दुखी बैठा शख्स. (फोटोः The Associated Press)

इंडियन टेक्टोनिक प्लेट और तिब्बतन प्लेट आपस में टकराती हैं. प्रेशर रिलीज करती है. इससे भूकंप आता है. इस पूरे 2400 किलोमीटर के इलाके में सबसे ज्यादा खतरा है. भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने देश को पांच अलग-अलग भूकंप जोन में बांटा है. देश में पांचवें जोन को सबसे ज्यादा खतरनाक और सक्रिय माना जाता है. इस जोन में आने वाले राज्यों और इलाकों में तबाही की आशंका सबसे ज्यादा रहती है. 

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किस जोन में है देश का कौन सा हिस्सा?

पांचवें जोन में देश की पूरी जमीन का 11% हिस्सा है. चौथे जोन में 18% और तीसरे-दूसरे जोन में 30%. सबसे अधिक खतरा जोन 4 और 5 वाले राज्यों को है. किस जोन में राज्य या उसका कौन सा इलाका आता है. ये समझना जरूरी है.  क्योंकि एक ही राज्य के अलग-अलग इलाके अलग-अलग जोन में आते हैं. सबसे पहले सबसे कमजोर जोन के बारे में जानिए...  

Earthquake Zone 1: इस जोन में आने वाले इलाकों को कोई खतरा नहीं हैं. इसलिए उनके बारे में बताने का मतलब नहीं है. 

तुर्की के अडाना शहर में गिरी एक बहुमंजिला इमारत में लोगो को खोजते राहतकर्मी. (फोटोः The Associated Press)

Earthquake Zone 2: भूकंप के जोन-2 में आते हैं राजस्थान, हरियाणा, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और तमिलनाडु का कुछ हुआ हिस्सा. 

Earthquake Zone 3: इस जोन में केरल, गोवा, लक्षद्वीप समूह, उत्तर प्रदेश और हरियाणा का कुछ हिस्सा, गुजरात और पंजाब के हिस्से, पश्चिम बंगाल का कुछ इलाका, पश्चिमी राजस्थान, मध्यप्रदेश, बिहार का कुछ इलाका, झारखंड का उत्तरी हिस्सा और छत्तीसगढ़ कुछ इलाका आता है. महाराष्ट्र, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु और कर्नाटक का भी कुछ हिस्सा है.   

Earthquake Zone 4: चौथे जोन में जम्मू और कश्मीर का हिस्सा, लद्दाख, हिमाचल और उत्तराखंड का कुछ इसलाका आता है. इसके अलावा हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, सिक्किम, उत्तर प्रदेश के उत्तरी हिस्से, बिहार और पश्चिम बंगाल का छोटा हिस्सा, गुजरात, पश्चिमी तट के पास महाराष्ट्र का कुछ हिस्सा और पश्चिमी राजस्थान का छोटा हिस्सा इस जोन में आता है.

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सबसे खतरनाक जोनः Zone 5...  इस जोन में जम्मू और कश्मीर का हिस्सा (कश्मीर घाटी), हिमाचल का पश्चिमी हिस्सा, उत्तराखंड का पूर्वी इलाका, गुजरात का कच्छ, उत्तरी बिहार का हिस्सा, भारत के सभी पूर्वोत्तर राज्य, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह. 

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