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टाइगर की टेरिटरी में चीता, रफ्तार ही बचा सकता है ओबान की जान... क्या है खतरा? जानिए 5 प्वाइंट में

ओबान... कूनो नेशनल पार्क का तेज-तर्रार चीता. ये अब करीब 50 किलोमीटर दूर मौजूद माधव नेशनल पार्क में घूम रहा है. इस पार्क में बाघ-बाघिन हैं. यानी टाइगर की टेरिटरी में चीता पहुंच चुका है. यहां तेंदुए भी बहुत हैं. सवाल ये है कि क्या चीते को इनसे खतरा है? है तो कितना?

अगर श्योपुर के माधव नेशनल पार्क में बाघ के जोड़े से ओबान चीते की टक्कर हुई तो क्या होगा. अगर श्योपुर के माधव नेशनल पार्क में बाघ के जोड़े से ओबान चीते की टक्कर हुई तो क्या होगा.
ऋचीक मिश्रा
  • नई दिल्ली/श्योपुर,
  • 19 अप्रैल 2023,
  • अपडेटेड 2:14 PM IST

अगर चीता के सामने टाइगर आ जाए तो क्या होगा? या तेंदुआ हमला कर दे फिर? ऐसे में चीते की जान सिर्फ एक ही चीज बचा सकती हैं. वो है उसकी रफ्तार. हाल ही में कूनो नेशनल पार्क (Kuno National Park) से ओबान नाम का चीता माधव नेशनल पार्क (Madhav National Park) पहुंच गया. 

कूनो से माधव नेशनल पार्क की दूरी करीब 47 किलोमीटर है. कूनो श्योपुर जिले में हैं. माधव शिवपुरी जिले में. ओबान के माधव नेशनल पार्क में जाने की वजह से कूनो नेशनल पार्क प्रबंधन अलर्ट है. चीते के मूवमेंट पर नजर रख रहे हैं. मुद्दा ये है कि चीते के सामने टाइगर या तेंदुआ आया तो क्या होगा?

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वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट और फोटोग्राफर मुकेश यादव कहते हैं कि नामीबिया से लाए गए चीतों ने तेंदुए (Leopard) और बब्बर शेर (Lion) को तो देखा है. लेकिन कभी बाघ (Tiger) से मुलाकात या झड़प नहीं हुई. अब सामने टाइगर आता है, तो चीता किस तरह से प्रतिक्रिया करेगा, ये कहना मुश्किल है. चीता भागा तो बच जाएगा. नहीं तो टाइगर का एक पंजा उसे खत्म करने के लिए काफी है. 

चीते को बाघ और तेंदुए से किस तरह से खतरा? 

- बाघ चीते को दौड़ाकर शिकार नहीं कर सकता. सिर्फ घात लगाकर ही हमला कर सकता है. चीता अधिकतम 120 किलोमीटर प्रतिघंटा की गति से भागता है. जबकि, बाघ की गति 56 से 64 किलोमीटर प्रतिघंटा होती है.  
- ऊंची घास वाली जगह पर चीते को देखना बाघ के लिए मुश्किल है. क्योंकि बाघ कभी भी ऊंचाई से देखने का लाभ नहीं ले पाता. जैसे तेंदुए करते हैं. हालांकि बाघ चाहे तो चीते का चुपके से शिकार कर सकता है.

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- तेंदुए के साथ सबसे बड़ा फायदा ये है कि वो पेड़ों पर रहता है. इसलिए वह चीते के ऊपर सीधे हमला कर सकता है. क्योंकि तेंदुए को ऊंचाई पर रहने का फायदा मिलता है. वह दूर तक एरियल व्यू ले सकता है. 
- ऊंचाई पर रहने वाला तेंदुआ पहले ही जान लेगा कि चीता किधर से आ रहा है. तो वह घात लगाकर हमला कर सकता है. ऐसे में चीते के लिए मुश्किल होगी. लेपर्ड भी 56-60 किलोमीटर प्रतिघंटा की गति से दौड़ता है. 
- चीते आमतौर पर ग्रासलैंड यानी घास के मैदानों में रहते हैं. यहां उसे पकड़ना मुश्किल है. लेकिन घने जंगल में चीते को शिकार बनाना आसान है. 

चीतों को टाइगर से ज्यादा तेंदुओं से बड़ा खतरा

मुकेश यादव ने बताया कि माधव नेशनल पार्क में टाइगर से ज्यादा तेंदुओं से खतरा है. क्योंकि तेंदुए काफी हद तक चोरी-छिपे हमला करेंगे. ये जमीन और ऊंचाई दोनों से शिकार करने में दक्ष होते हैं. लेकिन चीता अगर खुले मैदानी इलाके में है, तो तेंदुआ और बाघ दोनों के लिए इसे पकड़ना मुश्किल है. चीते की रफ्तार ही उसे बचा सकती है. 

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माधव नेशनल पार्क 137 वर्ग किलोमीटर में फैला है. इतने बड़े इलाके में बहुत घने जंगल नहीं है. बल्कि यह इलाका चीतों के लिए बेहतर है. चीतों के लिए माधव नेशनल पार्क में भी सर्वे हुआ था. अभी 10 मार्च 2023 को माधव नेशनल पार्क में एक बाघ और बाघिन छोड़े गए हैं. ये दोनों साथ में ही हैं. इतने बड़े इलाके में ओबान के साथ इनका सामना हो. इसकी आशंका कम है. लेकिन तेंदुओं से होने की है. 

चीतों को तेदुओं से क्यों है खतरा? जानिए वजह... 

तेंदुआ किसी भी वक्त चीते से ज्यादा ताकतवर होता है. चीता ज्यादा तेज दौड़ता है. चीता तेंदुए के शावक को मार सकता है. लेकिन बड़ा तेंदुआ अगर एक पंजा मार दे तो चीते की मौत तक हो सकती है. क्योंकि तेंदुए की ताकत बहुत ज्यादा होती है. चीता सिर्फ अपनी गति की बदौलत ही तेंदुए से बच सकता है. चीता समूह में रहते हैं, जबकि तेंदुए अकेले. 

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कहां रहते हैं चीते और तेंदुए

चीते और तेंदुए एकदूसरे की जगह पर जाकर रह सकते हैं. लेकिन आमतौर पर चीते ग्रासलैंड या सावाना में रहते हैं. चीता को खुली जगह चाहिए होती है. ताकि वह तेज गति में शिकार कर सके. वहीं तेंदुए घात लगाकर हमला करने में एक्सपर्ट होते हैं. ये छिपकर हमला करते हैं. इसलिए ये आमतौर पर पेड़ों के ऊपर, घने जंगल या झाड़ियों में रहते हैं. तेंदुए अपना ज्यादातर समय पेड़ों पर बिताते हैं. दिनभर सोते हैं. रात में शिकार पर निकलते हैं. चीता भी पेड़ों पर चढ़ सकते हैं लेकिन आमतौर पर गिरे हुए पेड़ों की ओट में रहते हैं. या उसपर लेटे हुए मिल जाते हैं. 

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तेंदुए के इलाके में चीता नहीं आता

अगर गलती से तेंदुए के इलाके में चीता आता है तो तेंदुआ उसे भगा देता है. क्योंकि तेंदुए की ताकत ज्यादा होती है. उसका एक पंजा चीते को बुरी तरह से जख्मी कर सकता है. इसलिए चीता हमेशा तेंदुए की पहुंच से दूर ही रहना पसंद करता है. 

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