
संयुक्त अरब अमीरात की बात अक्सर वहां के लोगों की रईसी के लिए होती है. आए-दिन वहां के चमचमाते बाजार और आलीशान घरों की तस्वीरें चौंकाती रहती हैं. लेकिन अमीरी दिखाने के लिए लोग वहां बढ़िया घर और गाड़ी ही नहीं रखते थे, बल्कि शेर-चीते भी पालते रहे. वे उसे लेकर वॉक पर भी जाते, जैसे लोग डॉग को लेकर जाते हैं. साल 2016 के अक्टूबर में दुबई के एक बीच में कारों के काफिले के साथ पांच चीतों की तस्वीर आई. ये चीते हवा खाने के लिए जंगल से समुद्र तक नहीं पहुंचे, बल्कि वे पालतू थे और अपने मालिकों के साथ आए थे. यही आखिरी तस्वीर थी, जिसमें जंगली जानवर पालतू की तरह दिखे.
तस्वीरों पर मचे बवाल के बाद हुई सख्ती
साल 2017 की शुरुआत में यूएई में हर तरह के जंगली और एग्जॉटिक एनिमल को घर पर रखने की मनाही हो गई. ये जानवर चिड़ियाघरों में, नेशनल पार्क्स में, सर्कस में या फिर रिसर्च सेंटरों पर रखे जा सकते हैं, लेकिन घर पर बिल्कुल नहीं. वहां वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत ऐसा करने वालों पर 1 करोड़ से ज्यादा का जुर्माना और 6 महीने की जेल, या फिर दोनों हो सकता है. अधिनियम में यह भी कहा गया कि अगर जंगली जानवरों को घर पर रखने वाला कोई शख्स उसके जरिए किसी को डराने की कोशिश करे तो जुर्माने की रकम बढ़ जाएगी.
पाकिस्तान में शेर-चीतों को रखने का चलन
शेरों से पाकिस्तान का खास लगाव रहा. राजनेता और बड़ा हस्तियां अक्सर शेरों के साथ अपनी फोटो डालती रहीं. साल 2009 में नवाज शरीफ के भांजे सलमान शाहबाज ने सरकार से इजाजत मांगी कि वो कनाडा से साइबेरियाई शेर मंगवाकर अपने बंगले पर रख सकें. तब उनके पिता शहबाज शरीफ सरकार में बड़े पद पर थे. परमिट जारी करने की बात मीडिया में आ गई और फिर हो-हल्ला मच गया.
कन्वेंशन ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड इन एन्डेंजर्ड स्पीशीज ने भी दखल दिया. आखिरकार नेतापुत्र को शेर मंगवाना टालना पड़ा और पुराने पाले हुए नर चीते को चिड़ियाघर भेजना पड़ा. तब पाकिस्तान में चर्चा थी कि चीता कमजोर और उदास रहने लगा था क्योंकि उसका कोई जोड़ीदार भी नहीं था.
शेर, चीते वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन से गायब
चुनाव प्रचार के दौरान भी वहां शेर, चीतों की नुमाइश होती रही, जो किसी न किसी लीडर के पाले हुए थे. वैसे तो इस्लामाबाद वाइल्डलाइफ ऑर्डिनेंस (IWO) 1979 के तहत किसी भी जंगली जानवर को पकड़ना और मारना वर्जित है. ऑर्डिनेंस में एक लंबी लिस्ट है कि कौन-कौन से पशु-पक्षी प्रोटेक्टेड हैं. इसमें सारस, हंस से लेकर हिरण और बाघ भी शामिल हैं. लेकिन शेर और चीते के लिए इसमें कोई बात नहीं है. ये कानून के मुताबिक जंगली जानवरों की लिस्ट में भी नहीं.
साल 2021 में खुद पाकिस्तान के मीडिया डॉन ने अपनी एक लंबी रिपोर्ट में माना कि इस पर बहुत काम की जरूरत है. वर्ल्ड वाइल्डलाइफ फंड पाकिस्तान भी शेर और चीतों को घरों की बात उठा चुका.
इस देश में कैफे में रखे जा रहे एग्जॉटिक पशु
थाइलैंड से भी कई बार जंगली जानवरों को घर पर पालतू बनाकर रखने का मुद्दा उठता रहा. वहां एग्जॉटिक एनिमल कैफे हैं, जहां लोमड़ी, ऊदबिलाव जैसे जंगलों में मिलने वाले पशुओं को रखा जाता है, लोग आते हैं और उन्हें छू या तस्वीर खिंचा सकते हैं. ये फ्री होगा, लेकिन इससे पहले उन्हें कम से कम इतनी कीमत की डिश खरीदनी होगी. एनिमल एक्टिविस्ट इस तरह के कैफे को कई बार बंद कराने की बात करते रहे, लेकिन कोविड से पहले तक इनके चालू रहने की खबरें आती रही थीं. वैसे इस देश में वाइल्डलाइफ प्रिजर्वेशन एंड प्रोटेक्शन एक्ट 1992 है, जो जंगली जानवरों की रक्षा की बात करता है.
अमेरिका में शेर जंगली कम, पालतू ज्यादा
अमेरिका के भी कई राज्यों में एग्जॉटिक जानवर पाले जाते हैं. इसमें चीते से लेकर सेल्वाडोर तक शामिल हैं. बिजनेस इनसाइडर की एक रिपोर्ट दावा करती है कि वहां के लगभग 12 स्टेट्स में 5 हजार से ज्यादा चीते घरों में रखे हुए हैं. वहीं वर्ल्ड वाइल्डलाइफ फंड के मुताबिक जंगलों में रहने वाले बाघों की संख्या घटकर 4 हजार से कम हो चुकी. यानी शेर जंगलों में हैं, घरों में ज्यादा. 15 अमेरिकी राज्यों में लोमड़ियां भी घरों में पाली जा सकती हैं, इसके खिलाफ कोई कानून नहीं.
इक्वाडोर में पशु-पक्षियों के पास लीगल अधिकार
ज्यादातर देशों में ह्यूमन राइट्स तक मारे जा रहे हैं, वहीं इक्वाडोर वो देश है, जहां जंगली जानवरों के भी कानूनी अधिकार हैं. एक खास मामले के बाद कोर्ट ने ये नियम बनाया. होता ये है कि लाइब्रेरियन एना बीट्रिज बरबानो प्रोआनो एक वूली मंकी को जंगल से तब घर ले आईं, जब वह एक महीने की थी. वूली मंकी को एस्ट्रेलिटा नाम दिया गया. एस्ट्रेलिटा अगले 18 सालों तक एना बीट्रिज के घर पर रही. उसने इंसानों के साथ इशारों में बातचीत करना सीखा. आवाजें निकालना सीखा. घर में आराम से रह रही थी.
फिर एक दिन एस्ट्रेलिटा को स्थानीय प्रशासन के लोग जब्त करके चिड़ियाघर में डाल देते हैं. एस्ट्रेलिटा इंसानी घर से निकल कर चिड़ियाघर में रहना बर्दाश्त नहीं कर पाई. उसे कार्डियो-रेस्पिरेटरी अरेस्ट आ गया. एक महीने के अंदर ही एस्ट्रेलिया की मौत हो गई. लेकिन उसकी मौत से पहले एना बीट्रिज ने कोर्ट में एस्ट्रेलिटा को वापस पाने के लिए केस किया था. उन्होंने कहा था कि एस्ट्रेलिटा को चिड़ियाघर में तनाव होगा. वह वहां नहीं रह पाएगी.
कोर्ट ने मालकिन और प्रशासन दोनों को तलब किया
एना बीट्रिज केस में वैज्ञानिक दस्तावेजों का हवाला दिया गया था. इसके बाद कोर्ट ने जो फैसला सुनाया उसने इतिहास लिख दिया.उसने अपने आदेश में कहा कि कहा कि स्थानीय प्रशासन और एना बीट्रिज दोनों ने ही एस्ट्रेलिटा के अधिकारों का हनन किया है. स्थानीय प्रशासन ने एस्ट्रेलिटा को चिड़ियाघर में डालने से पहले की जरूरतों पर ध्यान नहीं दिया. एना बीट्रिज ने उसे जंगल से अपने घर पर लाकर गलत किया. क्योंकि जंगल ही उसका पहला घर था.
कोर्ट ने कहा कि जंगली जानवरों को घरेलू बनाना और उनका मानवीकरण करना ऐसी प्रक्रिया है, जिससे इकोसिस्टम के प्रबंधन और प्रकृति के संतुलन पर असर पड़ेगा. इससे जानवरों की आबादी में तेजी से गिरावट आएगी. यह जंगली जानवरों के कानूनी अधिकारों का हनन है. उन्हें प्रकृति पर अधिकार प्राप्त है. उन्हें जीने का भी अधिकार है. इसके साथ ही इक्वाडोर दुनिया का पहला ऐसा देश बन गया, जिसने अपने जंगली जानवरों के लिए कानूनी अधिकार बनाए, जिसका पालन हर इंसान और हर संस्था को करना होता है.