
चीन ने चंद्रमा के अंधेरे वाले हिस्से पर अपना नया स्पेसक्राफ्ट भेजा है. यानी चंद्रमा का वो हिस्सा जो हम धरती से नहीं देख पाते. जहां कभी सूरज की रोशनी नहीं पहुंचती. इसे चंद्रमा का फार साइड या डार्क साइड भी कहते हैं. जिस जगह दुनिया का कोई देश जाने की हिम्मत नहीं कर पाया. वहां चीन क्या खोजने जा रहा है?
चीन के नए मून मिशन का नाम है Chang'e 6. यह चंद्रमा के अंधेरे हिस्से की तरफ जाने वाला चीन का दूसरा मिशन है. अगर इसे सफलता मिलती है, तो यह चंद्रमा के पिछले हिस्से से सैंपल लेकर आने वाला दुनिया का पहला मिशन होगा. चीन इसकी सफलता के साथ दुनिया में अपने विज्ञान और तकनीक का लोहा मनवा लेगा.
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इस मिशन को 3 मई 2024 को वेनचांग स्पेस लॉन्च सेंटर से लॉन्च किया गया था. लॉन्चिंग के 30 मिनट के बाद चांगई 6 मून मिशन स्पेसक्राफ्टर इसके CZ5 रॉकेट से अलग हो गया था. यह लॉन्ग मार्च रॉकेट परिवार का ही हिस्सा है. चीन का रॉकेट संभवतः कल यानी 8 मई 2024 को चंद्रमा के पिछले हिस्से तक पहुंच जाएगा.
क्या खोजने गया है चीन के अंधेरे वाले हिस्से में यह मिशन?
हमारी आंखों से चंद्रमा का सिर्फ एक ही हिस्सा दिखता है. इसे नीयर साइड कहते हैं. लेकिन इसके पिछले हिस्से को डार्क या फार साइड कहते हैं. क्योंकि यह हमारी नजरों से नहीं दिखता. इसलिए नहीं क्योंकि वहां सूरज की रोशनी नहीं पड़ती, बल्कि इसलिए क्योंकि चंद्रमा धरती के साथ टाइडली लॉक्ड है.
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पिछले कुछ वर्षों से चंद्रमा के अंधेरे वाले हिस्से पर बहुत चर्चा हो रही है. माना जाता है कि चंद्रमा के फार साइड का क्रस्ट यानी जमीनी लेयर ज्यादा मोटी है. उसमें ज्यादा गड्ढे हैं. इसमें मैदानी इलाके नहीं हैं. यहां कभी लावा बहा ही नहीं. इसलिए चीन ने चंद्रमा के पिछले हिस्से से सैंपल लाने के लिए चांगई 6 स्पेसक्राफ्ट भेजा है.
Chang'e 6 मून मिशन क्या करेगा चंद्रमा पर जाकर?
चांगई 6 मिशन कुल मिलाकर 53 दिनों का है. चांद के ऑर्बिट में पहुंचने के बाद इसका ऑर्बिटर चंद्रमा के चारों तरफ चक्कर लगाएगा. इसके बाद इसका लैंडर चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर मौजूद एटकेन बेसिन में उतरेगा. यह बेसिन 2500 किलोमीटर व्यास का है. यह बेसिन एक बड़े पत्थर के टकराने की वजह से बना था.
यह बेसिन हमारे सौर मंडल में सबसे ज्यादा बड़ा गड्ढा है. चांगई 6 स्पेसक्राफ्ट इस जगह से मिट्टी, पत्थर के सैंपल लेगा. ताकि वैज्ञानिक इसकी जांच करके चंद्रमा के इतिहास का पता कर सकें. यह स्पेसक्राफ्ट चंद्रमा की सतह पर ड्रिलिंग करेगा. मिट्टी और पत्थरों के सैंपल लेकर उन्हें एक एसेंट व्हीकल में रखकर अंतरिक्ष में लॉन्च करेगा.
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इसके बाद यह एसेंट व्हीकल ऑर्बिटल सर्विस मॉड्यूल तक पहुंचेगा. फिर यह मॉड्यूल वापस धरती तक आएगी. चीन दुनिया का इकलौता ऐसा देश है जिसने चांद के दक्षिणी ध्रुव के अंधेरे वाले हिस्से में सॉफ्ट लैंडिंग की है. 2019 में उसके चांगई-4 मिशन ने चंद्रमा के वॉन कारमान क्रेटर पर सॉफ्ट लैंडिंग की थी. सैंपल भेजा था.