
ताइवान में आए भीषण भूकंप से काफी तबाही मची. सुनामी वॉर्निंग जारी की गई. जापान और आसपास के देशों की भी जमीन हिल गई. यह सबको पता है कि ताइवान फैसिफिक रिंग ऑफ फायर (Pacific Ring of Fire) पर मौजूद है. यानी इस इलाके में भूकंप और ज्वालामुखीय गतिविधियां बहुत ज्यादा होती हैं.
लेकिन इतना बड़ा भूकंप आया कैसे?
असल में ताइवान टेक्टोनिक प्लेट्स की बेहद जटिल सेटिंग्स के ऊपर टिका है. छोटी-मोटी प्लेटों और फॉल्ट को छोड़ दीजिए. सिर्फ बड़ी टेक्टोनिक प्लेट बाउंड्री की बातें करें तो इसे ऐसे समझें...
यह भी पढ़ें: एक दिन में 2000 भूकंप... कनाडा के नीचे फट रही धरती, क्या कई हिस्सों में बिखर जाएगा ये देश?
रूयुक्यू ट्रेंच (Ryukyu Trench) के पास फिलिपीन सी प्लेट (Philippine Sea Plate) यूरेशियन प्लेट के नीचे धंसती है. ट्रेंच मतलब गहरी समुद्री घाटी. वहीं, यूरेशियन प्लेट मनीला ट्रेंच के पास फिलिपीन सी प्लेट के नीचे धंसती है. ऐसे में ताइवान के द्वीप के नीचे जमीन तीन लेयर के सैंडविच की तरह है.
इनमें से एक भी प्लेट में हरकत होती है तो दोनों ट्रेंच तक असर पहुंचता है. छोटे-मोटे भूकंप आते रहते हैं. लेकिन इतने बड़े पैमाने के भूकंप के पीछे बड़ा प्रेशर रिलीज है. ये प्रेशर टेक्टोनिक प्लेटों के खिसकने, रगड़ने, एकदूसरे के ऊपर चढ़ने-उतरने, धंसने या टूटने से बनता है.
समझिए... ताइवान के नीचे की जमीन का कैरेक्टर
ताइवान द्वीप समंदर के अंदर मौजूद एक पहाड़ीनुमा ढांचे की नोक पर टिका है. इस द्वीप के एक तरफ समंदर में ऊंचाई वाला इलाका है, जो चीन से जुड़ता है. यानी उत्तर-पश्चिम, पश्चिम और दक्षिण पश्चिम की तरफ. लेकिन अगर ताइवान के उत्तर-पूर्व, पूर्व और दक्षिण-पूर्व की बात करें तो यह एक गहरी घाटी है, जिसे वैज्ञानिक लॉन्गीट्यूडनल वैली (Longitudinal Valley) कहते हैं.
यह भी पढ़ें: जमीन के नीचे की जंग... दो टुकड़ों में बंटकर पाताल की ओर जा रही भारतीय प्लेट, हिमालय में आ सकता है बड़ा भूकंप... स्टडी
ये घाटी फिलिपीन सागर और यूरेशियन प्लेट की टक्कर से बनी है. इससे समंदर के अंदर कई बड़ी दरारें बनीं. उसमें से उत्तरी हिस्से में रूयुक्यू ट्रेंच है. यानी रूयुक्यू सबडक्शन सिस्टम. दूसरा है मनीला ट्रेंच. लेकिन वैज्ञानिकों को ताइवान के नीचे दो अनजान रिवर्स फॉल्ट मिले हैं. यानी आमतौर पर जैसे फॉल्ट होते हैं, उससे उल्टी दिशा में घूमे हुए फॉल्ट मिले.
एक रिवर्स फॉल्ट पूर्व से पश्चिम की तरफ जा रही है. ये लिवू नदी (Liwu River) फैन डेल्टा के नीचे दक्षिण की तरफ झुका हुआ फॉल्ट है. दूसरा फॉल्ट उत्तर से दक्षिण की तरफ जा रहा है. यह पूर्वी की तरफ झुकी हुई है, ताइवान के पूर्वी मध्य रेंज के पास हैं. दोनों फॉल्ट समंदर में 10 किलोमीटर की गहराई के आसपास एकदूसरे से जुड़े हैं. इसकी वजह से यहां घुमावदार जमीनी ढांचा बन रहा है.
यहीं पर Meilun फॉल्ट है. जिसने अक्टूबर 1951 में 7.3 तीव्रता का भूकंप पैदा किया था. यह पिछले दो दशकों से शांत था. लेकिन हो सकता है कि इस बार यह फॉल्ट एक्टिव हो गया हो. या फिर इससे कोई नई दरार, फॉल्ट बनी हो. जो यूरेशियन प्लेट और फिलिपीन सागर प्लेट को डिस्टर्ब कर रही हो.